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Monday, 2 July 2018

July 02, 2018

हरभजन सिंह की जीवनी - Biography of Harbhajan Singh in Hindi

Harbhajan Singh Biography in Hindi

हरभजन सिंह प्लाहा भारत के अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाडी हैं। वे Indian Premier League के मुम्बई इंडियन्स टीम तथा पंजाब राज्य क्रिकेट टीम (2012-13) के भूतपूर्व कप्तान भी हैं। वे स्पिन गेंदबाजी में निपुण हैं और टेस्ट मैचों में ऑफ-स्पिनर द्वारा सर्वाधिक विकेट लेने वाले दूसरे स्पिनर हैं।

Harbhajan Singh Hindi Biography (Wiki)

हरभजन को उनके पहले कोच चरनजीत सिंह भुल्लर ने एक बल्लेबाज के तौर पर प्रशिक्षित किया, लेकिन उनके कोच की मौत के बाद उन्हें स्पिन गेंदबाजी में बदल दिया गया क्योंकि उन्हें दवेन्द्र अरोड़ा अरोड़ा हर रोज़ की कामकाजी नैतिकता की सफलता का श्रेय करता है जिसमें सुबह में तीन घंटे का प्रशिक्षण सत्र शामिल था, इसके बाद दोपहर का सत्र 3 बजे से लेकर सूर्यास्त तक तक चले।

2000 में अपने पिता की मृत्यु के बाद, हरभजन परिवार का सिर बन गया, और 2001 तक उनकी तीन बहनों के लिए विवाह का आयोजन किया। 2002 में उन्होंने कम से कम 2008 तक अपनी शादी को ठुकरा दिया था। 2005 में उन्होंने फिर से शादी की अफवाहों को फेरबदल कर बैंगलोर की एक दुल्हन से जोड़ा, जिसमें कहा गया था कि वह "कुछ वर्षों के बाद" केवल निर्णय लेगा, और वह अपने परिवार द्वारा चुनी गई एक पंजाबी दुल्हन की तलाश करें। 

ऐसे देश में जहां क्रिकेटरों को मूर्तियां दी जाती हैं, हरभजन का प्रदर्शन उन्हें सरकार के प्रशंसा और आकर्षक प्रायोजकों को लेकर आया है। 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनके प्रदर्शन के बाद, पंजाब सरकार ने उसे रुपये का भुगतान किया। 5 लाख रूपये, एक भूखंड, और पंजाब पुलिस में एक पुलिस अधीक्षक बनने की पेशकश, जिसे उन्होंने स्वीकार किया।

कंकाबुलरी के साथ काम करने के बावजूद हरभजन ने मार्च 2002 में गुवाहाटी में टीम होटल के बाहर पुलिस के साथ विवाद में मामूली चोट लगी थी। जब हरभजन ने होटल में एक फोटोग्राफर को अनुमति देने से इंकार कर दिया, तो स्कफल टूट गई। हरभजन ने अपनी गेंदबाजी में कटौती की और पुलिस ने जब उसे मारा, तो उसकी कोहनी को घायल कर दिया।

इंडियन क्रिकेट टीम में हरभजन सिंह को भज्जी के नाम से जाना जाता है! हरभजन सिंह का नाम बहुत पापुलर है! हरभजन सिंह के क्रिकेट career में बहुत से विवाद हुए है! हरभजन सिंह के क्रिकेट career में सबसे ज्यादा विवाद तब हुआ था जब हरभजन सिंह ने Andrew Simond को “Monkey” कह दिया था! इस विवाद के कारण हरभजन सिंह के ऊपर कई मैच का प्रतिबन्ध लग गया था! हरभजन सिंह और Andrew Simond के बीच का ये विवाद बहुत काफी time तक चर्चा में रहा! हरभजन सिंह ने अभी तक क्रिकेट से संन्याश नहीं लिए है! और आज भी हरभजन सिंह क्रिकेट मैच खेलते है! हरभजन सिंह का क्रिकेट career बहुत ही successful रहा है

हरभजन सिंह ने 100 से भी ज्यादा टेस्ट मैच खेले है! किसी भी क्रिकेट प्लेयर के लिए 100 से भी ज्यादा टेस्ट मैच खेलना अपने आप में एक रिकॉर्ड है! हरभजन सिंह कई सालों तक भारतीय क्रिकेट टीम के टॉप गेंदबाज रह चुके है! इसके साथ साथ कई ऐसे नाजुक मौके पर हरभजन सिंह ने अपने कमाल की गेंदबाजी से भारत को जीत दिलाई है!

गेंदबाजी के साथ साथ हरभजन सिंह ने कई बार बल्लेबाजी में भी अपना कमाल दिखाया है! हरभजन सिंह को तेज गति की बल्लेबाजी के लिए जाना जाता है! कई अहम् मौके पर हरभजन सिंह ने उपयोगी बल्लेबाजी भी की है!

Harbhajan Singh  Cricket Carrier:

करियर के शुरुवाती दिनों में उनका गेंदबाजी एक्शन चर्चा का विषय बना रहा और क्रिकेट अथॉरिटीज ने उनकी एक्शन पर काफी सवाल भी उठाए थे। उन्होंने अहम मौको पर खुद को भारतीय क्रिकेट का एक महत्वपूर्ण और सफल क्रिकेटर साबित किया। 25 मार्च 1998 को हरभजन सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया और 17 अप्रैल 1998 को न्यूज़ीलैण्ड के खिलाफ उन्होंने एकदिवसीय मैचों में डेब्यू किया।

2002 में भारत के सर्वश्रेष्ट स्पिनर अनिल कुंबले के घायल होने के बाद जब भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने उन्हें बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की टीम में शामिल किया तो उनके करियर को एक नयी दिशा मिली। इस सीरीज में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत के साथ-साथ हरभजन ने 32 विकेट लेकर खुद को साबित भी किया और टेस्ट क्रिकेट में हैट-ट्रिक लेने वाले वे पहले भारतीय गेंदबाज बने।

साथ ही 1 दिसम्बर 2006 को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हरभजन सिंह ने टी20 में डेब्यू किया। 2008 में आईपीएल में वे मुंबई की तरफ से खेले और अभी भी खेलते है। भारतीय क्रिकेट टीम के लिए उन्होंने बहुत से घरेलु और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेले है। हरभजन सिंह का पसंदीदा खिलाडी सचिन तेंडुलकर है।

सन 2009 में उन्हें भारत सरकार ने पद्म श्री अवार्ड से सम्मानित किया था।

Harbhajan Singh Wickets:

Harbhajan Singh के लाइफ में एक ऐसा भी समय आया, जब उनका बॉलिंग परफ़ोर्मेंस पूरी तरह से बेपटरी हो गया।वह साल था 1999-2000 का। जब उन्हें कई सीरिजों में विकेटों के भीषण सूखे का सामना करना पड़ा। इसके परिणामस्वरूप उन्हें टीम से निकाल दिया गया।पर सन 2000 के मध्य में वे अपने बॉलिंग फॉर्म को सुधारने में कामयाब रहे।उसी साल उन्होंने बोर्ड प्रेसिडेंट 11 की ओर से खेलते हुए साउथ अफ्रीका के खिलाफ दोनों पारियों में क्रमश: 2/88 और 2/59 की अच्छी बॉलिंग फिगर से बॉलिंग किया और 38 और 39 रन भी बनाये।जिसके कारण उनकी टीम साउथ अफ्रीका को हारने में कामयाब रही।पर उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह ना मिला सका। उनकी जगह मुरली कार्तिक को मौका दिया गया।फिर वे भारत लौट आए और घरेलू टीम के लिए खेलने लगे।

कुछ समय बाद वे अपना पुराना लय पाते हुए पंजाब की ओर से खेलते हुए चार फ़र्स्ट क्लास मैच में 24 विकेट्स लिये।इसी बीच उन्हें National Cricket Academy में 1970 में भारतीय टीम का हिस्सा रहे ऑफ स्पिनर श्रीनिवास वेंकटराघवन और इरापली प्रसन्ना से बॉलिंग गुर सीखने को मौका मिला।पर अनुशासनहीनता के कारण उन्हें Academy से निकाल दिया गया।इस कारण Harbhajan Singh का टीम इंडिया में चयन होने का जो भी बची-खुची संभावना थी, वो भी खत्म हो गई।इसी साल उनपर एक बड़ी मुसीबत टूट भी पड़ी, जब उनके पिता का निधन हो गया और उनके 4 कुंवारी बहनों वाले परिवार का इकोनोमी बिगड़ गया।परिवार में अकेले बेटे, हरभजन सिंह पैसा कमाने के लिए अमेरिका में ट्रक चलाने की सोचने लगे।ऐसे में वर्तमान कप्तान बंगाल टाइगर सौरव गांगुली सामने आए। वे उनकी टीम में सेलेकशन के लिए लगातार लड़ते रहे।