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Thursday, 9 August 2018

August 09, 2018

ऐसे होंठ वाली लडकियाँ अपने ब्वॉयफ्रेंड से करती हैं सबसे ज्यादा प्यार

Lips-Shape

होंठों की शेप – किसी की बाहरी पर्सनैलिटी से उसके व्‍यवहार के बारे में पता लगाया जा सकता है।

हर व्‍यक्‍ति का स्‍वभाव अलग होता है और इसकी पहचान आप उसके बाहरी व्‍यक्‍तित्‍व से कर सकते हैं। कोई हाथों के हाव-भाव से तो कोई चेहरे की आकृति से सामने वाले व्‍यक्‍ति का नेचर जान लेता है। लड़कियों के स्‍वभाव के बारे में भी जानने के लिए सामुद्रिक शास्‍त्र में कई तरीके बताए गए हैं।

आज हम आपको बताएंगें कि लड़कियों के होंठों की शेप और रंग से आप उनके स्‍वभाव के बारे में कैसे जान सकते हैं।

अगर किसी लड़की के होंठ ज्‍यादा आकर्षक लगते हैं तो ऐसी लड़कियां मेहनती, बुद्धिमान, ईानदार, दयालु और दूसरों का सम्‍मान करने वाली होती हैं।

पतले होंठ वाली लड़कियां अपने परिवार और जीवनसाथी से बहुत प्‍यार करती हैं। इनका स्‍वभाव अत्‍यंत महत्‍वाकांक्षी होता है। ये पारिवारिक तो नहीं होती लेकिन फिर भी अपने पार्टनर को मुश्किल में कभी अकेला नहीं छोड़ती हैं।

मोटे होंठों की शेप वाली लड़कियां थोड़ी झगड़ालू और तुनकमिजाज वाली होती हैं। इनके ऐसे ही व्‍यवहार के कारण इनकी कभी अपने पार्टनर से नहीं बनती है। इन्‍हें दूसरों के साथ घुलने-मिलने में भी समय लगता है।

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जिन लड़कियों के होंठ काले होते हैं वो पढ़ाई में तेज और होशियार होती हैं। ये बातूनी होती हैं और अपने पति की खूब सेवा करती हैं।

गुलाबी होंठ वाली लड़कियां अपने स्‍वभाव से हर किसी का दिल जीत लेती हैं। ये उदार, बुद्धिमान और ईमानदार होती हैं। इनमें थोड़ा अहंकार भी होता है।

सामुद्रिक शास्‍त्र के अनुसार ऐसे कई संकेत हैं जिनकी सहायता से आप किसी व्‍यक्‍ति के स्‍वभाव के बारे में जान सकते हैं। होंठों के अलावा महीने में जन्‍म के अनुसार भी लड़कियों के भाग्‍यशाली होने का पता लगाया जा सकता है।

सामुद्रिक शास्‍त्र की मानें तो जनवरी में जन्‍म लेने वाली लड़कियां बहुत रूपवान और सुंदर होती हैं। ये पढ़ाई में भी तेज होती हैं और अपनी मेहनत के दम पर सफलता हासिल करती हैं।

वहीं फरवरी के महीने में जन्‍म लेने वाली लड़कियां बहुत प्‍यारी और सुंदर होती हैं। ये जो भी करती हैं अपने मन से करती हैं और दूसरों की बातों पर ध्‍यान नहीं देती हैं। जो ये चाहती हैं वही करती हैं फिर चाहे लोग कुछ भी बातें करते रहें।

जुलाई के महीने में जन्‍म लेने वाली लड़कियां पल भर में किसी को भी अपना दीवाना बना सकती हैं। अगस्‍त में जन्‍मी लड़कियां सुंदर और भाग्‍यशाली होती हैं। इनकी चंचल अदाएं सब को बहुत पसंद आती हैं और इन्‍हें लव मैरिज करना ज्‍यादा पसंद होता है। चंचल होने के कारण इनके लव अफेयर्स भी होते हैं और ये बहुत भाग्‍यशाली होती हैं कि इन्‍हें अपने प्‍यार से शादी करने का मौका मिलता है।

अक्‍टूबर के महीने में जन्‍म लेने वाली लड़कियां थोड़ी गुस्‍सैल होती हैं लेकिन इनका दिल बहुत साफ होता है। ये बहुत सुंदर और भाग्‍यशाली होती हैं। कोई भी इंसान इन्‍हें देखते ही दीवाना हो सकता है।

अगर आपका जन्‍म इन महीनों में हुआ है तो आप बहुत भाग्‍यशाली हैं, साथ ही अगर आपकी पत्‍नी या गर्लफ्रेंड का जन्‍म इन महीनों में हुआ है तो ये आपके लिए बहुत खुशी की बात है कि आपको सुंदर के साथ-साथ भाग्‍यशाली जीवनसाथी का साथ मिला है।

Tuesday, 6 March 2018

March 06, 2018

गजब है इस चायवाले की इनकम! चाय बेचकर एक महीने में कमाता है 12 लाख

गजब है इस चायवाले की इनकम! चाय बेचकर एक महीने में कमाता है 12 लाख

अभी तक आपने चाय वालों के बहुत ही चर्चे सुने होंगे जो आश्चर्य में डाल देने वाले होते हैं। ऐसा ही एक और वाकया सामने आया है जिसके बारे में सुनकर हर कोई हैरान है। यह चाय वाला चाय बेचकर इतनी कमाई कर रहा है जितनी बड़े—बड़े बिजनेसमैन भी नहीं करते है। इतना ही बल्कि यह चायवाला कोई आम चायवाला नहीं बल्कि महाराष्ट्र का सबसे अमीर चायवालाहै। यह चायवाला एक महीने में 12 लाख रुपए कमाता है। आपको बता दें कि यह शख्स पुणे के नवनाथ येवले हैं जिनकी येवले टी स्टॉल नाम से बहुत फेमस टी स्टाल है। इस टी स्टाल पर एक दिन में हजारों कप चाय बिकती है।

नवनाथ का कहना है की पुणे में चाय ब्रेड का आइडिया उन्हें 2011 में आया था। इसके बाद येवले टी हाउस के संस्थापक नवनाथ की पहचान इतनी बढ़ गई है कि अब वो इस चाय ब्रैंड को दुनियाभर में पॉपुलर करने की सोच रहे हैं। येवले का कहना है की शहर में उनके दो आउटलेट हैं और एक दिन में वो करीब 3000-4000 से ज्यादा कप चाय बेचते हैं। इसस हर महीने इनकी इनकम 10 से 12 लाख तक हो जाती है।

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येवले का कहना है की 2011 में उन्हें चाय को एक ब्रैंड की तरह स्थापित करने का आइडिया आया। लेकिन पुणे में कोई भी अच्छा चायवाला नहीं था इसलिए उन्होंने चार साल तक चाय पर स्टडी की और उसके बाद अच्छी गुणवत्ता से चाय ब्रैंड बनाया। आज उनके हर टी स्टाल पर करीब 10-14 लोग काम करते हैं।

गजब! हाईवे पर 55 साल की ये महिला 20 साल से कर रही है ट्रकों के पंक्चर ठीक

दिल्ली की शांति देवी ऐसी महिला हैं जो मिनटों में गाड़ियों के टायर बदलकर पंक्चर ठीक कर देती हैं। वो बड़ी कुशलता से बड़े-बड़े ट्रकों के टायर को भी पलक झपके बदल देती हैं और उनके पंक्चर भी ठीक कर देती हैं। 55 साल की शांति देवी इस उम्र में भी रोजाना लगभग 12 घंटे काम करती हैं। वो पिछले 20 साल से नेशनल हाइवे 4 पर लगे संजय गांधी नगर ट्रांसपोर्ट डिपो (आजादपुर मंडी) में पंक्चर ठीक कर रही हैं।

Tuesday, 27 February 2018

February 27, 2018

डॉ राजेन्द्र प्रसाद का जीवन परिचय...

Dr rajendra Prasad Biography in hindi

Dr Rajendra Prasad Biography in hindi – राजेन्द्र प्रसाद भारतीय गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति थे । उनमें सादगी, त्याग, सेवा और देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी। राजेन्द्र प्रसाद ने अपना पूरा जीवन पूरी तरीके से स्वतंत्रता आन्दोलन को समर्पित कर दिया था। वह बहुत ही सरल स्वभाव के इंसान थे जो सभी वर्ग को व्यक्तियों के साथ बहुत ही सामान्य व्यवहार रखते थे।
डॉ राजेन्द्र प्रसाद का प्रारम्भिक जीवन- Early Life of Dr Rajendra Prasad

डॉ प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर, 1884 को बिहार के एक छोटे से गांव जीरादेई में हुआ था। उनके पूर्वज संयुक्त प्रांत के अमोढ़ा नाम की जगह से पहले बलिया और फिर बाद में सारन (बिहार) के जीरादेई आकर बसे थे। आपके पिता महादेव सहाय की तीन बेटियां और दो बेटे थे, जिनमें राजेन्द्र प्रसाद सबसे छोटे थे। उनके पिता फ़ारसी और संस्कृत भाषा के विद्वान थे. जबकि उनकी मॉं कमलेश्वरी देवी एक धार्मिक महिला थी। राजेन्द्र प्रसाद को केवल 5 वर्ष की उम्र में ही उनके समाज के रिति-रिवाजों के अनुसार उन्हे एक मौलवी के सुपुर्द कर दिया गया था जिसने उन्हे फारसी भाषा सिखाई।

डॉ राजन्द्र प्रसाद की शिक्षा- Rajendra Prasad Education

राजन्द्र प्रसाद की प्रारंभिक शिक्षा उन्हीं के गांव जीरादेई में हुई। बचपन से ही उनकी दिलचस्पी पढ़ाई में थी। 1896 में वें जब वह पांचवी कक्षा में थे तब 12 वर्ष की उम्र में उनकी शादी राजवंशी देवी से हो गयी थी। आगे की पढाई के लिए उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय में आवेदन पत्र डाला जंहा उनका दाखिला हो गया और 30 रूपए महीने की छात्रवृत्ति मिलने लगी। उनके गांव से पहली बार किसी युवक ने कलकत्ता विश्विद्यालय में प्रवेश पाने में सफलता प्राप्त की थी। तो स्वाभाविक है कि राजेंद्र प्रसाद और उनके परिवार के लिए यह गर्व की बात थी।

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इसके बाद राजेन्द्र प्रसाद ने सन् 1902 में कलकत्ता प्रेसिडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया। 1915 में कानून में मास्टर की डिग्री पूरी की जिसके लिए उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। इसके बाद उन्होंने कानून में डॉक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त की। इसके बाद पटना आकर वकालत करने लगे जिससे उन्हे दौलत और शौहरत दोनों भरपूर मात्रा में प्राप्त हुई।

डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद के राजनीति में कदम-

बिहार मे अंग्रेज सरकार के नील के खेत थे, सरकार अपने मजदूर को उचित वेतन नहीं देती थी। 1917 मे गांधीजी ने बिहार आकर इस समस्या को दूर करने की पहल की। उसी दौरान डॉ प्रसाद गांधीजी से मिले और उनकी विचारधारा प्रभावित हुए। 1919 मे पूरे भारत मे सविनय आन्दोलन की लहर थी। गांधीजी ने सभी स्कूल, सरकारी कार्यालयों का बहिष्कार करने की अपील की। जिसके बाद डॉ प्रसाद ने अंपनी नौकरी छोड़ दी।

चम्पारण आंदोलन के दौरान राजेन्द्र प्रसाद गांधी जी के वफादार साथी बन गए थे। गांधी जी के प्रभाव में आने के बाद उन्होंने अपने पुराने और रूढिवादी विचारधारा का त्याग कर दिया और एक नई ऊर्जा के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। 1931 में काँग्रेस ने आन्दोलन छेड़ दिया। इस दौरान डॉ प्रसाद को कई बार जेल जाना पड़ा। 1934 में उनको बम्बई काँग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। वे एक से अधिक बार अध्यक्ष बनाये गए। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। इस दौरान वे गिरिफ्तार हुए और नजर बंद कर दिए गए|

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भले ही 15 अगस्त, 1947 को भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई लेकिन संविधान सभा का गठन उससे कुछ समय पहले ही कर लिया गया था जिसके अध्यक्ष डॉ प्रसाद चुने गए थे। संविधान पर हस्ताक्षर करके डॉ प्रसाद ने ही इसे मान्यता दी।

राजेन्द्र प्रसाद बतौर राष्ट्रपति-First President of India

डॉ राजेन्द्र प्रसाद के रूप में भारत गणराज्य को 26 जनवरी 1950 में प्रथम राष्ट्रपति मिला। इसके बाद वह 1962 तक वह राष्ट्रपति रहे। इसके बाद वह स्वेच्छा से 1962 मे अपने पद को त्याग कर वे पटना चले गए ओर जन सेवा कर जीवन व्यतीत करने लगे।

भारत के राष्ट्रपति बनने से पहले वे एक मेधावी छात्र, जाने-माने वकील, आंदोलनकारी, संपादक, राष्ट्रिय नेता, तीन बार अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष, भारत के खाद्य एवं कृषि मंत्री, और संविधान सभा के अध्यक्ष रह चुके थे।

डॉ राजनेद्र प्रसाद को उनके राजनैतिक और सामाजिक योगदान के लिए उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से 1962 नवाजा गया।

डॉ राजेन्द्र प्रसाद का निधन-

28 फरवरी, 1963 को डॉ प्रसाद का निधन हो गया। उनके जीवन से जुड़ी कई ऐसी घटनाएं है जो यह प्रमाणित करती हैं कि राजेन्द्र प्रसाद बेहद दयालु और निर्मल स्वभाव के व्यक्ति थे। भारतीय राजनैतिक इतिहास में उनकी छवि एक महान और विनम्र राष्ट्रपति की है।

1921 से 1946 के दौरान राजनितिक सक्रियता के दिनों में राजेन्द्र प्रसाद पटना स्थित बिहार विद्यापीठ भवन में रहे थे। मरणोपरांत उसे ‘राजेन्द्र प्रसाद संग्रहालय’ बना दिया गया।

Monday, 12 February 2018

February 12, 2018

साड़ी पहनकर 9000 फुट से लगाई छलांग, बनाया World Record

Shetal Mahajan

पैराशूट पहनकर आसमान से कूदना काई कोई नई बात नहीं है। लेकिन अगर कोई साड़ी पहनकर 9000 फुट से छलांग लगाता है तो ये वाकई आश्चर्यजनक बात है। ये कारनामा किया है एक भारतीय महिला ने, जिन्होंने स्काइडाइविंग का एक अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।

साड़ी पहनकर छलांग लगाने वाली पहली महिला
पुणे की 35 साल की शीतल राणे महाजन ने साड़ी पहनकर पैराशूट की मदद से डाइव लगाई और सभी को हैरान कर दिया। उन्होंने थाइलैंड के पटाया में 9000 फुट की ऊंचाई से स्काइडाइविंग की। उन्होंने एक बार नहीं बल्कि दो बार छलांग लगाई और इसी के साथ वो महाराष्ट्र की मशहूर 'नऊसारी साड़ी' पहनकर स्काइडाइव करने वाली दुनिया की पहली महिला बन गई हैं।

'नऊसारी' साड़ी के साथ कूदना है ज्यादा मुश्किल
आपको बदा दें कि नऊसारी साड़ी महाराष्ट्र में आम महिलाएं पहनती हैं। इस साड़ी की खासियत ये है कि इसकी लंबाई 8 मीटर से ज्यादा होती है, जब्कि आम साड़ियों की लंबाई करीब 6 मीटर होती है। इसे खास तरह से लपेटा जाता है जो अपने आप में काफी जटिल है। यही कारण है कि इस साड़ी के ऊपर पैराशूट पहनकर आसमान से कूदना शीतल के लिए काफी मुश्किल था। उन्होंने कहा कि वैसे तो ये साड़ी पहनना ही काफी जटिल है, फिर उसके बाद पैराशूट, सेफ्टी गियर, हेल्मेट, गॉगल, जूते, जैसी सभी चीजें पहनकर कूदना चुनौती भरा होता है। उन्होंने कहा कि मैं ऐसा करके ये बताना चाहती थी कि भारतीय महिलाएं साड़ी में सिर्फ खूबसूरत ही नहीं दिख सकतीं, बल्कि इसे पहनकर बेहद मुश्किल काम भी कर सकती हैं।

स्काइडाइविंग है शीतल का पैशन
आपको बता दें कि शीतल राणे के लिए स्काइडाइविंग करना एक जुनून है। वो दो बच्चों की मां हैं और उन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया जा चुका है। शीतल के नाम 18 नेशनल रिकॉर्ड हैं, छह अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड हैं और वो दुनियाभर में 700 से ज्यादा बार आसमान से छलांग लगा चुकी हैं। उन्होंने 2004 में नॉर्थ पोल में हेलीकॉप्टर से बिना प्रैक्टिस किए छलांग लगाई थी, जिसके बाद वो मशहूर हो गईं।

Source: LiveHindustan

Tuesday, 30 January 2018

January 30, 2018

4G को पछाड़ एलईडी बल्ब देगा हाई स्पीड इंटरनेट, 10GB प्रति सेकंड होगी स्पीड


आज के समय में 4G इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। लेकिन अब तकनीक 4G से भी आगे बढ़ने वाली है। आने वाले समय में 4G को पीछे छोड़ते हुए वाई-फाई या ब्रॉडबैंड लोगों को हाई स्पीड इंटरनेट डाटा का अलग ही अनुभव प्रदान करेगा। लेकिन चौकाने वाली बात यह है की आने वाले समय में आपको एलईडी बल्ब से इंटरनेट की सुविधा मिल सकती है। आइए जानते है कैसी होगी यह तकनीक: 

हाल ही में एक प्रोजेक्ट के तहत इन्फर्मेशन ऐंड टेक्नॉलजी मिनिस्ट्री ने एक नई तकनीक का सफल टेस्ट किया है। इस नई तकनीक को लाई-फाई का नाम दिया गया है। 

क्या है ये नई तकनीक: Li-Fi डाटा ट्रांसफर के लिए रेडियो फ्रिक्वेंसी वेव्स की जगह विजिबल लाइट कम्युनिकेशंस या इंफ्रारेड या नजदीकी अल्ट्रावॉयलेट का उपयोग करता है। यह टेक्नोलॉजी 400 और 800 THz (780–375 nm) के बीच के विजिबल लाइट का प्रयोग करता है। बल्ब को स्विच ऑन या ऑफ करने से इसका उपयोग किया जाएगा, चूंकि यह नैनोसेकेंड में होगा इसलिए आमतौर पर हम आंखों से नहीं देख पाएंगे। 

Li-Fi नाम की यह तकनीक Wi-Fi की जगह नहीं लेना चाहती लेकिन यह अपने तरीके के फायदे लेकर आया है विशेषतौर पर सिक्योरिटी। जैसा कि हम जानते हैं प्रकाश की तरंगे दीवार के आर-पार नहीं हो सकती, यह तकनीक कम दूरी के लिए काफी प्रभावी होगी और हैकिंग जैसी मुश्किलों को रोकेगी। 

सुपर फास्ट स्पीड पर होगा डाटा ट्रांसफर : उम्मीद की जा रही है की इस तकनीक से 1km तक के इलाके में 10GB प्रति सेकंड की स्पीड से डाटा ट्रांसफर किया जा सकेगा। इस तकनीक की मदद से लगभग देश के हर हिस्से में इंटरनेट उपलब्ध करवाना संभव हो सकेगा। 

स्मार्ट सिटीज लाने में होगा मददगार : इस प्रोजेक्ट पर कार्य कर रही नीना पहुजा के अनुसार- आने वाले समय में स्मार्ट सिटीज में लाई-फाई तकनीक काफी काम आएगी। इसमें इंटरनेट की जरुरत होगी और इसे इस तकनीक के जरिए पूरा किया जा सकेगा। 

आईआईटी मद्रास के साथ काम चल रहा है: इस प्रोजेक्ट पर अभी आईआईटी मद्रास में काम चल रहा है। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में एलईडी बल्ब बनाने वाली कंपनी फिलिप्स भी साथ दे रही है। इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस अपने इस प्रोजक्ट का इस्तेमाल बेंगलुरु में करना चाहता है। 

क्या है फिलिप्स लाइटिंग इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर का कहना : इस पूरे मामले पर फिलिप्स लाइटिंग इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर सुमित जोशी का कहना है, 'हम नई तकनीकों को लाए जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इस क्षेत्र में नई तकनीकों पर काम करते रहेंगे।'

Friday, 18 August 2017

August 18, 2017

1 जुलाई को हुआ बच्ची का जन्म, नाम रखा जीएसटी

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देशभर में 1 जुलाई से जीएसटी लागू हो चेका है। हालांकि एक परिवार के लिए यह पल बेहद खास बन गया। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के बैकुंठपुर में इन दिनों एक बच्ची का जन्म चर्चा का विषय बना हुआ है। गांव में रहने वाले जगदीश प्रसाद सोनवानी के यहां एक जुलाई को बेटी का जन्म हुआ। बेटी के जन्म पर जगदीश ने उसका नाम जीएसटी रख दिया।

जगदीश पेशे से कारपेंटर है और उसे लगा कि 1 जुलाई का दिन काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देशभर में जीएसटी लागू हो गया है। उन्होंने अपनी पत्नी सरोजनी से बेटी का नाम जीएसटी रखने के लिए सहमति ली, फिर बच्ची की दादी से भी पूछा। दादी के हां कहने के बाद उन्होंने अपनी बेटी का नाम जीएसटी रख दिया।

बच्ची का नाम त्रस्ञ्ज रखने के बाद जगदीश प्रसाद अचानक चर्चा में आ गए। लोग यह जानने और देखने को आतुर हैं कि आखिर वह कौन शख्स है जिसने अपनी बेटी का नाम त्रस्ञ्ज रख दिया। यही नहीं, बच्ची त्रस्ञ्ज और उसकी मां की तस्वीर इन दिनों सोशल मिडिया में भी खूब वायरल हो रही है।

गौरतलब है कि एक देश-एक कर के सपने के साथ 30 जून-1 जुलाई की मध्यरात्रि से जीएसटी लॉन्च हो गया है। इस मौके पर संसद में मध्यरात्रि में स्पेशल सेशन बुलाया गया था। जीएसटी लागू होने के मौके पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई दिग्गज मौजूद रहे। इसे स्वतंत्र भारत में अब तक का सबसे बड़ा कर सुधार बताया जा रहा है और पूरा देश एक जैसी कर व्यवस्था के साथ एक बड़ा साझा बाजार बन गया है।
August 18, 2017

75 साल बाद बर्फ में दबा मिला कपल का शव, शरीर पर कपड़े और जूते

Couple Found in snow after 75 years

इसे एक इत्तेफाक ही कहेंगे कि 75 साल पहले जिस कपल की मौत हुई उसका शव कपड़ों और जूतों सहित बर्फ में दबा हुआ मिला। स्विटजरलैंड के ग्लेशियर के बीच एक महिला और पुरुष का शव मिला है। लगभग 8500 फीट की ऊंचाई पर सैनप्लेरोन ग्लेशियर पर मिले शव के ऊपर अभी भी कपड़े पड़े हुए हैं। बर्फ की वजह से दोनों के शव आज भी सुरक्षित हैं।

वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार पुलिस ने बताया कि स्विटजरलैंड में 3000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक स्की लिफ्ट कंपनी के एक कर्मचारी ने दोनों शव को देखा और पुलिस को इस बारे में सूचना दी। इसके बाद शुक्रवार को पुलिस ने आस पास मिले दोनों शवों को निकाला और फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया।

पुलिस ने बताया कि शव के पास से बैकपैक, डिब्बे, किताब, घड़ी और जूते भी बरामद किए गए हैं। तो वहीं यह जगह रिसॉर्ट लेस डायबलर्ट्स और स्की रिसॉर्ट के काफी करीब है। हालांकि पुलिस ने अब तक दोनों लोगों की पहचान उजागर नहीं की है। उनका कहना है कि इसके लिए डीएनए टेस्ट कराए जाएंगे।

स्थानीय मीडिया का कहना है कि ये लोग 1942 में गायब हुए मार्सिलीन और फ्रैन्सीन डुमोलिन हो सकते हैं जो 1942 में गायब हो गए थे। दोनों अपनी मौत के बाद सात बच्चे पीछे छोड़ गए थे। तो वहीं एक स्थानीय अखबार ने कपल की 79 वर्षीय बेटी से बातचीत की भी बात कही है।