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Sunday, 1 April 2018

April 01, 2018

Relience Jio दे रहा है एक साल तक के लिए फ्री प्राइम मेंबरशिप, यहां जानें आपको कैसे मिलेगा?

Relience JIO प्राइम मेंबरशिप

आज से Relience Jio की प्राइम मेंबरशिप खत्म हो जाएगी. ऐसे में कंपनी ने शुक्रवार को ही अपने सभी मौजूदा प्राइम सब्सक्राइबर्स के लिए अगले एक साल के लिए फ्री सब्सक्रिप्शन का ऐलान कर दिया है. लेकिन यहां खास बात ये है कि आपकी प्राइम मेंबरशिप ऑटोमैटिक अपग्रेड नहीं होगी यूजर को प्राइम की एक साल की फ्री सर्विस पाने के लिए क्लेम करना होगा. जियो की ओर से कई प्राइम यूजर्स को ये एक्सटेंशन मैसेज मिल रहा है लेकिन अलग आपको ऐसा कोई मैसेज नहीं मिला है जो यहां जानिए क्या करना होगा?

कैसे पाएं फ्री प्राइम मेंबरशिप?

  • अपने स्मार्टफोन में इंस्टॉल MyJio एप खोलें जहां प्राइम यूजर्स को एक मेंबरशिप एक्सटेंशन का बैनर मिलेगा.
  • इस बैनर पर गेट नाऊ के ऑप्शन पर क्लिक करें, ऐसा करते ही आपके प्लान प्राइम मेंबरशिप रिन्यू करने का मैसेज आ जाएगा
  • जिस नंबर से आप एप पर रजिस्टर होंगे. उस नंबर पर ये सर्विस एक साल के लिए रिन्यू हो जाएगा.
  • अगर आपने MyJio एप खोली और आपको ये बैनर नजर नहीं आ रहा है तो एप को बंद करें. इस एप पर दोबारा लॉग-इन करें.
  • दोबारा लॉग-इन करने पर एप खुलते ही मेंबरशिप एक्टेंशन का बैनर नजर आएगा. इस पर क्लिक करके बताए गए स्टेप फॉलो करें आप अगले एक साल तक का एक्सटेंशन पा सकेंगे.
इस ऑफर के साथ जियो के मौजूदा प्राइम यूजर मार्च 2019 तक प्राइम मेंबर बने रहेंगे औऱ खास बात ये है कि उन्हें ये सुविधा फ्री में मिलेगी. वहीं जियो के नए यूजर्स 99 रुपये भुगतान करके प्राइम मेंबरशिप ले सकते हैं.

आपको बता दें कि 31 मार्च 2018 प्राइम मेंबरशिप खत्म होने की तारीख थी ऐसे में जियो यूजर्स को कंपनी के ऩए ऑफर का इंतजार था. हर यूजर के मन में जियो की मेंबरशिप खत्म होने बाद आगे क्या होगा यही सवाल था. कंपनी ने ऑफर खत्म होने के एक दिन पहले ही बोनांजा ऑफर का ऐलान कर दिया.

प्राइम मेंबर्स के मिलने वाले फायदे

  • जियो अपने प्राइम मेंबर्स को बेहद सस्ते और स्पेशल टैरिफ प्लान देता है.
  • इसमें VoLTE सर्विस के तहत वॉयस कॉल फ्री मिलती है
  • जियो के एप सूट्स की फ्री एक्सेस दी जाती है.
  • ये सभी फायदे प्राइम यूजर्स को अगले 12 महीने यानी मार्च 2019 तक मिलते रहेंगे.

Saturday, 3 February 2018

February 03, 2018

Flipkart पर ऑर्डर किया था 55,000 रुपये का iPhone8 और मिला डिटर्जेंट बार

iphone 8 from Flipkart

अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं तो ये खबर आपको परेशान कर सकती है. ई-कॉमर्स फ्लिपकार्ट की धोखाधड़ी का ऐसा ही मामला सामने आया है. एक शख्स ने फ्लिपकार्ट से 55,000 रुपये में iPhone 8 ऑर्डर किया था. ये ऑर्डर जब ग्राहक को मिला तो इसमें उसे आईफोन की जगह डिटर्जेंट बार (कपड़े धुलने का साबुन) मिला.


दरअसल मुंबई के 26 साल के तबरेज महबूब जो पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं उन्होंने फ्लिपकार्ट से iPhone 8 का 64GB का वेरिएंट मंगाया था. इसके लिए उन्होंने 55,000 रुपये का भुगतान कर दिया था. 22 जनवरी को उन्हें उनका ऑर्डर मिला. बॉक्स खोलने पर कस्टमर को इसमें डिटर्जेंट सोप मिला.


तबरेज महबूब ने इसकी शिकायत मुंबई की बायकुला पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई. उन्होंने फ्लिपकार्ट पर धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया.

बायकुला पुलिस स्टेशन के अधिकारी ने बताया कि 'तबरेज महबूब नाम के शख्स ने बुधवार को हमारे पास शिकायत दर्ज कराई है, इसमें फ्लिपकार्ट पर धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया है. हम इस मामले की जांच कर रहे हैं.'

आपको बता दें कि कई ऑनलाइन रिटेलर्स को लेकर इस तरह की धोखाधड़ी का मामला सामने आ चुका है. इससे पहले भी फ्लिपकार्ट पर ऐसे आरोप लग चुके हैं.
February 03, 2018

बजट 2018: गांधी जयंती से 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराएगी सरकार, कैशलेस होगी स्कीम

Budget 2018

केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना (एनएचपीएस) के तहत पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा महात्मा गांधी जयंती यानी 2 अक्तूबर से मुहैया कराएगी। राज्यों को जुलाई तक इस योजना के तहत बीमा कंपनियों या ट्रस्ट गठित कर बीमा मुहैया कराने की जिम्मेदारी सौंपनी है।

बजट 2018-19 में घोषित योजना पर केंद्र और राज्य सरकारें 60: 40 के अनुपात में सालाना करीब 11 हजार करोड़ खर्च करेंगी। इससे 10 करोड़ गरीब परिवारों को स्वास्थ्य बीमा मुहैया होगा।

योजना में प्रीमियम पर प्रति परिवार प्रति वर्ष 1,000-1,200 रुपये के हिसाब से खर्च आने का अनुमान है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (एनएचपीएस) का खर्च केंद्र और राज्य सरकारें मिल कर वहन करेंगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जयप्रकाश नड्डा और नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने शुक्रवार को बीमा योजना को लागू करने संबंध में जानकारी दी। पॉल ने कहा कि एनएचपीएस पूरी तरह से लागू होने पर सालाना 10 से 11 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। बजट में करदाताओं पर एक फीसदी अतिरिक्त अधिभार लगाया गया है। उससे प्राप्त होने वाली राशि का उपयोग इस योजना के लिए किया जाएगा।

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नीति आयोग में स्वास्थ्य मामलों के सलाहकार आलोक कुमार ने विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि इस योजना में एक परिवार में कितने भी सदस्य हों, सभी के लिए कुल पांच लाख का कवरेज होगा। चाहे वह एक पर खर्च हो या फिर अलग-अलग के अस्पताल में भर्ती होने पर खर्च आए।

नकदरहित इलाज की सुविधा 
 कुमार ने कहा कि यह बीमा आधार से लिंक होगी, लेकिन आधार नहीं होने पर भी अन्य पहचान पत्र के आधार पर बीमा मुहैया कराया जाएगा। साथ ही यह पूरी तरह से पेपरलेस और नगदीरहित होगा। इसे लागू करने के लिए राज्यों को बीमा कंपनियों या ट्रस्ट गठित कर बीमा मुहैया कराने का जिम्मा सौंपना है। बीमा के तहत स्वास्थ्य सेवाएं सरकारी व निजी  दोनों तरह के अस्पतालों में मिलेगी।

भविष्य में सभी होंगे शामिल 
कुमार ने कहा यह एक शुरुआत है। केंद्र सरकार का इरादा प्रत्येक नागरिक को इस तरह का बीमा मुहैया कराना है। आने वाले समय में इस योजना का लाभ सभी को मिलेगा। उन्होंने कहा, सरकार ने एक परिवार में पांच सदस्यों के हिसाब से अनुमान लगाया है कि 50 करोड़ लोगों को इसका लाभ मिलेगा। इन परिवारों की पहचान सामाजिक-आर्थिक-जाति आधारित जनगणना के आधार पर है।

चुनौतीपूर्ण राज्यों को मिलेगा अधिक धन 
आयोग से सदस्य पॉल ने कहा कि एनएचपीएस में सामान्य राज्यों की हिस्सेदारी 40 फीसदी होगी। जबकि जम्मू-कश्मीर समेत अन्य चुनौतीपूर्ण क्षेत्र वाले राज्यों के मामले में खर्च वहन का केंद्र और राज्य 90:10 के अनुपात में करेंगे। उन्होंने कहा, इसमें कोष की समस्या नहीं है, लेकिन चिकित्सा क्षेत्र के पेशेवरों को तैयार करना एक चुनौती है।

डेढ़ लाख प्राथमिकी केंद्र होंगे तैयार 
पॉल ने बताया कि इस योजना में डेढ़ लाख प्राथमिक केंद्र तैयार कर व्यापक स्वास्थ्य संरक्षण भी दिया जाएगा। विभिन्न स्तरों पर चिकित्सा क्षेत्र में काम करने वालों को प्रशिक्षण देकर इन केंद्रों में दिल, मधुमेह और अन्य बीमारियों की शुरुआती चरण में ही जांच का जिम्मा दिया जाएगा।

अगले महीने तैयार हो जाएगा मसौदा 
आयोग के सदस्य पॉल ने कहा कि राज्य सरकारों से इस योजना पर चर्चा की गई थी और अब मार्च में उनसे इस पर विचार-विमर्श कर मसौदा तैयार कर लिया जाएगा। इसके बाद कंपनियों या ट्रस्ट गठित होने पर प्रति व्यक्ति को बीमा देने की दर, दिशा-निर्देश समेत अन्य विषयों पर निर्णय लिया जाएगा। जुलाई में उन्हें किसी कंपनी या ट्रस्ट गठित कर बीमा मुहैया कराने की जिम्मेदारी सौंपनी होगी।

बजट में दो हजार करोड़ आवंटित 
गौरतलब है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को पेश आम बजट में इस योजना की घोषणा की। उन्होंने बजट में 2000 करोड़ रुपये एनएचपीए के लिए आवंटित किया है। साथ ही बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च में 11.5 फीसदी की वृद्धि की गई है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना के लिए धन की कमी नहीं होगी
बजट में घोषित राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना (एनएचपीएस) को लेकर धन की चिंताओं को दूर करने का प्रयास करते हुए स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने शुक्रवार को आश्वासन दिया कि इसके लिए धन की समस्या कभी नहीं रहेगी। केंद्र सरकार इसके महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम कर रही है।

प्रीमियम के लिए सरकार भुगतान करेगी 
नड्डा ने कहा कि हमने इसके लिए सारे इंतजाम किये हैं। उन्होंने कहा कि योजना के हर पहलू का अध्ययन किया गया है और जब सरकार इसे लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार होगी तभी कार्यक्रम का ब्योरा साझा किया जाएगा। योजना के प्रीमियम के बारे में सवाल पर नड्डा ने कहा कि इस प्रीमियम के लिए सरकार भुगतान करेगी और फिलहाल इसके लिए राज्यों की हिस्सेदारी 2000 करोड़ रुपये रखी गई है। नड्डा ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि हमने जो भी वादा किया है उसे पूरा किया है। इसलिए वित्त की समस्या नहीं है, वो कभी समस्या नहीं रही है और न रहेगी।

बजट में घोषित चिकित्सा बीमा योजना कैशलेस होगी: जेटली
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि बजट में घोषित विश्व की सबसे बड़ी चिकित्सा बीमा योजना कैशलेस (नकदी रहित) होगी। इसमें इलाज खर्च अपनी तरफ से करने के बाद भुगतान के लिए दावा करने की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि इसे अगले वित्त वर्ष से लागू किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर धन का आवंटन बढ़ाया जाएगा।



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मोदीकेयर के रूप में चर्चित राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना के तहत कुल आबादी के 40 प्रतिशत यानी 10 करोड़ परिवारों को अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आने पर पांच लाख रुपये तक की चिकित्सा बीमा सुरक्षा दी जाएगी। जेटली ने यहां कहा कि इसके तहत माध्यमिक और उच्चस्तरीय अस्पतालों में भर्ती के खर्च का बीमा होगा। निश्चित तौर पर इसमें तमाम सरकारी अस्पताल और कुछ चुनिंदा निजी अस्पताल शामिल होंगे। यह योजना विश्वास और बीमा के मॉडल पर आधारित हो सकती है। उन्होंने कहा कि इसके तरीके पर नीति आयोग और स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि इसे अगले वित्त वर्ष में क्रियान्वयित किया जाएगा।

जेटली ने योजना के पूरी तरह सरकारी वित्तपोषित होने का भरोसा दिलाते हुए कहा कि दो हजार करोड़ रुपये की शुरुआती राशि का आवंटन कर दिया गया है। योजना के लागू होने के बाद जितनी भी राशि की आवश्यकता होगी, वह दी जाएगी। उन्होंने कहा कि  आने वाले साल में मैं और सहज स्थिति देख पा रहा हूं। जहां तक प्रत्यक्ष कर में ग्राफ का संबंध है तो यह तेजी से चढ़ेगा।

प्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या बढ़ी 
जेटली ने कहा कि नोटबंदी तथा माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के बाद प्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या बढ़ी है। कर-चोरी रोकने के उपाय होते ही मुझे जीएसटी संग्रह में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है। मुझे नहीं लगता कि राजस्व कोई बड़ी चुनौती होने वाला है।