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Monday, 9 July 2018

July 09, 2018

Gupt Navaratri 2018: जानिए गुप्त नवरात्रि कब से शुरू, क्या है इसका खास महत्व

Gupt Navaratri 2018

गुप्त नवरात्रि 2018 आषाढ़ मास की नवरात्रि में पड़ती है और इसको अषाढ़ नवरात्रि 2018 भी कहा जाता है. 13 जुलाई 2018 से इस साल की गुप्त नवरात्रि प्रारम्भ हो रही है. बताया जाता है कि गुप्त नवरात्रि में भी अन्य नवरात्रि की तरह पूजा विधान है. मान्यता है कि तांत्रिक सिद्धियां गुप्त नवरात्रि में प्राप्त होती हैं. गुप्त नवरात्रि में 9 दिनों तक उपवास करने का विधान बताया गया है.
बताया जाता है कि गुप्त नवरात्रि के प्रांरभ होने के पहले दिन घटस्थापना की जाता है. घटस्थापना के बाद हर रोज सुबह और शाम के समय दुर्गा माता की पूजा अराधना करनी बताई गई है. इस साल जुलाई में गुप्त नवरात्रि पड़ रही है.

गुप्त नवरात्र पौराणिक कथा (Gupt Navratri 2018 Vrat Katha)

गुप्त नवरात्र के महत्व को बताने वाली एक कथा भी पौराणिक ग्रंथों में मिलती है कथा के अनुसार एक समय की बात है कि ऋषि श्रंगी एक बार अपने भक्तों को प्रवचन दे रहे थे कि भीड़ में से एक स्त्री हाथ जोड़कर ऋषि से बोली कि गुरुवर मेरे पति दुर्व्यसनों से घिरे हैं जिसके कारण मैं किसी भी प्रकार के धार्मिक कार्य व्रत उपवास अनुष्ठान आदि नहीं कर पाती। मैं मां दुर्गा की शरण लेना चाहती हूं लेकिन मेरे पति के पापाचारों से मां की कृपा नहीं हो पा रही मेरा मार्गदर्शन करें। तब ऋषि बोले वासंतिक और शारदीय नवरात्र में तो हर कोई पूजा करता है सभी इससे परिचित हैं।
लेकिन इनके अलावा वर्ष में दो बार गुप्त नवरात्र भी आते हैं इनमें 9 देवियों की बजाय 10 महाविद्याओं की उपासना की जाती है। यदि तुम विधिवत ऐसा कर सको तो मां दुर्गा की कृपा से तुम्हारा जीवन खुशियों से परिपूर्ण होगा। ऋषि के प्रवचनों को सुनकर स्त्री ने गुप्त नवरात्र में ऋषि के बताये अनुसार मां दुर्गा की कठोर साधना की स्त्री की श्रद्धा व भक्ति से मां प्रसन्न हुई और कुमार्ग पर चलने वाला उसका पति सुमार्ग की ओर अग्रसर हुआ उसका घर खुशियों से संपन्न हुआ। कुल मिलाकर गुप्त नवरात्र में भी माता की आराधना करनी चाहिये।

क्या है गुप्त नवरात्र की पूजा विधि (Gupt Navratri 2018 Puja Vidhi)

जहां तक पूजा की विधि का सवाल है मान्यतानुसार गुप्त नवरात्र के दौरान भी पूजा अन्य नवरात्र की तरह ही करनी चाहिये। नौ दिनों तक व्रत का संकल्प लेते हुए प्रतिपदा को घटस्थापना कर प्रतिदिन सुबह शाम मां दुर्गा की पूजा की जाती है। अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं के पूजन के साथ व्रत का उद्यापन किया जाता है। वहीं तंत्र साधना वाले साधक इन दिनों में माता के नवरूपों की बजाय दस महाविद्याओं की साधना करते हैं। ये दस महाविद्याएं मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी हैं। लेकिन एस्ट्रोयोगी की सभी साधकों से अपील है कि तंत्र साधना किसी प्रशिक्षित व सधे हुए साधक के मार्गदर्शन अथवा अपने गुरु के निर्देशन में ही करें। यदि साधना सही विधि से न की जाये तो इसके प्रतिकूल प्रभाव भी साधक पर पड़ सकते हैं।

गुप्त नवरात्रि 2018 शुभ मुहूर्त (Gupt Navratri Puja Shubh Muhurat)

  • 13 जुलाई (शुक्रवार) 2018: घट स्थापना और मां शैलपुत्री पूजा
  • 14 जुलाई (शनिवार) 2018: माँ ब्रह्मचारिणी पूजा
  • 15 जुलाई (रविवार) 2018 : माँ चंद्रघंटा पूजा
  • 16 जुलाई (सोमवार) 2018: माँ कुष्मांडा पूजा
  • 17 जुलाई (मंगलवार) 2018 : माँ स्कंदमाता पूजा
  • 18 जुलाई (बुधवार) 2018 : माँ कात्यायनी पूजा
  • 19 जुलाई (बृहस्पतिवार) 2018: माँ कालरात्रि पूजा
  • 20 जुलाई (शुक्रवार) 2018 : माँ महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी
  • 21 जुलाई (शनिवार ) 2018: माँ सिद्धिदात्री, नवरात्रि पारण

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Saturday, 17 March 2018

March 17, 2018

Chaitra Navratri 2018 : सृष्टि के निर्माण का उत्सव है चैत्र नवरात्र, जानें कलश स्थापन का शुभ मुहूर्त और चैत्र नवरात्रि तिथि के बारे में

Chaitra Navratri 2018

नवरात्र शब्द से 'नव अहोरात्रों (विशेष रात्रियां) का बोध' होता है. इस समय शक्ति के नौ रूपों की उपासना की जाती है, क्योंकि 'रात्रि' शब्द सिद्धि का प्रतीक माना जाता है. मनीषियों ने वर्ष में दो बार Navratri का विधान बनाया है- विक्रम संवत के पहले अर्थात् Chaitra मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहली तिथि) से नवमी तक. इसी प्रकार इसके ठीक छह मास पश्चात आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से महानवमी अर्थात् विजयादशमी के एक दिन पूर्व तक नवरात्र मनाया जाता है.

ज्योतिषीय दृष्टि से Chaitra Navratri 2018 का विशेष महत्व है, क्योंकि इस नवरात्र की अवधि में सूर्य का राशि परिवर्तन होता है. सूर्य 12 राशियों में भ्रमण पूरा करते हैं और फिर से अगला चक्र पूरा करने के लिए पहली राशि मेष में प्रवेश करते हैं. सूर्य और मंगल की राशि मेष दोनों ही अग्नि तत्ववाले हैं, इसलिए इनके संयोग से गर्मी की शुरुआत होती है.

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धार्मिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है, क्योंकि ब्रह्मपुराण के अनुसार नवरात्र के पहले दिन आदिशक्ति प्रकट हुई थीं और देवी के कहने पर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सूर्योदय के समय ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि निर्माण का काम शुरू किया था, इसलिए इसे सृष्टि के निर्माण का उत्सव भी कहा जाता है. इसी तिथि से हिंदू नववर्ष शुरू होता है. इसके अतिरिक्त सतयुग का आरंभ भी इसी दिन हुआ था.

चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप में पहला अवतार लेकर पृथ्वी की स्थापना की थी. इसके बाद भगवान विष्णु का सातवां अवतार जो भगवान राम का है, वह भी चैत्र नवरात्र में हुआ था, इसलिए धार्मिक दृष्टि से चैत्र नवरात्र का बाकी नवरात्रों की तुलना में ज्यादा महत्व है. नवरात्र के दौरान जहां मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है, वहीं चैत्र नवरात्रों के दौरान मां की पूजा के साथ-साथ अपने कुल देवी-देवताओं के पूजा का विधान भी है, जिससे यह नवरात्र विशेष हो जाता है.

इस बार बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग : इस बार चैत्र नवरात्र इसलिए भी खास है, क्योंकि विरोधीकृत्य नव संवत्सर 2075, रविवार 18 मार्च, 2018 से प्रारंभ हो रहा है. इस साल उतरा-भाद्रपद नक्षत्र और मीन राशि में नया साल विक्रम संवत 2075 व नवरात्र शुरू हो रहे हैं. इससे सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है.

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इस साल के राजा सूर्य और मंत्री शनि होंगे. यह लगातार चौथा साल है जब नवरात्र 8 दिनों का होगा. 25 मार्च को रविवार को नवमी तिथि का क्षय हो गया है, इसलिए नवरात्र 8 दिनों का ही है. ग्रंथों में लिखा है कि जिस दिन सृष्टि का चक्र प्रथम बार विधाता ने प्रवर्तित किया, उस दिन चैत्र शुदी 1 रविवार था. इसलिए आनेवाला नव संवत्सर 2075 बहुत ही भाग्यशाली होगा, क्योंकि इस वर्ष भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रविवार है, शुदी एवं शुक्ल पक्ष एक ही है.

माता का आगमन हाथी पर : इस वर्ष माता रानी का आगमन हाथी पर हो रहा है. यह आगमन सुख-सुविधाओं के साथ जलवृष्टि वाला रहेगा. माता का आगमन रविवार के दिन हो रहा है और माता का प्रस्थान सोमवार के दिन हो रहा है. सोमवार के दिन गमन से कष्ट एवं अन्य अनावश्यक परेशानियां भी देखने को मिलेंगी.

संपूर्ण सृष्टि प्रकृतिमय : आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो यह प्रकृति और पुरुष के संयोग का भी समय होता है. प्रकृति मातृशक्ति होती है, इसलिए इस दौरान देवी की पूजा होती है. गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि संपूर्ण सृष्टि प्रकृतिमय है और हम जिसे पुरुष रूप में देखते हैं, वह भी आध्यात्मिक दृष्टि से प्रकृति यानी स्त्री रूप है. स्त्री से यहां तात्पर्य यह है कि जो पाने की इच्छा रखनेवाला है, वह स्त्री है और जो इच्छा की पूर्ति करता है, वह पुरुष है.

कलश स्थापन शुभ मुहूर्त
धर्म शास्त्र के अनुसार कलश स्थापन प्रतिपदा तिथि में प्रातः काल सर्वोत्तम होता है. अगर कोई अड़चन होती है तो मध्यान अभिजीत मुहूर्त 11:30 बजे से दिन के 12:24 तक का बेहतर विकल्प आपके पास है. वैसे प्रतिपदा तिथिपर्यंत कलश स्थापना करने में कोई दोष नहीं. नवमी पूजा के नाम से प्रचलित महानिशा पूजा 24 मार्च शनिवार की रात्रि में की जायेगी. महा अष्टमी का व्रत 24 मार्च रवि उदय उदया तिथि में किया जायेगा. 25 मार्च रविवार को नवमी तिथि है.

अतः इसी दिन अनुदेशन नवमी तिथि में नवमी का व्रत ही किया जायेगा. साथ ही श्रीराम नवमी का सनातन पर्व के अवतार के विभिन्न आयोजनों के साथ संपन्न होगा. नवरात्र संबंधित हवन पूजन 25 मार्च, रविवार को प्रातः 7:30 के बाद दिन-रात किसी भी समय किया जा सकता है. नवरात्र व्रत का पारण 26 मार्च, सोमवार को प्रातःकाल में किया जायेगा.

चैत्र नवरात्रि तिथि
18 मार्च : कलश स्थापना, मां शैलपुत्री की पूजा
19 मार्च: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
20 मार्च: देवी दुर्गा के चंद्रघंटा रूप की आराधना
21 मार्च : कुष्मांडा स्वरूप की उपासना
22 मार्च : माता स्कंदमाता की पूजा
23 मार्च : मां कात्यायनी की पूजा
24 मार्च : मां कालरात्रि की पूजा. इस वर्ष अष्टमी के दिन की जानेवाली मां महागौरी की पूजा भी इसी दिन की जायेगी. कन्या पूजन.
25 मार्च : मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ नवदुर्गा पूजन पूर्ण. प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव.
26 मार्च : व्रत का पारण दशमी तिथि को. कलश वेदी पर लगाये गये सतनज की कटाई.

Friday, 16 February 2018

February 16, 2018

Chaitra Navratri 2018 : इस कारण इस बार भी 8 दिन की ही रहेगी चैत्र नवरात्रि

Chaitra Navratri 2018

अगले माह 18 मार्च से शुरू होने वाली चैत्र नवरात्रि लगातार चौथे साल भी 8 दिन की ही रहेगी। अष्टमी और नवमी तिथि 25 मार्च को एक ही दिन होने से यह स्थिति बनी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बीते 3 सालों की तरह इस साल भी 18 मार्च से चैत्र नवरात्रि का पर्व 8 दिनों का प्रारंभ होगा। पंडितों ने इसका कारण तिथियों में गड़बड़ होना माना है। दूसरी ओर नवरात्रि के पहले ही दिन गुड़ी पड़वा और विक्रम नवसंवत्सर 2075 का शुभारंभ होगा। इस नूतन वर्ष का नाम विरोधकृत रहेगा। रविवार को नव वर्ष का शुभारंभ होने पर इस दिन के स्वामी सूर्य वर्ष के राजा और शनि मंत्री होंगे। ज्योतिषाचार्य डॉ. दीपेश पाठक का कहना है कि दोनों ग्रह परस्पर विरोधी है। बावजूद इसके सूर्य के प्रभाव से दुनिया में भारत का वर्चस्व बढ़ेगा और शनि के मंत्री रहते न्याय व्यवस्था सुदृढ़ होगी और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन बढ़ेंगे। प्रतिपदा तिथि 1 दिन पूर्व 17 मार्च को शाम 7.41 बजे प्रारंभ हो जाएगी, लेकिन इसे अगले दिन रविवार को सूर्योदय काल से ही माना जाएगा। इसलिए पंडितों ने चैत्र नवरात्रि इसी दिन से प्रारंभ होना माना है।

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सर्वार्थ सिद्धि योग में नवरात्रि का होगा शुभारंभ

यह संयोग है कि नवरात्रि का शुभारंभ और समापन दोनों ही रविवार के दिन होंगे। पहले दिन नवरात्रि का शुभारंभ सर्वार्थसिद्धि योग में होगा। यह योग इस दिन सूर्योदय से रात 8.18 बजे तक रहेगा। समापन दिवस पर रामनवमी का शुभ मुहूर्त रहेगा।

नए वर्ष में मेघेष शुक्र और धनेश होंगे चंद्र

पंडित पाठक के अनुसार इसी दिन विक्रम नव संवत्सर 2075 का शुभारंभ होगा। इस बार नव वर्ष का नाम विरोधकृत रहेगा ।जिस दिन नूतन वर्ष का शुभारंभ होता है, उस दिन के स्वामी ग्रह को उस वर्ष का राजा माना जाता है। इसलिए इस वर्ष का स्वामी रविवार होने से सूर्य राजा, मंत्री शनि रहेंगे। इसे आकाशीय मंत्रिमंडल की संज्ञा दी जाती है। मेघेष शुक्र व धनेश चंद्र होंगे। इस कारण फसल अच्छी रहेगी, पर प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान भी बहुत होगा।

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कब-कब रही 8 दिन कि चैत्र नवरात्रि

लगातार यह चौथा साल है, जब चैत्र नवरात्रि 8 दिन के हो रहे है। इसके पूर्व वर्ष 2015 में 21 से 28 मार्च तक, 2016 में 8 से 15 मार्च तक, 2017 में 29 मार्च से 5 अप्रैल तक चेत्र नवरात्रि थी। इसके पूर्व वर्ष 2014 में नवरात्रि 31 मार्च से 8 अप्रैल तक पूरे 9 दिन की थी। पंडित पाठक के अनुसार जब दो तिथियां एक ही दिन हो जाती है तब ऐसी स्थिति बनती है इस वर्ष नवरात्रि का शुभारंभ 18 मार्च को होगा, वही समापन 25 मार्च को होगा। इसमें आखिरी दिन अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन रहेगी।

Source:Jagran