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Friday, 15 June 2018

June 15, 2018

International Yoga Day 2018: 21 जून को ही क्यों मनाया जाता है इंटरनेशनल योगा डे, क्या है इसका इतिहास

International Yoga Day 2018

इंटरनेशनल योग दिवस का आइडिया सबसे पहले पीएम नरेंद्र मोदी को ही आया था। उन्होंने ही अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने की मांग रखी थी। उन्होंने 27 सितंबर 2014 को UNGA में दिए गए भाषण में इसका जिक्र किया था। इसके बाद 11 दिसंबर 2014 को यूएनजीए में भारत के स्थायी प्रतिनिधि अशोक मुखर्जी ने मसौदा प्रस्ताव पेश किया। कुल 177 देशों ने इसपर सहमति जाहिर की। यह अपने आप में रिकॉर्ड था। भारत के अलावा बाकी देशों के नेताओं और अध्यात्मिक गुरुओं ने भी इसको सपोर्ट किया था। जिसमें ईशा फाउंडेशन के सदगुरु महाराज और आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रवि शंकर शामिल हैं।

मोदी ने भाषण देते हुए कहा था –
योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है। यह मन और शरीर की एकता का प्रतीक है। योग इंसान की सोच, काम करने का तरीका, संयम बरतना, मनुष्य और प्रकृति के बीच सद्भाव सिखाता है। यह सिर्फ कसरत नहीं है बल्कि दुनिया, प्रकृति आदि के बारे में भावनाएं पैदा करता है। हमारी जीवन शैली को बदलकर अच्छी तरह से काम करने में मदद कर सकता है। आइए हम एक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को अपनाने की दिशा में काम करें।

21 को ही क्यों मनाया जाता योग दिवस है:
मोदी ने ही 21 जून की तारीख को आगे बढ़ाया था। उन्होंने बताया था कि यह दिन उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे लंबा और दक्षिणी गोलार्द्ध में सबसे छोटा होता है जिसका दुनिया के अलग-अलग कोने में अलग-अलग महत्व है। शिव को पहला योगी (आदि योगी) बताया गया है। कहा जाता है कि उन्होंने इसी दिन से योग की शिक्षा लोगों को देना शुरू किया था। इसी दिन उनको पहला गुरु माना गया।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का लोगो (International Yoga Day Logo)
  • अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लोगो में एक व्यक्ति को दोनों हाथ जोड़ते हुए दिखाया गया है, जो की योग के साथ साथ, मन और शरीर, मनुष्य और प्रकृति के बीच की एकता को दर्शाता है.
  • इस लोगो को बनाने में हरे, भूरे, पीले और नीले रंग का इस्तेमाल किया गया है और ये रंग अलग अलग चीजों को रिप्रेजेंट करते हैं.
  • योग के लोगो में दिखाई गई, हरे रंग की पत्तियां प्रकृति का प्रतीक हैं, भूरे रंग के पत्तियां पृथ्वी तत्व का प्रतीक हैं, नीला रंग पानी का प्रतीक है, पीला रंग आग तत्व का प्रतीक है और सूरज ऊर्जा और प्रेरणा के स्रोत का प्रतीक है.
  • इसके अलावा इस लोगो में सबसे नीचे ‘योग फॉर हारमनी एंड पीस’ लिखा गया है. क्योंकि योग की मदद से लोगों को हारमनी एंड पीस मिलता है.

अबतक कहां-कहां हुआ इंटरनेशनल योग दिव?
International Yoga Day 2015 को दिल्ली में राजपथ में मनाया गया था। पीएम मोदी ने राजपथ पर 35,985 लोगों के साथ योग किया था। इसके बाद इंटरनेशनल योग दिवस 2016 चंडीगढ़ में मनाया गया। वहां भी काफी लोग आए।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2018 का थीम (International Yoga Day 2018 Theme)
हर साल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए एक थीम का चयन किया जाता है और उस थीम के जरिए लोगों को योग के बारे में जागरूक किया जाता है. साल 2017 के लिए इस दिवस का थीम योग फॉर हेल्थ रखा गया था. हालांकि इस साल के लिए योग दिवस का क्या थीम रखा गया है इसके बारे में अभी तक घोषणा नहीं की गई है.



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June 15, 2018

EID Mubarak 2018 Wishes Photos, Images, Greetings: अपने अज़ीज़ साथियों के साथ इस तरह मनाएं ईद

EID Mubarak 2018 Wishes Photos, Images, Greetings: अपने अज़ीज़ साथियों के साथ इस तरह मनाएं ईद

Happy Eid ul Fitr Mubarak 2018, Eid Mubarak 2018 Wishes Images, GIF Pics, Quotes, Messages, SMS, Status, Photos, Wallpaper, Greetings: रमज़ान का आज आखिरी दिन है और कल ईद मनाई जाएगी। माह-ए-रमज़ान और ईद-उल-फ़ितर की रौनक की बात ही अलग है। 30 दिन के रोज़े रखने और इबादतों के सिलसिले के बाद त्योहार का मजा कई गुना बढ़ जाता है। माह-ए-रमज़ान में रूह अफज़ा, फ्रूट चाट और खजूर की इफ़्तारी तो ईद के दिन मीठी सेवई-खीर की दावतों का लुत्फ़ अपने आप में खास है। ईद के दिन आप अपने अज़ीज दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलेंगे। उन के घर जाकर ईद की दातव का मजा लेंगे।

लेकिन आपके जो अज़ीज साथी आपसे दूर हैं उनके साथ आप कैसे ईद मनाएंगे? कभी इस बारे में सोचा है? खैर, परेशान होने की जरूरत नहीं है। अपने साथियों को आप ईद की बधाई व्हाट्स ऐप, फेसबुक मैसेंजर और SMS जैसे अलग-अलग जरियों स दे सकते हैं। भेंजे अपने दोस्तों को ईद की मुबारकबाद के ये खूबसूरत पैगाम और मनाएं ईद।

कुछ मसर्रत मजीद हो जाए, इस बहाने से ईद हो जाए, ईद मिलने आप जो आएं, मेरी भी ईद, ईद हो जाए

रमज़ान में ना मिल सके, ईद में नज़रें ही मिला लो हाथ मिलाने से क्या होगा, सीधे गले ही लगा लो

अल्लाह की रहमत छाई है, खुशियां कितनी लाई है कयामत ने बात दोहराई है, देखो फिर से ईद है

साल में एक बार आती है ईद, खुशियां हजार लाती है ईद मोमिन के लिए तोहफा है ईद, बच्चों के लिए ईदी है ईद

ईद का दिन है गले आज तो मिल ले ज़ालिम रस्में दुनिया भी है, मौका भी है, दस्तूर भी है… 



Eid Mubarak Messages In Hindi

ईद लेकर आती है ढेर सारी खुशियां
ईद मिटा देती है इंसान में दूरियां
ईद है ख़ुदा का एक नायाब तबारक
और हम भी कहते हैं आपको “ईद मुबारक”
*****

ऐ रूठे हुवे दोस्त मुझे इतना बता दे
क्या मुझ से गले मिलने का अब मन नहीं होता
बच्चों की तरह दौड़ के आ सीने से लग जा
ये ईद का दिन है, इस दिन कोई दुश्मन नहीं होता
ईद मुबारक
*****

चुपके से चाँद की रौशनी छू जाये आपको
धीरे से ये हवा कुछ कह जाये आपको
दिल से जो चाहते हो मांग लो खुदा से
हम दुआ करते हैं वो मिल जाये आपको
आप सभी को ईद मुबारक

Thursday, 14 June 2018

June 14, 2018

FIFA फुटबॉल विश्व कप 2018 Schedule, Fixtures: यहां जानिए फीफा विश्व-2018 का पूरा शिड्यूल

FIFA फुटबॉल विश्व कप 2018 Schedule, Fixtures: यहां जानिए फीफा विश्व-2018 का पूरा शिड्यूल

2018 फीफा वर्ल्ड कप का आयोजन इस बार रूस में किया जा रहा है, जबकि साल 2022 में फुटबॉल फीफा वर्ल्ड कप का आयोजन क़तर में किया जायेगा. इस साल यह टूर्नामेंट 14 जून से 15 जुलाई, 2018 तक चलेगा.

फीफा का पूरा नाम (FIFA Full Form) फीफा का पूरा नाम The Fédération Internationale de Football Association है. फीफा फुटबॉल का वर्ल्ड कप होता है.

फीफा वर्ल्ड कप मैच 2018 का आयोजन वाले शहर (Which country will host the 2018 FIFA World Cup)

फीफा विश्व का आयोजन रूस के 11 शहरों में किया जाएगा, जबकि इसका फाइनल मैच मॉस्को शहर में होगा. नीचे रूस के उन शहरों के नाम बताएं गए हैं यहां पर इसके मैचों का आयोजन होगा-

फीफा विश्व कप- 2018 Schedule:

14 जून – रूस बनाम सऊदी अरब, (रात 8:30)
15 जून – मिस्त्र बनाम उरुग्वे, (शाम 5:30)
15 जून – मोरक्को बनाम ईरान, (रात 8:30)
15 जून – पुर्तगाल बनाम स्पेन, (रात 11:30)
16 जून – फ्रांस बनाम ऑस्ट्रेलिया, दोपहर 3:30)
16 जून – अर्जेंटीना बनाम आइसलैंड, (शाम 6:30)
16 जून – पेरू बनाम डेनमार्क, (रात 9:30)
16 जून – क्रोएशिया बनाम नाइजीरिया, देर (रात 12:30)
17 जून – कोस्टा रिका बनाम सर्बिया, (शाम 5:30)
17 जून – जर्मनी बनाम मैक्सिको, (रात 8:30)
17 जून – ब्राजील बनाम स्विट्जरलैंड, (रात 11:30)
18 जून – स्वीडन बनाम कोरिया रिपब्लिक, (शाम 5:30)
18 जून – बेल्जियम बनाम पनामा, (रात 8:30)
18 जून – ट्यूनीशिया बनाम इंग्लैंड, (रात 11:30)
19 जून – कोलंबिया बनाम जापान, (शाम 5:30)
19 जून – पोलैंड बनाम सेनेगल, (रात 8:30)
19 जून – रूस बनाम मिस्त्र, (रात 11:30)
20 जून – पुर्तगाल बनाम मोरक्को, (शाम 5:30)
20 जून – उरुग्वे बनाम सऊदी अरब, (रात 8:30)
20 जून – ईरान बनाम स्पेन, (रात 11:30)
21 जून – डेनमार्क बनाम ऑस्ट्रेलिया, (शाम 5:30)
21 जून – फ्रांस बनाम पेरू, (रात 8:30)
21 जून – अर्जेंटीना बनाम क्रोएशिया, (रात 11:30)
22 जून – ब्राजील बनाम कोस्टा रिका, (शाम 5:30)
22 जून – नाइजीरिया बनाम आइसलैंड, (रात 8:30)
22 जून – सर्बिया बनाम स्विट्जरलैंड, (रात 11:30)
23 जून -बेल्जियम बनाम ट्यूनीशिया, (शाम 5:30)
23 जून -कोरिया रिपब्लिक बनाम मैक्सिको, (रात 8:30)
23 जून -जर्मनी बनाम स्वीडन, (रात 11:30)
24 जून – इंग्लैंड बनाम पनामा, (शाम 5:30)
24 जून – जापान बनाम सेनेगल, (रात 8:30)
24 जून -पोलैंड बनाम कोलंबिया, (रात 11:30)
25 जून – उरुग्वे बनाम रूस, (शाम 7:30)
25 जून – सऊदी अरब बनाम मिस्त्र, (शाम 7:30)
25 जून – ईरान बनाम पुर्तगाल, (रात 11:30)
25 जून – स्पेन बनाम मोरक्को, (रात 11:30)
26 जून – डेनमार्क बनाम फ्रांस, (शाम 7:30)
26 जून – ऑस्ट्रेलिया बनाम पेरू, (शाम 7:30)
26 जून – नाइजीरिया बनाम अर्जेंटीना, (रात 11:30)
26 जून – आइसलैंड बनाम क्रोएशिया, (रात 11:30)
27 जून – मैक्सिको बनाम स्वीडन, (शाम 7:30)
27 जून – कोरिया रिपब्लिक बनाम जर्मनी, (शाम 7:30)
27 जून – सर्बिया बनाम ब्राजील, (रात 11:30)
27 जून – स्विट्जरलैंड बनाम कोस्टा रिका, (रात 11:30)
28 जून – जापान बनाम पोलैंड, (शाम 7:30)
28 जून – सेनेगल बनाम कोलंबिया, (शाम 7:30)
28 जून – पनामा बनाम ट्यूनीशिया, (रात 11:30)
28 जून – इंग्लैंड बनाम बेल्जियम, (रात 11:30)

प्री क्वार्टर फाइनल (राउंड ऑफ 16):

30 जून, पहला प्री-क्वॉर्टर फाइनल- विनर (ग्रुप सी) बनाम रनर अप (ग्रुप डी), (रात 11:30)
30 जून, दूसरा प्री-क्वॉर्टर फाइनल- विनर (ग्रुप ए) बनाम रनर अप (ग्रुप बी), (शाम 7:30)
1 जुलाई, तीसरा प्री-क्वॉर्टर फाइनल- विनर (ग्रुप बी) बनाम रनर अप (ग्रुप ए), (शाम 7:30)
1 जुलाई, चौथा प्री-क्वॉर्टर फाइनल- विनर (ग्रुप डी) बनाम रनर अप (ग्रुप सी), (शाम 11:30)
2 जुलाई, पांचवां प्री-क्वॉर्टर फाइनल- विनर (ग्रुप ई) बनाम रनर अप (ग्रुप एफ), (शाम 7:30)
2 जुलाई, छठा प्री-क्वॉर्टर फाइनल- विनर (ग्रुप जी) बनाम रनर अप (ग्रुप एच), (शाम 11:30)
3 जुलाई, सातवां प्री-क्वॉर्टर फाइनल- विनर (ग्रुप एफ) बनाम रनर अप (ग्रुप ई), (शाम 7:30)
3 जुलाई, आठवां प्री-क्वॉर्टर फाइनल- विनर (ग्रुप एच) बनाम रनर अप (ग्रुप जी), (शाम 11:30)

क्वार्टर फाइनल( राउंड ऑफ 8):

6 जुलाई, पहला क्वॉर्टर फाइनल- विनर पहला प्री-क्वार्टर बनाम विनर दूसरा प्री-क्वार्टर, (शाम 7:30)
6 जुलाई, दूसरा क्वॉर्टर फाइनल- विनर पांचवां प्री-क्वार्टर बनाम विनर छठा प्री-क्वार्टर, (रात 11:30)
7 जुलाई , तीसरा क्वॉर्टर फाइनल- विनर तीसरा प्री-क्वार्टर बनाम विनर चौथा प्री-क्वार्टर, (रात 11:30)
7 जुलाई, चौथा क्वॉर्टर फाइनल- विनर सातवां प्री-क्वार्टर बनाम विनर आठवां प्री-क्वार्टर, (रात 7:30)

सेमीफाइनल:

10 जुलाई, पहला सेमीफाइनल- विनर पहला क्वार्टर फाइनल बनाम विनर दूसरा क्वार्टर फाइनल, (रात 11:30)
11 जुलाई, दूसरा सेमीफाइनल- विनर तीसरा क्वार्टर फाइनल बनाम विनर चौथा क्वार्टर फाइनल, (रात 11:30)

फाइनल:

15 जुलाई, (रात 8:30)

Wednesday, 13 June 2018

June 13, 2018

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी




Atal-Bihari-Vajpayee-Biography-in-hindi


अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजीनीति के बहुत ही प्रतिभावान व्यक्ति है एक राजनितिक होने के साथ साथ अटल बिहारी वाजपेयी एक कवि, संघ प्रचारक (RSS) एंव आदर्शवादी व्यक्ति भी है साथ ही पिछले पांच दशको से सक्रीय राजनीती में प्रमुख भूमिका निभाई है और 10 बार विभिन्न राज्यों के लोकसभा से चुनाव जीतते हुए सांसद बने थे जो की अपने आप में एक रिकॉर्ड है

इसी प्रसिद्धि के चलते उनके प्रतिद्वंदी भी उनके इस प्रतिभा के कायल है अटल बिहारी वाजपेयी निर्णय लेने में तनिक हिचकते नही है वे निर्णय लेने में जितने कठोर दिल से उतने ही नरमदिल स्वाभाव के व्यक्ति है जिसके कारण उन्हें भारतीय राजनीती का “अजातशत्रु” भी कहा जाता है

और यही नही राजनीती के सत्ता के सर्वोच्च शिखर प्रधानमन्त्री पद को भी इन्होने पहली बार 1996 में मात्र 13 दिन के लिए प्रधानमन्त्री बने फिर दूसरी बार मात्र 1 साल के लिए कार्यकाल संभाला और इसके पश्चात तीसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ 1998 से 2004 तक प्रधानमन्त्री पद को सुशोभित किया, जो की यह कार्यकाल काफी सफल रहा.

तो आईये हम सब ऐसे आदर्शवादी भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन परिचय (Atal Bihari Vajpayee Jeevan Biography Essay in Hindi) जानते है

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी : एक जीवन परिचय

  • नाम : अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee)
  • जन्मतिथि : 25 December 1924
  • जन्मस्थान : ग्वालियर, मध्यप्रदेश भारत
  • माता : कृष्णा देवी (Krishna Devi)
  • पिता : कृष्णा बिहारी वाजपेयी (Krishna Bihari Vajpayee)
  • राजनैतिक पार्टी : भारतीय जनता पार्टी (BJP)
  • पद : भारत के प्रधानमन्त्री (Prime Minister of India) और 10 बार लोकसभा सांसद
  • पुरष्कार : भारत रत्न, पद्म विभूषण, डी.लिट, लोकमान्य तिलक पुरष्कार, लिबरेशन वार अवार्ड, श्रेष्ट सांसद पुरष्कार,
  • शादी : अविवाहित (Unmarried)
  • दत्तक पुत्री : नमिता (Namita) 

अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन परिचय : बायोग्राफी
Prime Minister Atal Bihari Vajpayee Biography Essay in Hindi

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 December 1924 को ग्वालियर, मध्यप्रदेश भारत में हुआ, इनके पिता का नाम कृष्णा बिहारी वाजपेयी (Krishna Bihari Vajpayee) और माता का नाम कृष्णा देवी (Krishna Devi) था, इनके पिता अपने गाँव के स्कूल में स्कूलमास्टर और एक महान कवि भी थे जिसके साथ साथ इनके पिता सत्यवादी, ईमानदार और आदर्शवादी अनुशासित व्यक्ति थे जिसके चलते अटल बिहारी वाजपेयी को कवित्व का गुण अपने पिताजी से विरासत में प्राप्त हुआ था,

आरम्भिक जीवन :-

अटल बिहारी वाजपेयी बचपन से ही दिखने में सुंदर थे जिसके कारण इनके माता पिता इनको बहुत ही प्रेम करते थे इनकी प्रारम्भिक शिक्षा गोरखी विद्यालय से प्राप्त की और बाद में आगे की पढाई ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज से हिन्दी, इंग्लिश और संस्कृत विषय से बीए (जिसे अब लक्ष्मीबाई कॉलेज के नाम से जाना जाता है) की शिक्षा प्राप्त किया और फिर पोस्ट ग्रेजुएट की पढाई कानपुर के दयानंद एंग्लो-वैदिक कॉलेज से पोलिटिकल साइंस से M.A. किया और परीक्षा में सबसे अधिक अंक प्राप्त किये जिसके चलते उनको फर्स्ट क्लास की डिग्री से सम्मानित किया गया

सामजिक जीवन : – (Social Liife)

अपने छात्र जीवन के दौरान ही अटल बिहारी वाजपेयी जी पढाई के साथ साथ खेलकूद जैसे कब्बडी, गुल्ली डंडा, में भी विशेष रूचि रखते थे और सन 1939 में एक स्वयसेवक के रूप में राष्ट्रिय स्वयसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हो गये और फिर राष्ट्रिय स्तर के वाद-विवाद प्रतियोगिताओ में हिस्सा लेते रहे और इसी दौरान अपनी एलएलबी की पढाई भी बीच में छोड़ दिया और पूरी निष्ठा के साथ संघ के कार्यो में जुट गये

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और इसी दौरान अटल बिहारी वाजपेयी को राजनितिक का पाठ डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी से प्राप्त हुआ और फिर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के राजनितिक निर्देशन में आगे बढ़ते रहे और इसी दौरान पांचजन्य, दैनिक स्वदेश, वीर अर्जुन और राष्ट्रधर्म जैसी पत्रिकाओ के सम्पादन का कार्य भी बखूबी रूप से किया और महात्मा रामचन्द्र वीर द्वारा रचित महान कृति “विजय पताका” को पढ़कर अटल बिहारी वाजपेयी का पूरे जीवन की दिशा ही बदल गयी

आजादी के लडाई में अटल बिहारी वाजपेयी का योगदान
Atal Bihari Vajpayee: Freedom Fighter of India

अटल बिहारी वाजपेयी ने हर भारतीयों के तरह आजादी की लड़ाई में सक्रीय भूमिका निभाई और सन 1942 में भारत छोडो आंदोलन के दौरान अन्य नेताओ के साथ जेल भी गये जहा उनकी पहली मुलाकात डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी से हुआ जो की अटल बिहारी वाजपेयी के लिए डॉक्टर साहब राजनितिक गुरु साबित हुए

राजनितिक जीवन :- (Political Life)

अटल बिहारी वाजपेयी के राजनितिक जीवन की शुरुआत आजादी के लड़ाई के दौरान ही शुरू हो गयी थी फिर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में अपनी पत्रकारिता छोड़कर सन 1951 भारतीय जनसंघ में शामिल हो गये और फिर सन 1955 में पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा फिर अटल बिहारी वाजपेयी को हार का सामना करना पड़ा लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी ने हिम्मत नही हारी

बाधाएँ आती हैं आएँ
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ
निज हाथों में हँसते-हँसते
आग लगाकर जलना होगा
क़दम मिलाकर चलना होगा 


और फिर दोबारा सन 1957 में उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के बलरामपुर लोकसभा से चुनाव लड़ा और फिर विजयी होकर जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में संसद पहुचे और इस तरह लगातार 20 साल सन 1957 से 1977 तक जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे, और इसी दौरान मोरारजी देसाई की सरकार में सन 1977 से सन 1979 तक विदेशमंत्री बने और इस दौरान विदेशो में भारत की एक अलग ही पहचान बनाई,

फिर जनता पार्टी की स्थापना के बाद सन 1980 में जनता पार्टी के विचारो से असंतुष्ट होने बाद जनता पार्टी को छोड़ दिया और फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की स्थापना किया और फिर 6 अप्रैल 1980 को अटल बिहारी वाजपेयी को भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष पद सौंप दिया गया फिर इन्होने पहली बार 1996 में मात्र 13 दिन के लिए प्रधानमन्त्री बने फिर दूसरी बार 1998 से 2004 तक प्रधानमन्त्री पद के लिए चुने गये वो पंडित जवाहरलाल नेहरु के बाद एक मात्र वही प्रधानमन्त्री है जो की इस पद को 3 बार सुशोभित किया है अपने नाम के अनुरूप अटल जी अपने विचारो के लिए अटल माने जाते है जिसका जिक्र उनके संसद में कहे गये इस नारे से पता चलता है

“अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा और कमल खिलेगा”

प्रधानमन्त्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी जी का कार्यकाल

अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमन्त्री के रूप में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किये जो इस प्रकार है :-
परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बना भारत

अटल सरकार ने अपने कुशल नेतृत्व के दम पर संयुक्त राष्ट्र के शर्तो को पूरा करते हुए 11 मई और 13 मई को सम्पूर्ण विश्व को चौकाते हुए भारत के शर्तानुसार जल, थल और आकाश में परमाणु परिक्षण न करते हुए 5 भूमिगत परमाणु परिक्षण किया और इस तरह से भारत को विश्व शक्ति के मानचित्र पर परमाणु संपन्न राष्ट्र बना दिया

इस परमाणु परिक्षण की विश्वनियता की इसी बात पर अंदाजा लगाया जा सकता है की बड़े बड़े दावे करने वाले विदेशी पश्चिमी देशो को उनके उपग्रहों, तकनिकी उपकरणों से भी इस परिक्षण का पता नही लगा पाए जिसके फलस्वरूप भारत पर अनेक प्रतिबन्ध लगा दिए गये लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी ने विदेशो के आगे न झुकते हुए भारत को विश्व पटल पर अलग ही पहचान दिलाई

सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ
प्रगति चिरंतन कैसा इति अब
सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ
असफल, सफल समान मनोरथ
सब कुछ देकर कुछ न मांगते
पावस बनकर ढ़लना होगा
क़दम मिलाकर चलना होगा


पाक सम्बन्धो में सुधार की पहल

अटल बिहारी वाजपेयी ने एक कदम आगे बढ़ते हुए पाक शासक नवाज शरीफ से बातचीत करते हुए सन 19 फरवरी 1999 को सदा ए सरहद नाम से नई दिल्ली और लाहौर के बीच बीएस सेवा की शुरुआत किया और इस तरह भारत पाक सम्बन्धो की एन नई शूरुआत की लेकिन बदले में भारत को उपहार स्वरूप कुछ महीनो के पश्चात कारगिल युद्ध मिला

कारगिल युद्ध ( Kargil War)

सन 1999 के मई महीने में पाक सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ़ ने धोखे से पाकिस्तानी सेना और कश्मीरी उग्रवादियों की मदद से भारत के जम्मू कश्मीर नियन्त्रण रेखा को पार करते हुए हमला बोल दिया जिनका मुख्य उद्देश्य भारतीय जमीनों पर कब्ज़ा करना था लेकिन भारतीय फ़ौज के अदम्य साहस के बल पर अटल सरकार ने अंतरराष्टीय शर्तो को ध्यान में रखते हुए बिना नियंत्रण रेखा पार करते हुए पाकिस्तानी सेना को कश्मीर के इलाको से खदेड़ दिया जिसे कारगिल युद्ध के नाम से जाना जाता है और इस तरह से विश्व बिरादरी में भारत पाक के मध्य एकबार फिर से तनाव बढ़ गये

दाँव पर सब कुछ लगा है, रुक नहीं सकते
टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते


और इस तरह अटल जी देश से अथाह प्रेम करते है और कहते है की यह हमारा कोई जमींन का कोई टुकड़ा नही जो कोई भी हथिया ले, जिसका जिक्र उनके इस कविता में मिलता है :-

भारत जमीन का टुकड़ा नहीं
जीता जागता राष्ट्रपुरुष है
हिमालय मस्तक है, कश्मीर किरीट है
पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं
पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघायें हैं
कन्याकुमारी इसके चरण हैं, सागर इसके पग पखारता है
यह चन्दन की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है
यह तर्पण की भूमि है, यह अर्पण की भूमि है
इसका कंकर-कंकर शंकर है
इसका बिन्दु-बिन्दु गंगाजल है
हम जियेंगे तो इसके लिये
मरेंगे तो इसके लिये


इसके अतिरक्त अटल सरकार ने अपने अपने कार्यकाल के दौरान ऐसे अनेको कार्य किये जो की अपने आप में ऐतिहासिक है

1 – भारत के कोनो कोनो तक सडको से जोड़ने का श्र्येय अटल बिहारी वाजपेयी को जाता है उन्होंने भारत के 4 महानगरो को स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना योजना के जरिये नई दिल्ली, कलकत्ता, मुंबई और चेन्नई को राजमार्गो द्वारा जोड़ा जो की अपने आप में एक अनोखी पहल थी कहा जाता है शेरशाह सूरी के बाद भारत में सबसे अधिक सड़को के निर्माण का श्रेय अटल बिहारी सरकार को जाता है

2 – 100 साल से अधिक पुराने कावेरी जल विवाद को अटल सरकार ने आपसी सुझबुझ से इस समस्या को सुलझाया

3 – भारत में मोबाइल क्रांति की शुरुआत इनके कार्यकाल में शुरू हुआ था जिसका हर हाथ मोबाइल का उद्देश्य था

4 – गरीबो के लिए आवास निर्माण योजना, रोजगार जैसे अनेको योजनाये क्रियान्वित किया

5 – अटल जी मानना था की आधुनिक युग में बिना विज्ञान का सहारा लिए विकास की राह तय नही किया जा सकता है जिसके लिए उन्होंने जय जवान जय किसान नारे को आगे बढ़ाते हुए “जय जवान जय किसान जय विज्ञान” का नारा दिया, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में टेक्नोलॉजी की सम्पूर्ण विकास हो

6 – आर्थिक प्रतिबंधो के बावजूद अग्नि 2 का सफल परिक्षण किया

अटल बिहारी वाजपेयी : एक कवि के रूप में

अटल बिहारी वाजपेयी जितने ही निर्णय लेने में कठोर है दिल से उतने ही नर्म स्वाभाव के व्यक्ति है एक कवि के रूप में सभी पक्ष विपक्ष नेता उनके इस गुण के कायल है एक कवि के अटल बिहारी वाजपेयी ने अनेको रचनाये की है जो की कुछ इस प्रकार है

  1. अमर बलिदान
  2. संसद में तीन दशक
  3. मृत्यु या हत्या
  4. राजनीती की रपटीली राहे
  5. सेक्युलर वाद

पुरष्कार और सम्मान

1 – 1992 में देश के लिए अभूतपूर्व सेवा के लिए पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित

2 – 1993 में कानपुर विश्वविद्यालय से डाक्टरेट की उपाधि से नवाजा गया

3 – 1994 में लोकमान्य तिलक अवार्ड से सम्मान

4 – 1994 में अटल बिहारी वाजपेयी को गोविन्द बल्लभ पन्त पुरष्कार से सम्मानित किया गया

5 – 1994 में सर्वश्रेष्ट सांसद पुरष्कार सम्मान

6 – 2015 में लिबरेशन वॉर अवार्ड (बांग्लादेश मुक्तिजुद्धो संमनोना) पुरष्कार से सम्मानित

अटल बिहारी  वाजपेयी को भारत रत्न पुरस्कार (Bharat Ratna Award)

भारत देश की सेवा में अदभुत योगदान के लिए उन्हें 2014 में उनके जन्मदिन 25 दिसम्बर के इस शुभ अवसर पर भारत के सर्वोच्च सम्मान “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया, भारत रत्न का सम्मान देने देश के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी खुद उनके घर पर गये और इस तरह पहली बार किसी राष्ट्रपति ने सारे प्रोटोकॉल तोड़कर उनके घर पर गये और इस सम्मान से सम्मानित किया
वर्तमान में अटल बिहारी वाजपेयी

सन 2004 में लोकसभा के चुनावो में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलने के पश्चात शारीरिक अस्वस्थता के चलते अटल बिहारी वाजपेयी ने सक्रीय राजनीती से सन्यास ले लिया और वर्तमान में अपने कृष्णामेनन मार्ग स्थित सरकारी आवास में रहते है

ठन गई
मौत से ठन गई

जूझने का मेरा इरादा न था
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था

रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई
यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं
ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ
लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ

तू दबे पाँव, चोरी-छिपे से न आ
सामने वार कर फिर मुझे आज़मा

मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र
शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर

बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं
दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं


तो आप सबको अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन पर आधारित यह पोस्ट अटल बिहारी वाजपेयी जीवन परिचय जीवनी Atal Bihari Vajpayee Biography कैसा लगा प्लीज हमे कमेंट बॉक्स में जरुर बताये और यदि कोई जानकारी अपूर्ण या गलत हो तो हमे अवगत जरुर कराये ताकि इसमें हम सुधार कर सके

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Source: vice.com

Friday, 8 June 2018

June 08, 2018

जानिए 'रमजान' से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें

Ramdan Importance in Hindi

इस्लाम में सबसे पाक महीना कहा जाने वाला रमजान साल में दो बार ही नसीब होता है। ये एक ऐसा समय होता है जब सभी मुसलमान अपना रात-दिन अल्लाह की इबादत में लगा देते हैं। पूरे दिनभर भूखे रहकर अपने रोजे को पूरा करते हैं।

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रमजान के इस पाक महीने में एक रोजेदार को ज्यादा खाना, शराब पीना, शारीरिक संबंधों जैसे कार्यों को सुबह से लेकर शाम तक करने से बचना होता है।

क्योंकि यह एक ऐसा समय होता है एक रोजेदार अपनी आत्मा को शुद्ध करके अल्लाह तक पहुंचता है। इस समय में एक रोजेदार को (चाहे वह महिला हो या पुरुष) स्वयं का त्याग करना पड़ता है। उसमें खाने से लेकर पीने तक की चीजें भी शामिल होती हैं।

मुसलमानों को अपने जीवन में मार्गदर्शन के लिए इस महीने का उपयोग करने के लिए कहा जाता है। रमजान के पावन माह में हर रोजेदार को स्वयं पर नियंत्रण बनाए रखना होता है और रिश्तेदारों के साथ अच्छे संबंधों रखने होते हैं। इस समय एक रोजेदार अपनी सभी आदतों से दूर रहता है।

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रमजान में रोजा रखने के दौरान शराब का सेवन व शारीरिक संबंधों जैसी चीजों की इसलिए मनाही होती है क्योंकि इन सब कार्यों से अल्लाह की ओर ध्यान से भी वह भटक जाता है। क्योंकि खुदा से उसी का मिलन होता है जोकि कि इस संसार कि माया को छोड़कर उसे अपना लेता है।

Monday, 21 May 2018

May 21, 2018

धन लाभ के लिए सोमवार को करें 8 में से कोई 1 उपाय

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21 मई को ज्येष्ठ के अधिक मास का पहला सोमवार है। ये दिन इसलिए भी खास है क्योंकि अधिक मास 3 साल में एक बार आता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, अधिक मास भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है और सोमवार भगवान शिव का दिन माना जाता है। श्रीकृष्ण के महीने में शिवजी की पूजा करने से किसी का भी बुरा समय दूर हो सकता है और हर इच्छा पूरी हो सकती है। सोमवार को ये उपाय करें…

1. अधिक मास के पहले सोमवार को यानी 21 मई को 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ऊं नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे आपका दुर्भाग्य दूर हो सकता है।

2. पानी में काले तिल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें व ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। इससे पितृ दोष में कमी आती है।

3. शिवलिंग पर सफेद आंकड़े यानी मदार का फूल चढ़ाएं। ये फूल भगवान शिव को बहुत प्रिय हैं।

4. भगवान शिव की पूजा में धतूरा का उपयोग करने से आपकी हर इच्छा पूरी हो सकती है।

5. शिवपुराण के अनुसार, भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन लाभ हो सकता है।

6. शमी वृक्ष के पत्तों से भगवान शिव की पूजा की जाए तो शनि दोष में कमी आती है।

7. शिवपुराण के अनुसार, हरसिंगार के फूलों से भगवान शिव की पूजा करने से धन-संपत्ति मिलती है।

8. अलसी के फूलों से शिव की पूजा करने पर मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है। ऐसा शिवपुराण में लिखा है।

Wednesday, 16 May 2018

May 16, 2018

Astrology News: यमराज पर भारी पड़ गई एक नारी, बनीं सौ पुत्रों की माता

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वट सावित्री व्रत ज्‍येष्‍ठ मास के कृष्‍ण पक्ष की अमावस्‍या को मनाया जाता है। यह व्रत पति की दीर्घायु और संतान प्राप्ति की कामना के लिए महत्‍वपूर्ण है। व्रत से जुड़ी सावित्री की कथा में बताया गया है कि यदि एक स्‍त्री धैर्य और बुद्धिमानी के साथ कठिन परिस्थिति का सामना करे तो यमराज को भी उसके आगे हार माननी पड़ जाती है। देखिए सावित्री की चतुरता ने न केवल उसके पति के प्राण वापस लौटाए बल्कि उन्‍हें 100 पुत्रों की मां भी बनाया…

पिता ने कहा पुत्री से ‘अपने अनुसार चुन लें वर’

यौवनावस्‍था को प्राप्‍त कर लेने के पश्‍चात सावित्री के पिता मद्र देश के राजा अश्‍वपति अपनी पुत्री से कहा कि तुम अत्‍यंत विदुषी हो और अपने पति की खोज तुम अपने अनुसार स्‍वयं ही कर लो

सावित्री ने चुना सत्‍यवान को

पिता की आज्ञा के साथ ही सावित्री एक बुद्धिमान मंत्री को साथ लेकर पति की खोज पर निकल पड़ीं। काफी खोजबीन के बाद उन्‍हें सत्‍यवान के रूप में एक योग्‍य वर मिला। सावित्री ने लौटकर अपने पिता को सत्‍यवान के बारे में बताया तो वहां मौजूद देवर्षि नारद कहने लगे कि सावित्री ने अपने पति का सही चुनाव नहीं किया। उन्‍होंने जिस सत्‍यवान को पति के रूप में चुना है, उसकी आयु अब मात्र एक वर्ष ही शेष है। 

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नारद जी के वचन सावित्री को न डिगा सके

नारद जी के वचन सुनकर भी सावित्री बोलीं- ‘भारतीय नारी जीवन में केवल एक बार ही अपना पति चुनती है। इसलिए मैं सत्‍यवान से ही विवाह करूंगी।’ विवाह के पश्‍चात सावित्री अपने राजसी ठाठ-बाठ छोड़कर अपने पति और सास-ससुर के साथ वन में जीवन व्‍यतीत करने लगीं। सत्‍यवान के पिता शाल्व देश के राजा द्युमत्सेन का राजपाट उनके पड़ोसी राजा ने छीन लिया था। तब से वह अपने पुत्र के साथ वन में रह रहे थे।

सावित्री के मन में बढ़ता जा रहा था भय

सावित्री जैसे-जैसे अपने वैवाहिक जीवन में रम रही थीं, वैसे-वैसे उनका भय भी बढ़ता जा रहा था कि वह दिन करीब आने वाला है जब सत्‍यवान की मृत्‍यु हो जाएगी। उस दिन के आते ही सावित्री साया बनकर अपने पति के साथ रहने लगी। वन में लकड़ी काटने के लिए सत्‍यवान जैसे ही पेड़ पर चढ़े वह अस्‍वथ होकर जमीन पर गिर पड़े। सावित्री ने उन्‍हें संभाला और उनका सिर अपनी गोद में रखकर लिटा लिया। कुछ समय बाद सत्‍यवान अचेत हो गए। सावित्री सब कुछ समझ चुकी थीं। 

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यमराज और सावित्री का वार्तालाप

सावित्री अपने पति की मृत्‍यु का विलाप कर ही रही थीं कि थोड़ी देर में यमराज प्रकट हो गए। यमराज सत्‍यवान को अपने साथ लेकर दक्षिण दिशा की ओर जाने लगे तो सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चल दीं। सावित्री को अपने पीछे आते देख यमराज ने उनसे कहा, ‘तू मेरे पीछे मत आ क्योंकि तेरे पति की आयु पूर्ण हो चुकी है और वह अब तुझे वापस नहीं मिल सकता। अब तू लौट कर अपने पति के मृत शरीर की अन्त्येष्टि कर।’ सावित्री ने उत्‍तर दिया, ‘मैं आपके तो क्‍या अपने पतिव्रता धर्म को निभाने के लिए किसी भी लोक तक जा सकती हूं।’

सावित्री से प्रसन्‍न होकर यमराज ने दिया यह वर

सावित्री के पतिव्रता धर्म से प्रसन्‍न होकर यमराज ने उनसे एक वर मांगने को कहा। सावित्री ने वर में अपने नेत्रविहीन ससुर के लिए नेत्र ज्‍योति मांगी। यमराज ने कहा, तथास्‍तु। फिर से सावित्री ने कहा, ‘मुझे आप जैसे महान देवता के दर्शन हुए, मैं धन्‍य हो गई।’ सावित्री की इन बातों से यमराज ने फिर से प्रसन्‍न होकर एक वर मांगने को कहा। इस बार सावित्री ने अपने ससुर को उनका राज्‍य वापस मिलने का वर मांग लिया। यह सिलसिला चलता रहा और सावित्री की बातों से यमराज प्रसन्‍न होते रहे और सावित्री एक के बाद एक वर मांगती गईं।

जब सावित्री ने मांगा संतान प्राप्ति का वर

जब यमराज ने सावित्री से अंतिम वर मांगने को कहा तो सावित्री बोलीं, मुझे अपने ससुर द्युमत्सेन के कुल की वृद्धि के लिए 100 पुत्र प्राप्‍त करने का वरदान दें। यमराज फिर से तथास्‍तु बोलकर चल दिए। सावित्री भी पीछे-पीछे चल दी। सावित्री को फिर से पीछे आता देख यमराज ने कहा, मेरा कहना मान और अब तू वापस चली जा। इस पर सावित्री बोलीं, आपने जो मुझे 100 पुत्र प्राप्‍त करने का वरदान दिया है। यदि मेरे पति का अंतिम संस्‍कार हो गया तो मैं 100 पुत्रों को कैसे जन्‍म दूंगी। सावित्री की इस चतुरता के आगे यमराज को हार माननी पड़ी। यमराज ने सत्‍यवान को जीवनदान दिया और इस प्रकार सावित्री ने आगे चलकर 100 पुत्रों को जन्‍म दिया।

स्रोत : navbharattimes