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Wednesday, 13 June 2018

June 13, 2018

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी




Atal-Bihari-Vajpayee-Biography-in-hindi


अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजीनीति के बहुत ही प्रतिभावान व्यक्ति है एक राजनितिक होने के साथ साथ अटल बिहारी वाजपेयी एक कवि, संघ प्रचारक (RSS) एंव आदर्शवादी व्यक्ति भी है साथ ही पिछले पांच दशको से सक्रीय राजनीती में प्रमुख भूमिका निभाई है और 10 बार विभिन्न राज्यों के लोकसभा से चुनाव जीतते हुए सांसद बने थे जो की अपने आप में एक रिकॉर्ड है

इसी प्रसिद्धि के चलते उनके प्रतिद्वंदी भी उनके इस प्रतिभा के कायल है अटल बिहारी वाजपेयी निर्णय लेने में तनिक हिचकते नही है वे निर्णय लेने में जितने कठोर दिल से उतने ही नरमदिल स्वाभाव के व्यक्ति है जिसके कारण उन्हें भारतीय राजनीती का “अजातशत्रु” भी कहा जाता है

और यही नही राजनीती के सत्ता के सर्वोच्च शिखर प्रधानमन्त्री पद को भी इन्होने पहली बार 1996 में मात्र 13 दिन के लिए प्रधानमन्त्री बने फिर दूसरी बार मात्र 1 साल के लिए कार्यकाल संभाला और इसके पश्चात तीसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ 1998 से 2004 तक प्रधानमन्त्री पद को सुशोभित किया, जो की यह कार्यकाल काफी सफल रहा.

तो आईये हम सब ऐसे आदर्शवादी भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन परिचय (Atal Bihari Vajpayee Jeevan Biography Essay in Hindi) जानते है

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी : एक जीवन परिचय

  • नाम : अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee)
  • जन्मतिथि : 25 December 1924
  • जन्मस्थान : ग्वालियर, मध्यप्रदेश भारत
  • माता : कृष्णा देवी (Krishna Devi)
  • पिता : कृष्णा बिहारी वाजपेयी (Krishna Bihari Vajpayee)
  • राजनैतिक पार्टी : भारतीय जनता पार्टी (BJP)
  • पद : भारत के प्रधानमन्त्री (Prime Minister of India) और 10 बार लोकसभा सांसद
  • पुरष्कार : भारत रत्न, पद्म विभूषण, डी.लिट, लोकमान्य तिलक पुरष्कार, लिबरेशन वार अवार्ड, श्रेष्ट सांसद पुरष्कार,
  • शादी : अविवाहित (Unmarried)
  • दत्तक पुत्री : नमिता (Namita) 

अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन परिचय : बायोग्राफी
Prime Minister Atal Bihari Vajpayee Biography Essay in Hindi

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 December 1924 को ग्वालियर, मध्यप्रदेश भारत में हुआ, इनके पिता का नाम कृष्णा बिहारी वाजपेयी (Krishna Bihari Vajpayee) और माता का नाम कृष्णा देवी (Krishna Devi) था, इनके पिता अपने गाँव के स्कूल में स्कूलमास्टर और एक महान कवि भी थे जिसके साथ साथ इनके पिता सत्यवादी, ईमानदार और आदर्शवादी अनुशासित व्यक्ति थे जिसके चलते अटल बिहारी वाजपेयी को कवित्व का गुण अपने पिताजी से विरासत में प्राप्त हुआ था,

आरम्भिक जीवन :-

अटल बिहारी वाजपेयी बचपन से ही दिखने में सुंदर थे जिसके कारण इनके माता पिता इनको बहुत ही प्रेम करते थे इनकी प्रारम्भिक शिक्षा गोरखी विद्यालय से प्राप्त की और बाद में आगे की पढाई ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज से हिन्दी, इंग्लिश और संस्कृत विषय से बीए (जिसे अब लक्ष्मीबाई कॉलेज के नाम से जाना जाता है) की शिक्षा प्राप्त किया और फिर पोस्ट ग्रेजुएट की पढाई कानपुर के दयानंद एंग्लो-वैदिक कॉलेज से पोलिटिकल साइंस से M.A. किया और परीक्षा में सबसे अधिक अंक प्राप्त किये जिसके चलते उनको फर्स्ट क्लास की डिग्री से सम्मानित किया गया

सामजिक जीवन : – (Social Liife)

अपने छात्र जीवन के दौरान ही अटल बिहारी वाजपेयी जी पढाई के साथ साथ खेलकूद जैसे कब्बडी, गुल्ली डंडा, में भी विशेष रूचि रखते थे और सन 1939 में एक स्वयसेवक के रूप में राष्ट्रिय स्वयसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हो गये और फिर राष्ट्रिय स्तर के वाद-विवाद प्रतियोगिताओ में हिस्सा लेते रहे और इसी दौरान अपनी एलएलबी की पढाई भी बीच में छोड़ दिया और पूरी निष्ठा के साथ संघ के कार्यो में जुट गये

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और इसी दौरान अटल बिहारी वाजपेयी को राजनितिक का पाठ डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी से प्राप्त हुआ और फिर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के राजनितिक निर्देशन में आगे बढ़ते रहे और इसी दौरान पांचजन्य, दैनिक स्वदेश, वीर अर्जुन और राष्ट्रधर्म जैसी पत्रिकाओ के सम्पादन का कार्य भी बखूबी रूप से किया और महात्मा रामचन्द्र वीर द्वारा रचित महान कृति “विजय पताका” को पढ़कर अटल बिहारी वाजपेयी का पूरे जीवन की दिशा ही बदल गयी

आजादी के लडाई में अटल बिहारी वाजपेयी का योगदान
Atal Bihari Vajpayee: Freedom Fighter of India

अटल बिहारी वाजपेयी ने हर भारतीयों के तरह आजादी की लड़ाई में सक्रीय भूमिका निभाई और सन 1942 में भारत छोडो आंदोलन के दौरान अन्य नेताओ के साथ जेल भी गये जहा उनकी पहली मुलाकात डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी से हुआ जो की अटल बिहारी वाजपेयी के लिए डॉक्टर साहब राजनितिक गुरु साबित हुए

राजनितिक जीवन :- (Political Life)

अटल बिहारी वाजपेयी के राजनितिक जीवन की शुरुआत आजादी के लड़ाई के दौरान ही शुरू हो गयी थी फिर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में अपनी पत्रकारिता छोड़कर सन 1951 भारतीय जनसंघ में शामिल हो गये और फिर सन 1955 में पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा फिर अटल बिहारी वाजपेयी को हार का सामना करना पड़ा लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी ने हिम्मत नही हारी

बाधाएँ आती हैं आएँ
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ
निज हाथों में हँसते-हँसते
आग लगाकर जलना होगा
क़दम मिलाकर चलना होगा 


और फिर दोबारा सन 1957 में उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के बलरामपुर लोकसभा से चुनाव लड़ा और फिर विजयी होकर जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में संसद पहुचे और इस तरह लगातार 20 साल सन 1957 से 1977 तक जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे, और इसी दौरान मोरारजी देसाई की सरकार में सन 1977 से सन 1979 तक विदेशमंत्री बने और इस दौरान विदेशो में भारत की एक अलग ही पहचान बनाई,

फिर जनता पार्टी की स्थापना के बाद सन 1980 में जनता पार्टी के विचारो से असंतुष्ट होने बाद जनता पार्टी को छोड़ दिया और फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की स्थापना किया और फिर 6 अप्रैल 1980 को अटल बिहारी वाजपेयी को भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष पद सौंप दिया गया फिर इन्होने पहली बार 1996 में मात्र 13 दिन के लिए प्रधानमन्त्री बने फिर दूसरी बार 1998 से 2004 तक प्रधानमन्त्री पद के लिए चुने गये वो पंडित जवाहरलाल नेहरु के बाद एक मात्र वही प्रधानमन्त्री है जो की इस पद को 3 बार सुशोभित किया है अपने नाम के अनुरूप अटल जी अपने विचारो के लिए अटल माने जाते है जिसका जिक्र उनके संसद में कहे गये इस नारे से पता चलता है

“अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा और कमल खिलेगा”

प्रधानमन्त्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी जी का कार्यकाल

अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमन्त्री के रूप में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किये जो इस प्रकार है :-
परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बना भारत

अटल सरकार ने अपने कुशल नेतृत्व के दम पर संयुक्त राष्ट्र के शर्तो को पूरा करते हुए 11 मई और 13 मई को सम्पूर्ण विश्व को चौकाते हुए भारत के शर्तानुसार जल, थल और आकाश में परमाणु परिक्षण न करते हुए 5 भूमिगत परमाणु परिक्षण किया और इस तरह से भारत को विश्व शक्ति के मानचित्र पर परमाणु संपन्न राष्ट्र बना दिया

इस परमाणु परिक्षण की विश्वनियता की इसी बात पर अंदाजा लगाया जा सकता है की बड़े बड़े दावे करने वाले विदेशी पश्चिमी देशो को उनके उपग्रहों, तकनिकी उपकरणों से भी इस परिक्षण का पता नही लगा पाए जिसके फलस्वरूप भारत पर अनेक प्रतिबन्ध लगा दिए गये लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी ने विदेशो के आगे न झुकते हुए भारत को विश्व पटल पर अलग ही पहचान दिलाई

सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ
प्रगति चिरंतन कैसा इति अब
सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ
असफल, सफल समान मनोरथ
सब कुछ देकर कुछ न मांगते
पावस बनकर ढ़लना होगा
क़दम मिलाकर चलना होगा


पाक सम्बन्धो में सुधार की पहल

अटल बिहारी वाजपेयी ने एक कदम आगे बढ़ते हुए पाक शासक नवाज शरीफ से बातचीत करते हुए सन 19 फरवरी 1999 को सदा ए सरहद नाम से नई दिल्ली और लाहौर के बीच बीएस सेवा की शुरुआत किया और इस तरह भारत पाक सम्बन्धो की एन नई शूरुआत की लेकिन बदले में भारत को उपहार स्वरूप कुछ महीनो के पश्चात कारगिल युद्ध मिला

कारगिल युद्ध ( Kargil War)

सन 1999 के मई महीने में पाक सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ़ ने धोखे से पाकिस्तानी सेना और कश्मीरी उग्रवादियों की मदद से भारत के जम्मू कश्मीर नियन्त्रण रेखा को पार करते हुए हमला बोल दिया जिनका मुख्य उद्देश्य भारतीय जमीनों पर कब्ज़ा करना था लेकिन भारतीय फ़ौज के अदम्य साहस के बल पर अटल सरकार ने अंतरराष्टीय शर्तो को ध्यान में रखते हुए बिना नियंत्रण रेखा पार करते हुए पाकिस्तानी सेना को कश्मीर के इलाको से खदेड़ दिया जिसे कारगिल युद्ध के नाम से जाना जाता है और इस तरह से विश्व बिरादरी में भारत पाक के मध्य एकबार फिर से तनाव बढ़ गये

दाँव पर सब कुछ लगा है, रुक नहीं सकते
टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते


और इस तरह अटल जी देश से अथाह प्रेम करते है और कहते है की यह हमारा कोई जमींन का कोई टुकड़ा नही जो कोई भी हथिया ले, जिसका जिक्र उनके इस कविता में मिलता है :-

भारत जमीन का टुकड़ा नहीं
जीता जागता राष्ट्रपुरुष है
हिमालय मस्तक है, कश्मीर किरीट है
पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं
पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघायें हैं
कन्याकुमारी इसके चरण हैं, सागर इसके पग पखारता है
यह चन्दन की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है
यह तर्पण की भूमि है, यह अर्पण की भूमि है
इसका कंकर-कंकर शंकर है
इसका बिन्दु-बिन्दु गंगाजल है
हम जियेंगे तो इसके लिये
मरेंगे तो इसके लिये


इसके अतिरक्त अटल सरकार ने अपने अपने कार्यकाल के दौरान ऐसे अनेको कार्य किये जो की अपने आप में ऐतिहासिक है

1 – भारत के कोनो कोनो तक सडको से जोड़ने का श्र्येय अटल बिहारी वाजपेयी को जाता है उन्होंने भारत के 4 महानगरो को स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना योजना के जरिये नई दिल्ली, कलकत्ता, मुंबई और चेन्नई को राजमार्गो द्वारा जोड़ा जो की अपने आप में एक अनोखी पहल थी कहा जाता है शेरशाह सूरी के बाद भारत में सबसे अधिक सड़को के निर्माण का श्रेय अटल बिहारी सरकार को जाता है

2 – 100 साल से अधिक पुराने कावेरी जल विवाद को अटल सरकार ने आपसी सुझबुझ से इस समस्या को सुलझाया

3 – भारत में मोबाइल क्रांति की शुरुआत इनके कार्यकाल में शुरू हुआ था जिसका हर हाथ मोबाइल का उद्देश्य था

4 – गरीबो के लिए आवास निर्माण योजना, रोजगार जैसे अनेको योजनाये क्रियान्वित किया

5 – अटल जी मानना था की आधुनिक युग में बिना विज्ञान का सहारा लिए विकास की राह तय नही किया जा सकता है जिसके लिए उन्होंने जय जवान जय किसान नारे को आगे बढ़ाते हुए “जय जवान जय किसान जय विज्ञान” का नारा दिया, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में टेक्नोलॉजी की सम्पूर्ण विकास हो

6 – आर्थिक प्रतिबंधो के बावजूद अग्नि 2 का सफल परिक्षण किया

अटल बिहारी वाजपेयी : एक कवि के रूप में

अटल बिहारी वाजपेयी जितने ही निर्णय लेने में कठोर है दिल से उतने ही नर्म स्वाभाव के व्यक्ति है एक कवि के रूप में सभी पक्ष विपक्ष नेता उनके इस गुण के कायल है एक कवि के अटल बिहारी वाजपेयी ने अनेको रचनाये की है जो की कुछ इस प्रकार है

  1. अमर बलिदान
  2. संसद में तीन दशक
  3. मृत्यु या हत्या
  4. राजनीती की रपटीली राहे
  5. सेक्युलर वाद

पुरष्कार और सम्मान

1 – 1992 में देश के लिए अभूतपूर्व सेवा के लिए पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित

2 – 1993 में कानपुर विश्वविद्यालय से डाक्टरेट की उपाधि से नवाजा गया

3 – 1994 में लोकमान्य तिलक अवार्ड से सम्मान

4 – 1994 में अटल बिहारी वाजपेयी को गोविन्द बल्लभ पन्त पुरष्कार से सम्मानित किया गया

5 – 1994 में सर्वश्रेष्ट सांसद पुरष्कार सम्मान

6 – 2015 में लिबरेशन वॉर अवार्ड (बांग्लादेश मुक्तिजुद्धो संमनोना) पुरष्कार से सम्मानित

अटल बिहारी  वाजपेयी को भारत रत्न पुरस्कार (Bharat Ratna Award)

भारत देश की सेवा में अदभुत योगदान के लिए उन्हें 2014 में उनके जन्मदिन 25 दिसम्बर के इस शुभ अवसर पर भारत के सर्वोच्च सम्मान “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया, भारत रत्न का सम्मान देने देश के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी खुद उनके घर पर गये और इस तरह पहली बार किसी राष्ट्रपति ने सारे प्रोटोकॉल तोड़कर उनके घर पर गये और इस सम्मान से सम्मानित किया
वर्तमान में अटल बिहारी वाजपेयी

सन 2004 में लोकसभा के चुनावो में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलने के पश्चात शारीरिक अस्वस्थता के चलते अटल बिहारी वाजपेयी ने सक्रीय राजनीती से सन्यास ले लिया और वर्तमान में अपने कृष्णामेनन मार्ग स्थित सरकारी आवास में रहते है

ठन गई
मौत से ठन गई

जूझने का मेरा इरादा न था
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था

रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई
यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं
ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ
लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ

तू दबे पाँव, चोरी-छिपे से न आ
सामने वार कर फिर मुझे आज़मा

मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र
शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर

बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं
दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं


तो आप सबको अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन पर आधारित यह पोस्ट अटल बिहारी वाजपेयी जीवन परिचय जीवनी Atal Bihari Vajpayee Biography कैसा लगा प्लीज हमे कमेंट बॉक्स में जरुर बताये और यदि कोई जानकारी अपूर्ण या गलत हो तो हमे अवगत जरुर कराये ताकि इसमें हम सुधार कर सके

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Source: vice.com

Sunday, 11 March 2018

March 11, 2018

OTA Passing Out Parade - प्रशिक्षण ने बदल दी जीवन की दिशा

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राजस्थान शूरवीरों की धरती रही है। राजस्थान उन प्रदेशों में शामिल हैं जहां के युवाओं में सेना में भर्ती होने का जज्बा देखने को मिलता है। चेन्नई के अफसर प्रशिक्षण अकादमी लेफ्टिनेंट का प्रशिक्षण पूरा कर चुके राजस्थान मूल के अक्षय राजपुरोहित का मानना है कि प्रशिक्षण कठिन जरूर था लेकिन इससे बहुत कुछ सीखने को मिला है। प्रशिक्षण ने जीवन की दिशा ही बदल दी है। शारीरिक एवं मानसिक रूप से काफी मजबूती मिली है। चेन्नई के गर्म मौसम में जरूर कठिनाई हुई लेकिन प्रशिक्षण के बाद जीवन में बहुत बदलाव भी दृष्टिगोचर हो रहा है।
राजस्थान के पाली जिले के एक छोटे से गांव तालकिया के रहने वाले राजुपरोहित अपने परिवार के ऐसे पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने भारतीय वायु सेना में सीधे कमीशन पाया है। हालांकि इससे पहले उनके बड़े पिताजी नारायणसिंह एयरफोर्स में सेवाएं दे चुके हैं, लेकिन सेना में सीधे अफसर बनने वाले वे परिवार के पहले सदस्य है।

बेंगलूरु में पले-बढ़े अक्षय ने जैन विश्वविद्यालय बेंगलूरु से वर्ष 2016 में बीकाम की शिक्षा पूरी की। अक्षय बीकाम की शिक्षा के बाद भारतीय थल सेना में सीधे लेफ्टिनेंट के पद पर चयनित हुए। एनसीसी में सी सर्टिफिकेट हासिल किया है। उन्होंने एनसीसी से सीधे साक्षात्कार दिया। अक्षय के पिता मनोहरसिंह का बेंगलूरु में बिजनेस है जबकि माता भंवरीदेवी गृहिणी है। अक्षय की दोनों बड़ी बहनें आरती एवं सोनू विवाहित है। अक्षय का कहना है कि उसकी बचपन से ही यह ख्वाहिश थी कि वह सेना में भर्ती होकर देश सेवा करे और अब सपना पूरा होने के बाद बहुत खुशी महसूस हो रहा है। उनका कहना है कि यदि इंसान मन में सोच लें और इरादे बुलन्द हो तो कुछ भी संभव है। चेन्नई में मौसम काफी चुनौतीपूर्ण था, प्रशिक्षण भी कठिन जरूर था लेकिन उसे भी एक चैलेंज के रूप में पूरा किया। प्रशिक्षण जीवन में बहुत बदलाव ला देता है। अनुशासन, समय की पाबंदी, सकारात्मक सोच, आत्म विश्वास सरीखी चीजें प्रशिक्षण के दौरान सीखने को मिली। अक्षय के चाचा श्यामसिंह ने बताया कि अक्षय बचपन से ही पढऩे में अव्लल रहा है और सब के साथ घुल-मिलकर रहता है।

नम्रता बनी बालिकाओं के लिए मिसाल
राजस्थान के जोधपुर मूल की मूमल राठौड़ पढ़ाई में शुरू से ही अव्वल रही और अब भारतीय सेना में लेफ्ंिटनेेंट के लिए अफसर प्रशिक्षण अकादमी में प्रशिक्षण ले रही है। मूमल ने आर्मी इन्स्टीट्यूट आफ ला मोहाली से विधि स्नातक किया है। पहली से बारहवीं तक की पढ़ाई उन्होंने जोधपुर के केन्द्रीय विद्यालय नं. एक आर्मी से पूरी की। खेलों में भी उनकी खासी दिलचस्पी रही है। एथलेटिक्स व क्रास कंट्री में गोल्ड मेडल जीता है। मूमल की बचपन से ही डिफेन्स में जाने की इच्छा थी। उनके पिता कैलाशसिंह राठौड़ आनररी कैप्टन है। माता दशरथकंवर भाटी गृहिणी है। बड़े भाई गजेन्द्रसिंह राठौड़ राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में वकालत कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि मूमल लगातार नवीं बार के प्रयास में लेफ्टिनेंट के लिए चयनित हुई। वे चार बार मैरिट में थोड़े से अंतर से रह गई थी। मूमल का कहना है कि यहां प्रशिक्षण व्यक्ति को पूर्ण रूप से मानसिक एवं शारीरिक रूप से तैयार कर देता है।



प्रशिक्षण बनाता है मजबूत
राजस्थान के सीकर जिले के धौद के पास बाडलवास गांव के नरेन्द्र शेखावत ने फर्गुशन कालेज पूणे से बीएससी (स्टेटिसटिक्स) किया। उन्होंने एनसीसी का सी सर्टिफिकेट हासिल किया है। वे छठे प्रयास में सफल हुए। पिता भंवरसिंह शेखावत पुणे में ओटोमोबाइल के क्षेत्र में कार्यरत है। माता कंचन कंवर गृहिणी है। बास्केटबाल एवं हैंडबाल में उनकी रुचि रही है। कालेज के दौरान कुछ पत्र-पत्रिकाओं में आर्टिकल भी छपे। उनका कहना है कि डिफेंस के क्षेत्र में आने से हर कार्य व्यवस्थित हो जाता है। प्रशिक्षण होने बहुत मजबूत बना देता है।

प्रशिक्षण ने जगाया आत्मविश्वास
राजस्थान के जालोर जिले के रथपुरा रामसीन निवासी गजेन्द्रसिंह परमार अपने साथियों को हमेशा मोटिवेट करते हैं। पिता राजेन्द्रसिंह परमार रेलवे में सीटीई के पद पर कार्यरत है। माता कृष्णा कंवर गृहिणी है। गजेन्द्रसिंह ने बालाछड़ी जामनगर के सैनिक स्कूल से प्लस टू की शिक्षा के बाद वर्ष 2014 में पंडित दीनदयाल पेट्रोलियम विश्वविद्यालय गांधीनगर से बीटेक (मैकेनिकल) किया। गजेन्द्रसिंह का कहना है कि प्रशिक्षण से उनका हर पक्ष मजबूती से उभरा है। आत्मविश्वास जगा है। सोच में बदलाव आया है।

पिता से मिली प्रेरणा
इलाहाबाद मूल की शिल्पा तिवारी ने 2016 में यूनाइटेड कालेज आफ इंजीनियरिंग एंड रिसर्च से बीटेक (आईटी) किया। पिता एस.एल. तिवारी भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर व माता शीला तिवारी गृहिणी है। लेफ्टिनेंट में चयनित होने से पहले वे आठ माह तक बेंगलूरु में बाइजूस नामक कंपनी में बतौर बिजनेस डवलपमेन्ट एसोसिएट के पद पर कार्यरत थी। बचपन में जब पिता को अफसर की यूनिफार्म में देखा तो उनके मन में भी सेना में अफसर बनने की भावना जगी। वे केन्द्रीय विद्यालय में राष्ट्रीय स्तर पर बास्केटबाल में हिस्सा ले चुकी है। प्रशिक्षण के बारे में शिल्पा का कहना था कि यहां हर दिन नया सीखने को मिलता है। डिफेंस की सेवा में जो रेसपेक्ट हैं वह अन्य सेवाओं में नहीं मिलता। आखों में अलग ही चमक नजर आती है इस कार्य में।

सातवीं बार में मिली कामयाबी
लखनऊ के पवन गुप्ता ने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीकाम के बाद आर्मी इन्स्टीट्यूट आफ मैनेजमेन्ट कोलकात्ता से एमबीए किया। उनका मजबूत पक्ष यह है कि छह बार विफल होने के बावजूद हार नहीं मानी और आखिरकार सातवीं बार के प्रयास में उनका सलेक्शन हुआ। उनके पिता मोहन गुप्ता बरेली में भारतीय सेना में कर्नल के पद पर कार्यरत है। माता दीप्ति गुप्ता गृहिणी है।

मिली अनुशासन की सीख
बिहार के पटना मूल की इशिता सिंह लेफ्टिनेंट का प्रशिक्षण ले रही है। इशिता का कहना है कि प्रशिक्षण के दौरान अनुशासन की सीख मिली है। लक्ष्य को किस तरह हासिल करें, यह प्रशिक्षण सीखा देता है। पुणे से भारती विद्यापीठ विश्वविद्यालय से विधि स्नातक इशिता के पिता श्रवण कुमार पटना में संयुक्त रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत है। माता इला इसट जेल अधीक्षक है।

Friday, 2 March 2018

March 02, 2018

RR Team 2018 Players List: इंडियन प्रीमियर लीग सीजन-11 में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलेंगे ये प्लेयर्स…

RR Team 2018 Players List

RR Team 2018 Players List: इंग्लैंड के हरफनमौला खिलाड़ी बेन स्टोक्स इंडियन प्रीमियर लीग सीजन-11 की नीलामी में सबसे महंगे खिलाड़ी रहे हैं। उन्हें राजस्थान रॉयल्स ने 12.5 करोड़ की कीमत में खरीदा। वहीं दिल्ली के लिए पिछले सीजन में खेलने वाले संजू सैमसन इस बार राजस्थान के लिए खेलते नजर आएंगे। राजस्थान ने उनके लिए आठ करोड़ रुपये की कीमत दी है। सैमसन पहले भी राजस्थान के लिए खेल चुके हैं।

पंजाब ने ऑफ स्पिन गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन को 7.6 करोड़ रुपये की कीमत में अपने साथ जोड़ा। वह पहले चेन्नई सुपर किंग्स की तरफ से खेलते थे, लेकिन चेन्नई ने उन्हें रिटेन नहीं किया था। पंजाब ने अश्विन को खरीदने में चेन्नई और राजस्थान को मात दी। वहीं शिखर धवन (हैदराबाद), केरन पोलार्ड (मुंबई) अंजिक्य रहाणे (राजस्थान रॉयल्स) और फाफ डु प्लेसिस (चेन्नई) को उनकी पुरानी टीमों ने अपने साथ ही रखा है।

बता दें कि भारत के युवा तेज गेंदबाद जयदेव उनादकट इस वर्ष इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की नीलामी में सबसे महंगे खिलाड़ी बन गए हैं। उन्हें यहां रविवार को राजस्थान रॉयल्स ने 11.5 करोड़ रुपये में खरीदा। उनादकट को खरीदने के लिए राजस्थान रॉयल्स को कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर), किंग्स इलेवन पंजाब (केएक्सआईपी) और चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) से कड़ी टक्कर मिली।

राजस्थान रॉयल्स:

आर्यमान बिरला – 30 लाख
मिधुन एस – 20 लाख
स्टुअर्ट बिन्नी – 50 लाख
अजिंक्य रहाणे – 4 करोड़
धवल कुलकर्णी – 75 लाख
डार्ची शॉर्ट – 4 करोड़
जोस बटलर – 4.40 करोड़
बेन स्टोक्स – 12.50 करोड़
बेन लाफलिन – 50 लाख
जतिन सक्सेना – 20 लाख
श्रेयस गोपाल – 20 लाख
अनुरीत सिंह – 30 लाख
जयदेव उनादकट – 11.50 करोड़
अंकित शर्मा – 20 लाख
गौवतथम कृष्णअप्पा – 6.20 करोड़
संजू सैमसन – 8 करोड़
राहुल त्रिपाठी – 3.40 करोड़
प्रशांत चोपड़ा – 20 लाख
दुश्मंथा चमीरा -50 लाख
जोफ्रा आर्चर – 7.2 करोड़
जहीर खान – 60 लाख
महिपाल लोमरोर – 20 लाख
स्टीवन स्मिथ – 12.50 करोड़


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Thursday, 1 March 2018

March 01, 2018

Happy Holi 2018 Wishes Images: इन शानदार इमेजेज से अपने खास लोगों को दें होली की बधाई

Happy Holi 2018 Wishes Images

Happy Holi 2018 Wishes Images, Photos: हिंदु धर्म का प्रमुख त्योहार होली इस साल 2 मार्च को होली मनाई जाएगी। बुराई पर अच्छाई की जीत का यह पर्व भाईचारा और प्रेम बढ़ाने वाला त्योहार भी माना जाता है। इस दिन लोग अपने सारे गिले-शिकवे, द्वेष, घृणा आदि भूलकर एक दूसरे को गले लगाते हैं और अपने स्नेहिल संबंधों की नई शुरुआत करते हैं। इसी क्रम में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है अपने खास लोगों को होली की शुभकामनाएं देना। सोशल मीडिया के इस दौर में लोगों में शुभकामनाएं सबसे पहले देने की होड़ लगी हुई है।

हर कोई अपने प्रियजनों को सबसे पहले और अनोखे अंदाज में होली विश करना चाहता है। ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसी दिलचस्प और बेहतरीन शुभकामना संदेशों के बारे में बताने वाले हैं जिनका इस्तेमाल कर आप अपने सबसे प्रिय को सबसे खास अंदाज में होली विश करते हैं।

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1. राधा का रंग और कान्हा की पिचकारी। प्यार के रंग से रंग दो दुनिया सारी। ये रंग न जाने कोई जात न कोई बोली, मुबारक हो आपको रंग भरी होली !

2. होली के नशे में होने से पहले,
रंगों में रंगने से पहले,
किसी और के कहने से पहले
हम आपको कहते हैं,
हैप्पी होली इन एडवांस सबसे पहले।

3. हम इस तरह होली के रंग फैलाएंगे
कि सबके संग हम भी रंगों में घुल जाएंगे
इस बार होली का रंग और भी गहरा होगा
क्योंकि दोस्तों के साथ दुश्मन का भी रंग होगा

4. मक्के की रोटी नींबू का अचार
सूरज की किरणें खुशियों की बहार
चांद की चांदनी अपनों का प्यार
मुबारक हो आपको होली का त्यौहार

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5.खाना पीना रंग उड़ाना
इस रंग की धुंध में हमें ना भुलाना
गीत गाओ खुशियां मनाओ बोलो मीठी बोली
हमारी तरफ से आपके पूरे परिवार को हैप्पी होली।

6. गुल ने गुलशन से गुलफान भेजा है
सितारों ने आसमान से सलाम भेजा है
मुबारक हो आप को होली का त्यौहार
हमने दिल से ये पैगाम भेजा है
हैप्पी होली

7. रंगों से भरा रहे जीवन तुम्हारा
खुशियाँ बरसे तुम्हारे अंगना
इन्द्रघनुष सी खुशियाँ आये
आओ मिलकर होली मनाये
हैप्पी होली

Wednesday, 21 February 2018

February 21, 2018

नाथद्वारा MLA कल्याण सिंह चौहान का निधन, सीपी जोशी को 1 वोट से हराने के बाद आए थे चर्चा में

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भाजपा नेता कल्याण सिंह चाैहान का बुधवार तड़के निधन हाे गया। कल्याण सिंह नाथद्वारा से विधायक थे। वे विगत दो साल से अस्वस्थ चल रहे थे। उन्हाेंने उदययपुर के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली।


कल्याण सिंह चाैहान के निधन से भारतीय जनता पार्टी में शाेक की लहर छा गर्इ है। कुछ दिन पहले ही कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव डॉ सीपी जोशी अपने उदयपुर प्रवास के दौरान विधायक कल्याण सिंह की कुशलक्षेम पूछने पहुंचे थे।


दरअसल नाथद्वारा के विधायक कल्याण सिंह चौहान पिछले कुछ दिनों से उदयपुर के जीबीएच अमेरिकल हॉस्पीटल में भर्ती थे। उन्हें केंसर के चलते चार दिनों से वेंटिलेटर पर रखा गया था।


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सीपी जोशी ने कल्याण सिंह के परिवार से भी मुलाकात की ओर चिकित्सकों से उनकी स्थिति के बारे में जानकारी जुटाई। आपको बता दे कि सीपी जोशी को नाथद्वारा विधानसभा सीट से 2008 के विधानसभा चुनाव में कल्याण सिंह एक वोट से हरा चुके है।


इस सीट से चुनाव में 1 वोट के फैसले से राजनीति के सभी समीकरण गड़बड़ा गए थे। 1 वोट का मामला उच्चतम न्यायालय में पहुंचा जिसमें कल्याण सिंह चाैहान को विजयी माना गया था।

वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री की दौड़ में रहे डॉ. जोशी को 1 वोट से हार के कारण दौड़ से बाहर होना पड़ा, हालांकि बाद में डॉ. जोशी लोकसभा चुनाव में भीलवाड़ा से सांसद चुनकर केंद्र में कैबिनेट मंत्री बन गए थे। कल्याण सिंह चाैहान का जन्म 18 नवंबर 1959 काे राजसमंद जिले की नाथद्वारा तहसील के गांव डगवाडा में हुआ था। उनके पिता का नाम दुलेसिंह चौहान था। सिंह 8वीं तक पढ़े हुए थे। इनकी राजनीति की शुरुआत 1988 से कोठारिया ग्राम पंचायत के सरपंच से शुरू हुई थी।

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सिंह वर्ष 1998 से 2000 तक खमनोर पंचायत समिति के प्रधान तथा वर्ष 2000 से 2005 तक राजसमंद जिला परिषद के उपजिला प्रमुख तथा 2005 से 2008 तक जिला परिषद के सदस्य रहे। सिंह इस दौरान डॉ. जोशी के खास माने जाते थे, लेकिन वर्ष 2003 में वे कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके बाद वे भाजपा के जिला महामंत्री, राजसमंद नगर पालिका चुनाव के प्रभारी भी रहे।

यूपी में भी भाजपा विधायक का निधन

यूपी में सीतापुर जिले के एनएच-24 के कमलापुर थाना क्षेत्र के ककैयापारा के पास बीजेपी विधायक की गाड़ी और एक ट्रक की भिड़ंत हो गई। हादसे में बीजेपी विधायक लोकेन्द्र सिंह समेत 4 लोगों की मौत हो गई। लौकेन्द्र सिंह बिजनौर जिले की नूरपुर विधानसभा सीट से विधायक थे। जानकारी के अनुसार, विधायक सीतापुर से लखनऊ आ रहे थे उसी समय हादसा हाे गया।

Monday, 12 February 2018

February 12, 2018

वसुंधरा सरकार का आखिरी राजस्थान बजट, किसानों का 50,000 तक का कर्ज माफ

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राजस्थान सरकार ने किसानों के अल्पकालीन फसली ऋण में 50 हजार रुपये तक के कर्ज माफ करने की घोषणा की है. इसके साथ ही राज्य में विभिन्न वर्गों को 650 करोड़ रुपये की राहत देने का भी बजट में प्रस्ताव किया गया है. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने आज राज्य विधानसभा में 2018- 19 का बजट पेश करते हुये यह घोषणा की. बजट में कोई नया कर नहीं लगाया गया है. मुख्यमंत्री ने इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बजट में किसानों, महिलाओं, अनुसूचित जाति जनजाति, व्यापारियों सहित अन्य वर्गों को लुभाने का प्रयास किया. सरकारी सेवा में कार्यरत महिलाओें को 18 साल से कम उम्र के अपने बच्चों की देखभाल के लिये सेवाकाल में दो साल का अवकाश देने, महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के मानदेय में बढ़ोतरी करने, स्कूल और कॉलेज को क्रमोन्नत करने, पुलिसकर्मियों के मेस भत्ते, गौशालाओं का संवर्धन करने, राजस्थान रोडवेज की बसों में 80 साल से अधिक उम्र के वृद्वजनों को मुफ्त एवं उनके साथ सहायक को पचास प्रतिशत रियायत के साथ यात्रा करने की सुविधा देने की घोषणा की है.

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वसुंधरा ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को 6,000 रुपये, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को 4,000 रुपये, सहायिका को 3,500 रुपये और साथिनों को 3,300 रुपये का मानदेय देने की घोषणा की है. मुख्यमंत्री ने कास्टेंबल, हेड कांस्टेबल, सहायक उप निरीक्षक, निरीक्षक को 2,000 रुपये प्रतिमाह मेस भत्ता देने की भी घोषणा की है. पहले यह भत्ता क्रमश: 1,600 रुपये और 1,700 रुपये था. वित्त विभाग भी संभाल रही मुख्यमंत्री ने बजट में सभी 200 विधानसभा क्षेत्रों में 15 किलोमीटर की नयी सड़क बनाने, ग्रामीण गरीब पथ एवं ग्राम पंचायत मुख्यालयों को जोड़ने, प्रत्येक जिले में एक नंदी गौशाला के संवर्धन एवं गौसरंक्षण के लिये 50 लाख रुपये के अनुदान, उंटनी के दूध प्रसंस्करण एवं ब्रिकी के लिये जयपुर में पांच करोड़ रुपये की लागत से मिनी संयंत्र लगाने की घोषणा की है.

मुख्यमंत्री ने लघु एवं सीमांत कृषकों के सहकारी बैंकों में 30 सितम्बर 2017 को बकाया अल्पकालीन फसली ऋण में समस्त ब्याज एवं दंड माफी, अल्पकालीन फसली ऋण में से 50,000 रुपये तक के कर्जे माफ करने, राजस्थान राज्य कृषक ऋण राहत आयोग के गठन, राजफैड को मूल्य समर्थन योजना के तहत सरसों और चने की उपज को समर्थन मूल्य पर खरीदने के लिये पांच सौ करोड़ रुपये का ब्याजमुक्त ऋण और खरीद पर देय मंडी शुल्क से छूट देने का प्रस्ताव किया. वसुंधरा ने 1,000 अन्नपूर्णा भंडार खोलने, 1,832 स्कूलों को क्रमोन्नत करने, 77,100 रिक्त पदों को भरने, 17 उपखंड मुख्यालयों में कॉलेज खेालने, कोटा एवं नौगांवा (अलवर) में कृषि महाविद्यालय खोलने, एससी एवं एसटी वित्त एवं विकास सहकारी निगम द्वारा दो लाख रुपये तक के बकाया ऋण एवं ब्याज को माफ करने, भैरों सिंह शेखावत अंत्योदय स्वरोजगार योजना आंरभ करने, सुंदर सिंह भंडारी ईबीसी स्वरोजगार योजना शुरू करने की घोषणा की.

Wednesday, 7 February 2018

February 07, 2018

UIDAI ने चेताया- प्लास्टिक आधार कार्ड से सावधान

Aadhar Card

अगर आप प्लास्टिक आधार कार्ड बनवाने जा रहे हैं तो सावधान। यूआईडीएआई का कहना है कि प्लास्टिक आधार कार्ड की अलग से जरूरत नहीं है। आधार से जुड़ी सेवाएं लेने के लिए आधार नंबर या फिर उसका प्रिंट ही काफी है। दरअसल यूआईडीएआई को शिकायतें मिली हैं कि कई लोग प्लास्टिक आधार बनाने के लिए मनमाने तरीके से 300 रुपये तक वसूल रहे हैं, और ये वो लोग हैं जो ऐसा करने के लिए अधिकृत नहीं है। ऐसे में आधार का डाटा गलत हाथों में जाने का भी खतरा है। यूआईडीएआई ने ये भी चेताया है कि कार्ड पर छपे क्यूआर कोड से भी डाटा लीक होने का खतरा है। आपको बता दें कि पिछले दिनों सूरत में फर्जी आईडी से प्लास्टिक कार्ड बनाने का मामला सामने आया था।

आधार अथॉरिटी यूआईडीएआई ने कहा कि आधार का कोई एक हिस्सा या मोबाइल आधार पूरी तरह से मान्य है.

यूआईडीएआई ने बताया कि आधार स्मार्ट कार्ड को गैरआधिकारिक तौर पर प्रिंट कराना महंगा साबित हो सकता है. कई जगह इसकी कीमत 50 से लेकर 300 रुपये तक होती है. कहीं-कहीं इससे भी ज्यादा कीमत होती है. जिसकी कोई जरुरत नहीं है.

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यूआईडीएआई ने कहा, "प्लास्टिक या पीवीसी आधार स्मार्ट कार्ड कई बार इस्तेमाल के काबिल नहीं रहते क्योंकि इसे किसी गैरआधिकारिक वेंडर या दुकान से प्रिंट कराए जाने से क्विक रिस्पॉन्स कोड यानी QR कोड के खराब होने का खतरा बना रहता है. ऐसे गैर-अधिकृत प्रिंटिंग से QR कोड काम करना बंद कर सकता है."
यूआईडीएआई की ओर से आगाह किया गया कि इसके साथ-साथ एक संभावना यह भी होती है कि आप की मंजूरी के बिना ही आपकी निजी जानकारी किसी और को मालूम हो जाए.' यूआईडीएआई के मुख्य कार्यकारी अजय भूषण पांडे ने कहा कि प्लास्टिक के आधार स्मार्ट कार्ड पूरी तरह से गैरजरूरी और व्यर्थ हैं. सामान्य कागज पर डाउनलोड किए गए आधार कार्ड या फिर मोबाइल आधार कार्ड पूरी तरह से मान्य है.  स्मार्ट या प्लास्टिक आधार कार्ड की ऐसी कोई योजना ही नहीं है.

Monday, 5 February 2018

February 05, 2018

Khatu Shyam Baba Temple History in Hindi खाटूश्यामजी की कहानी और खाटूश्याम बाबा मन्दिर का इतिहास [VIDEO]

Khatu Shyam Baba Temple History in Hindi

Khatu Shyam Baba Temple खाटूश्यामजी राजस्थान के सीकर जिले में स्तिथ एक पवित्र मन्दिर है जो महाभारत काल में बना मन्दिर माना जाता है | Khatu Shyam Baba खाटूश्यामजी को भगवान श्री कृष्ण का अवतार माना जाता है जिसकी देश के करोड़ो लोग पूजा करते है | खाटूश्यामजी मन्दिर में हर वक़्त भक्तो का ताँता लगा रहता है और विशेष रूप से होली से कुछ दिन पहले सीकर जिले में खाटूश्यामजी का विशाल मेला आयोजित होता है जिसमे राजस्थान सहित अन्य प्रदेशो के श्रुधालू भी बाबा के दर्शन करने आते है | Khatu Shyam Baba Temple खाटूश्यामजी मन्दिर के इतिहास को जानने से पहले आइये आपको Khatu Shyam Baba खाटूश्यामजी की कहानी के बारे में बताते है |

Khatu Shyam Baba Story in Hindi 

खाटूश्यामजी की कहानी महाभारत काल से शुरू होती है जिस वक़्त उनका नाम बर्बरीक था | बर्बरीक , भीम का पौत्र और घटोत्कच का पुत्र था | बर्बरीक बचपन से ही बहुत वीर योद्धा था जिसमे अपनी माँ से युद्ध कला सीखी थी | भगवान शिव ने बर्बरीक से प्रस्सन होकर उसे तीन अचूक बाण दिए जिसकी वजह से बर्बरीक को “तीन बाण धारी ” कहा जाने लगा | उसके बाद अग्नि देव ने उन्हें एक तीर दिया जिससे वो तीनो लोको पर विजय प्राप्त कर सकता था | जब बर्बरीक को पता चला कि पांड्वो और कौरवो के बीच युद्ध अटल है तो वो महाभारत युद्ध का साक्षी बनना चाहता था |उसने अपनी माँ को वचन दिया कि वो युद्ध में भाग लेने की इच्छा रखता है और वो हारने वाली सेना की तरफ से लड़ना चाहटा है | इसके बाद बर्बरीक वो नील घोड़े पर सवार होकर तीन बाण लेकर रवाना हो गया |

रास्ते में श्री कृष्ण ने ब्राह्मण का वेश धारण कर बर्बरीक को रोका ताकि वो उसकी शक्ति की परीक्षा ले सके |  उन्होंने बर्बरीक को उकसाया कि वो वो केवल तीन तीरों से युद्ध कैसे लड़ेगा | इस बात का जवाब देते हुए बर्बरीक ने कहा कि उसका एक बाण ही दुश्मन की सेना के लिए काफी है और वो वापस अपने तरकश में लौट आएगा | बर्बरीक ने तब श्रीकृष्ण को बताया कि उसके पहले तीर से वो निशान बनाएगा जिसको उसे समाप्त करना है और उसके बाद तीसरा तीर छोड़ने पर उसके निशान वाली सभी चीजे तबाह हो जायेगी | उसके बाद वो तीर वापस तरकश में लौट आएगा | अगर वो दुसरे तीर का प्रयोग करेगा तो पहले तीर से जो भी निशान लगाये थे वो सभी चीजे सुरक्षित हो जायेगी | कुल मिलाकर वो एक तीर से तबाही और एक तीर से रक्षा कर सकता था |
जब श्री कृष्ण को बर्बरीक की शक्ति का पता चला तो उन्होंने बर्बरीक को चुनौती दी कि अगर वो जिस पीपल के पेड़ के नीचे खड़ा है उसके सभी पत्तो को आपस में बाँध देगा तो उनको  बर्बरीक की शक्ति पर विश्वास हो जाएगा | बर्बरीक ने चुनौती स्वीकार कर ली उअर तीर छोड़ने से पहले ध्यान लगाने के लिए आँखे बंद कर दी | तब श्री कृष्ण से बर्बरीक को पता लगे बिना , पीपल की एक पपत्ती को तोडकर अपने पैरो के नीचे छुपा लिया | जब बर्बरीक ने पहला तीर छोड़ा तो सभी पत्तियों और निशान हो गये और अंत में सभी पत्ते श्री कृष्ण के पैरो के आस पास घुमने लगे |

अब श्री कृष्ण ने बर्बरीक से पूछा कि “तीर भी मेरे पैरो के चारो ओर क्यों घूम रहा है ? ” इस पर बर्बरीक ने जवाब दिया कि “शायद आपके पैरो के नीचे एक पत्ती रह गयी है और ये तीर उस छुपी हुयी पत्ती को निशाना बनाने के लिए पैरो के चारो ओर घूम रहा है ” | बर्बरीक ने श्री कृष्ण से कहा “ब्राह्मण राज आप अपना पैर यहा से हटा लीजिये वरना ये तीर आपके पैर को भेद देगा “| श्री कुष्ण के पैर हटते ही उस छुपी हुयी पत्ती ;पर भी निशान हो गया | उसके बाद बर्बरीक के तीसरे तीर से सारी पत्तिय इकठी हो गयी और आपस में बंध गयी | तब श्री कृष्ण ने समझ लिया कि बर्बरीक के तीर अचूक है लेकिन अपने निशाने के बारे में खुद बर्बरीक को भी पता नही रहता है |
इस घटना से श्री कृष्ण ने ये निष्कर्ष निकाला कि असली रण भूमि में अगर श्रीकृष्ण अगर पांडव भाइयो को अलग अलग कर देंगे और उन्हें कही छिपा देंगे ताकि वो बर्बरीक का शिकार होने से बच जाए तब भी बर्बरीक के तीरों से कोई नही बच पायेगा | इस प्रकार श्री कुष्ण को बर्बरीक की शक्ति का पता चल गया कि उनके अचूक तीरों से कोई नही बच सकता है | तब श्री कृष्ण ने युद्ध में उनकी तरफ से लड़ने का प्रस्ताव दिया | बर्बरीक ने अपनी गुप्त बात उनको बताई कि उसने अपनी माता को वचन दिया है कि वो केवल हार रही सेना की तरफ से लड़ेंगे |

कौरवो को भी बर्बरीक के इस वचन के बारे में पता था इसलिए उन्होंने युद्ध के पहले दिन अपनी ग्यारह अक्षौनी सेना को नही उतारा था ताकि जब कौरवो की सेना पहले दिन पांड्वो से हार जाए तो बर्बरीक कौरवो का सहयोग कर पांड्वो का विनाश कर देगा | इस प्रकार जब वो कौरवो की तरफ से लड़ेगा तो पांड्वो की लड़ रही सेना कमजोर हो जायेगी उसके बाद वो पांड्वो की सेना में चला जाएगा | इस तरह वो दोनों सेनाओ में घूमता रहेगा | श्री कृष्ण को अब लगने लगा था कि अगर बर्बरीक इस युद्ध में शामिल हुआ तो कोई भी सेना नही जीत पायेगी और अंत में कौरव-पांडव दोनों का विनाश हो जायेगा और केवल बर्बरीक शेष रह जाएगा | तब श्री कृष्ण ने विचार किया कि बर्बरीक को रोकने के लिए उनको बर्बरीक से उसकी जान मांगनी होगी |

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तब श्री कृष्ण ने बर्बरीक से दान की मांग की तब बर्बरीक ने कहा “प्रभु आपकी जो इच्छा हो मै आपको देने को तैयार हु ” | श्री कृष्ण ने दान में बर्बरीक का सिर माँगा | बर्बरीक भगवान श्री कृष्ण की अनोखी मांग को सुनकर चकित रहा गया और इस अनोखी मांग पर उस ब्राह्मण को अपनी असली पहचान बताने को कहा | श्री कृष्ण ने बर्बरीक को अपना विराट रूप दिखाया और बर्बरीक उसे देखकर धन्य हो गया | श्री कृष्ण ने तब बर्बरीक को समझाया कि “रण भूमि में युद्ध से पहले सबसे वीर क्षत्रिय की बलि देनी पडती है इसलिए मै तुमसे तुम्हारा सिर दान में मांग रहा हु और मै तुमको इस धरती का सबसे वीर क्षत्रिय होने का गौरव देता हु ” |

अपने वादे को निभाते हुए श्रीकृष्ण के आदेश पर बर्बरीक ने अपना सिर दान में दे दिया | ये घटना फागुन महीने के शुक्ल पक्ष के 12 वे दिन हुयी थी | अपनी जान देने से पहले बर्बरीक ने श्री कृष्ण ने अपनी एक इच्छा जाहिर की वो महाभारत युद्ध को अपनी आँखों से देखना चाहता है | श्री कृष्ण ने उसकी ये इच्छा पुरी की और सिर अलग करने के बाद उनके सिर को एक उची पहाडी पर रख दिया जहा से रण भूमि साफ नजर आती थी | वही से बर्बरीक के सिर ने पूरा महाभारत युद्ध देखा था |

 
युद्ध खत्म होने पर जब जीते हुए पांडव भाइयो ने एक दुसरे से बहस करना शूर कर दिया कि युद्ध की जीत का जिम्मेदार कौन है तो श्री कृष्ण ने बर्बरीक के सिर को इस निर्णय लेने को कहा कि किसकी वजह से पांडव युद्ध जीते | तब बर्बरीक के सिर ने सुझाव दिया कि श्री कृष्ण अकेल ऐसे है जिनकी वजह से महाभारत युद्ध में पांड्वो की जीत हुयी क्योंकि उनकी रणनीति की इस युद्ध में अहम भूमिका थी और इस धर्मं युद्ध में धर्म की जीत हुयी |

ये Khatu Shyam Baba मन्दिर रूप सिंह चौहान ने 1027 ईस्वी में बनवाया था जब उनकी पत्नी को भी जमीन में दफन उस सिर का सपना आया था | वो जगह जहा से उस प्रतिमा को निकाला गया उसे श्याम कुंड कहते है | 1720 ईस्वी में दीवान आभासिंह ने इस मन्दिर का पुर्ननिर्माण करवाया तब से ये Khatu Shyam Baba मन्दिर उसी स्थिथि में है और अज भी उस प्रतिमा की चमक बरकरार है | खाटूश्यामजी आज कई घरो के पारिवारिक देवता है | उनका एक नया मन्दिर अहमदाबाद में भी बनवया गया है जिसे बलिया देव कहा जाता है जहा पर पर नवजात शिशुओ को आशीर्वाद दिलाने के लिए माता पिता लेकर आते है |

Source: gajabkhabar

Wednesday, 24 January 2018

January 24, 2018

राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और गोवा में नहीं दिखाई जाएगी पद्मावत!

Padmaavati

मुंबई। विवादित फिल्म ‘पद्मावत’ की रिलीज के खिलाफ बढ़ते हिंसक प्रदर्शनों के बीच मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने बुधवार को कहा कि उसके सदस्य एतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म का प्रदर्शन राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और गोवा में नहीं करेंगे।

राजपूत संगठनों और अन्य तत्वों द्वारा इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए मॉल में तोडफ़ोड़ किए जाने, वाहनों को जलाए जाने और फिल्म की रिलीज को रोकने की कोशिश के तहत थियेटर मालिकों और आम लोगों को खुली चेतावनी दिए जाने के बाद संघ ने यह निर्णय किया। यह संघ भारत के 75 प्रतिशत मल्टीप्लेक्सों के मालिकों का प्रतिनिधित्व करता है। फिल्म गुरुवार को रिलीज होगी।

संघ के अध्यक्ष दीपक अशर ने बताया कि हमने चार राज्यों राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और गोवा में फिल्म का प्रदर्शन नहीं करने का फैसला किया है, क्योंकि स्थानीय प्रशासन ने हमसे कहा है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति अनुकूल नहीं है।

उन्होंने बताया कि जिन राज्यों में फिल्म रिलीज होगी, वहां सिनेमा हॉल के बाहर पुलिस के अलावा निजी सुरक्षा गार्ड भी तैनात किए जाएंगे। संजय लीला भंसाली की ‘पद्मावत’ मेवाड़ के महाराजा रतन सिंह और सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के बीच की लड़ाई पर आधारित पीरियड फिल्म है।