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Monday, 21 May 2018

May 21, 2018

धन लाभ के लिए सोमवार को करें 8 में से कोई 1 उपाय

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21 मई को ज्येष्ठ के अधिक मास का पहला सोमवार है। ये दिन इसलिए भी खास है क्योंकि अधिक मास 3 साल में एक बार आता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, अधिक मास भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है और सोमवार भगवान शिव का दिन माना जाता है। श्रीकृष्ण के महीने में शिवजी की पूजा करने से किसी का भी बुरा समय दूर हो सकता है और हर इच्छा पूरी हो सकती है। सोमवार को ये उपाय करें…

1. अधिक मास के पहले सोमवार को यानी 21 मई को 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ऊं नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे आपका दुर्भाग्य दूर हो सकता है।

2. पानी में काले तिल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें व ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। इससे पितृ दोष में कमी आती है।

3. शिवलिंग पर सफेद आंकड़े यानी मदार का फूल चढ़ाएं। ये फूल भगवान शिव को बहुत प्रिय हैं।

4. भगवान शिव की पूजा में धतूरा का उपयोग करने से आपकी हर इच्छा पूरी हो सकती है।

5. शिवपुराण के अनुसार, भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन लाभ हो सकता है।

6. शमी वृक्ष के पत्तों से भगवान शिव की पूजा की जाए तो शनि दोष में कमी आती है।

7. शिवपुराण के अनुसार, हरसिंगार के फूलों से भगवान शिव की पूजा करने से धन-संपत्ति मिलती है।

8. अलसी के फूलों से शिव की पूजा करने पर मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है। ऐसा शिवपुराण में लिखा है।

Monday, 16 April 2018

April 16, 2018

अक्षय तृतीया 2018: नहीं करने चाहिए ये 7 काम, अशुभ होता है

अक्षय तृतीया 2018 नहीं करने चाहिए ये 7 काम, अशुभ होता है

अक्षय तृतीया यानी सौभाग्य का दिन। लेकिन इस दिन अगर ये काम किए तो अशुभ प्रभाव
पड़ता है। ज्योतिषाचार्य पंडित संतराम ने अनुसार, इस दिन अक्षय तृतीय(18 अप्रैल) के दिन सारे रुके हुए काम पूरे हो जाते हैं। यह बहुत ही शुभ दिन होता है। इस दिन मां लक्ष्मी सबपर अपनी कृपा बरसाती है। लेकिन उनकी पूजा में कुछ गलतियां बिल्कुल भी न करें।

इस दिन खरीदारी का विशेष महत्व होता है। तो इस दिन कुछ न कुछ जरूर खरीदें। वैसे तो सोना चांदी खरीदने से काफी लाभ होता है। लेकिन यह न खरीद सकें तो बर्तन आदि भी खरीद सकते हैं। ऐसा न करना अशुभ माना जाता है।

इस दिन कहा जाता है कि भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का प्रयोग जरूर करना चाहिए। लेकिन ध्यान रहे कि नहाने और साफ कपड़े पहनने के बाद ही तुलसी को तोड़ें। वरना लक्ष्मी माता नाराज हो जाती हैं।

इस दिन वैसे तो व्यक्ति का मन शांत रहता है। लेकिन माना जाता है कि इस दिन गुस्सा नहीं करना चाहिए। शांत स्वाभाव से ही सबसे मिलना जुलना चाहिए। शांत मन से मां लक्ष्मी की पूजा करने से आपको अधिक फल मिलता है।

इस दिन साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ऐसा करने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है। घर के हर कोने को साफ करना चाहिए। गंदे स्थान पर पूजा नही करनी चाहिए। माता के लिए नया स्थान भी लगा सकते हैं।

वैसे तो बड़ों का आदर हमेशा ही करना चाहिए। लेकिन अगर कोई इस दिन बड़ों का आदर नहीं करता है या फिर उनसे अपशब्द करता है तो यह करना आपकी जिंदगी पर सबसे ज्यादा अशुभ प्रभाव डालेगा।

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मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद भी अगर कोई व्यक्ति मन में द्वेष की भावना रखता है या दूसरों का बुरा करने की सोचता है तो मां लक्ष्मी उसके पास कभी नही रुकती।

इस दिन दान करने का विशेष महत्व होता है। जो भी हो सकते पंडित या गरीबों का दान जरूर दें। इस दिन दान देने से या गरीबों को भोजन कराना शुभ होता है। वरना आपकी जिंदगी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

Friday, 30 March 2018

March 30, 2018

हनुमान जयंती 2018: हनुमान जयंती पर यह पूजा का शुभ मुहूर्त

हनुमान जयंती पर यह पूजा का शुभ मुहूर्त

भगवान शिव के 11वें अवतार माने जाते हैं बजरंग बली। कहा जाता है कि इनके मात्र नाम लेने से कई प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। हर साल चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है। इस साल यह 31 मार्च को आयोजित की जाएगी। ज्योतिषियों की मानें तो हनुमान जयंती 30 मार्च को शाम 07:35 से 31 मार्च को शाम 6 बजे तक है।

उदया तिथि होने के कारण 31 मार्च को ही यह पर्व मनाया जाएगा। इसलिए साम 6 बजे तक पूजा किया जाना शुभ रहेगा। सुबह 9 बजे से 11 बजे तक राहुकाल रहेगा। ऐसा भी कहा जाता है कि 31 मार्च की रात्रि को हनुमान जी की पूजा करने से विशेष फल मिलता है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि पूर्णिमा की रात्रि में ही हनुमान जी का जन्म हुआ था।

हनुमान जयंती के दिन हनुमान चालीसा या सुन्दरकांड का पाठ करना अच्छा माना जाता है।

हनुमान जयंती 2018: हनुमान जयंती 31 मार्च को पूरे देश में मनाई जाएगी। चैत्र मास की पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है। कहा जाता है भगवान बजरंग बली की पूजा में कई नियमों का पालन करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि चैत्र माह की पूर्णिमा को ही हनुमान जी का जन्म हुआ था। इस दिन हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार के उपाय किए जाते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं कुछ पूजा और नियमों के बारे में जिनका बजरंग बली की पूजा में खास ध्यान रखना चाहिए।

हनुमान जयंती के दिन अगर व्रत रखते हैं तो इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। जो भी वस्‍तु दान दें विशेष रूप से मिठाई तो उस दिन स्‍वयं मीठे का सेवन ना करें।

अगर हनुमान जयंती पर व्रत रख रहे हैं तो आपको बता दें कि हनुमान जी के व्रत मीठे रखे जाते हैं। इसलिए इस दिन भी भूलकर भी नमक नहीं खाना चाहिए।

हनुमान जी की पूजा में काले रंग के कपड़े बिल्कुल नहीं पहनने चाहिए। हनुमान जी की पूजा लाल रंग या पीले रंग के कपड़े पहनकर करनी चाहिए।

शुद्धता का ध्यान: हनुमान जी की पूजा में साफ और शुद्धता का खास ध्यान रखना चाहिए। इस दिन अगर भगवान का प्रसाद बनाएं तो महाधोकर पवित्र मन से काम करना चाहिए। इसके अलावा ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।


Saturday, 17 March 2018

March 17, 2018

Chaitra Navratri 2018 : सृष्टि के निर्माण का उत्सव है चैत्र नवरात्र, जानें कलश स्थापन का शुभ मुहूर्त और चैत्र नवरात्रि तिथि के बारे में

Chaitra Navratri 2018

नवरात्र शब्द से 'नव अहोरात्रों (विशेष रात्रियां) का बोध' होता है. इस समय शक्ति के नौ रूपों की उपासना की जाती है, क्योंकि 'रात्रि' शब्द सिद्धि का प्रतीक माना जाता है. मनीषियों ने वर्ष में दो बार Navratri का विधान बनाया है- विक्रम संवत के पहले अर्थात् Chaitra मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहली तिथि) से नवमी तक. इसी प्रकार इसके ठीक छह मास पश्चात आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से महानवमी अर्थात् विजयादशमी के एक दिन पूर्व तक नवरात्र मनाया जाता है.

ज्योतिषीय दृष्टि से Chaitra Navratri 2018 का विशेष महत्व है, क्योंकि इस नवरात्र की अवधि में सूर्य का राशि परिवर्तन होता है. सूर्य 12 राशियों में भ्रमण पूरा करते हैं और फिर से अगला चक्र पूरा करने के लिए पहली राशि मेष में प्रवेश करते हैं. सूर्य और मंगल की राशि मेष दोनों ही अग्नि तत्ववाले हैं, इसलिए इनके संयोग से गर्मी की शुरुआत होती है.

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धार्मिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है, क्योंकि ब्रह्मपुराण के अनुसार नवरात्र के पहले दिन आदिशक्ति प्रकट हुई थीं और देवी के कहने पर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सूर्योदय के समय ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि निर्माण का काम शुरू किया था, इसलिए इसे सृष्टि के निर्माण का उत्सव भी कहा जाता है. इसी तिथि से हिंदू नववर्ष शुरू होता है. इसके अतिरिक्त सतयुग का आरंभ भी इसी दिन हुआ था.

चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप में पहला अवतार लेकर पृथ्वी की स्थापना की थी. इसके बाद भगवान विष्णु का सातवां अवतार जो भगवान राम का है, वह भी चैत्र नवरात्र में हुआ था, इसलिए धार्मिक दृष्टि से चैत्र नवरात्र का बाकी नवरात्रों की तुलना में ज्यादा महत्व है. नवरात्र के दौरान जहां मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है, वहीं चैत्र नवरात्रों के दौरान मां की पूजा के साथ-साथ अपने कुल देवी-देवताओं के पूजा का विधान भी है, जिससे यह नवरात्र विशेष हो जाता है.

इस बार बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग : इस बार चैत्र नवरात्र इसलिए भी खास है, क्योंकि विरोधीकृत्य नव संवत्सर 2075, रविवार 18 मार्च, 2018 से प्रारंभ हो रहा है. इस साल उतरा-भाद्रपद नक्षत्र और मीन राशि में नया साल विक्रम संवत 2075 व नवरात्र शुरू हो रहे हैं. इससे सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है.

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इस साल के राजा सूर्य और मंत्री शनि होंगे. यह लगातार चौथा साल है जब नवरात्र 8 दिनों का होगा. 25 मार्च को रविवार को नवमी तिथि का क्षय हो गया है, इसलिए नवरात्र 8 दिनों का ही है. ग्रंथों में लिखा है कि जिस दिन सृष्टि का चक्र प्रथम बार विधाता ने प्रवर्तित किया, उस दिन चैत्र शुदी 1 रविवार था. इसलिए आनेवाला नव संवत्सर 2075 बहुत ही भाग्यशाली होगा, क्योंकि इस वर्ष भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रविवार है, शुदी एवं शुक्ल पक्ष एक ही है.

माता का आगमन हाथी पर : इस वर्ष माता रानी का आगमन हाथी पर हो रहा है. यह आगमन सुख-सुविधाओं के साथ जलवृष्टि वाला रहेगा. माता का आगमन रविवार के दिन हो रहा है और माता का प्रस्थान सोमवार के दिन हो रहा है. सोमवार के दिन गमन से कष्ट एवं अन्य अनावश्यक परेशानियां भी देखने को मिलेंगी.

संपूर्ण सृष्टि प्रकृतिमय : आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो यह प्रकृति और पुरुष के संयोग का भी समय होता है. प्रकृति मातृशक्ति होती है, इसलिए इस दौरान देवी की पूजा होती है. गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि संपूर्ण सृष्टि प्रकृतिमय है और हम जिसे पुरुष रूप में देखते हैं, वह भी आध्यात्मिक दृष्टि से प्रकृति यानी स्त्री रूप है. स्त्री से यहां तात्पर्य यह है कि जो पाने की इच्छा रखनेवाला है, वह स्त्री है और जो इच्छा की पूर्ति करता है, वह पुरुष है.

कलश स्थापन शुभ मुहूर्त
धर्म शास्त्र के अनुसार कलश स्थापन प्रतिपदा तिथि में प्रातः काल सर्वोत्तम होता है. अगर कोई अड़चन होती है तो मध्यान अभिजीत मुहूर्त 11:30 बजे से दिन के 12:24 तक का बेहतर विकल्प आपके पास है. वैसे प्रतिपदा तिथिपर्यंत कलश स्थापना करने में कोई दोष नहीं. नवमी पूजा के नाम से प्रचलित महानिशा पूजा 24 मार्च शनिवार की रात्रि में की जायेगी. महा अष्टमी का व्रत 24 मार्च रवि उदय उदया तिथि में किया जायेगा. 25 मार्च रविवार को नवमी तिथि है.

अतः इसी दिन अनुदेशन नवमी तिथि में नवमी का व्रत ही किया जायेगा. साथ ही श्रीराम नवमी का सनातन पर्व के अवतार के विभिन्न आयोजनों के साथ संपन्न होगा. नवरात्र संबंधित हवन पूजन 25 मार्च, रविवार को प्रातः 7:30 के बाद दिन-रात किसी भी समय किया जा सकता है. नवरात्र व्रत का पारण 26 मार्च, सोमवार को प्रातःकाल में किया जायेगा.

चैत्र नवरात्रि तिथि
18 मार्च : कलश स्थापना, मां शैलपुत्री की पूजा
19 मार्च: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
20 मार्च: देवी दुर्गा के चंद्रघंटा रूप की आराधना
21 मार्च : कुष्मांडा स्वरूप की उपासना
22 मार्च : माता स्कंदमाता की पूजा
23 मार्च : मां कात्यायनी की पूजा
24 मार्च : मां कालरात्रि की पूजा. इस वर्ष अष्टमी के दिन की जानेवाली मां महागौरी की पूजा भी इसी दिन की जायेगी. कन्या पूजन.
25 मार्च : मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ नवदुर्गा पूजन पूर्ण. प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव.
26 मार्च : व्रत का पारण दशमी तिथि को. कलश वेदी पर लगाये गये सतनज की कटाई.

Friday, 9 March 2018

March 09, 2018

घरों में है अगरबत्ती का खास महत्व, फायदे जानकर दंग रह जाएंगे आप

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कहते हैं घर एक मंदिर होता है। कहना भी सही है क्योंकि घर ही वो स्थान है जहां हम अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर रहते हैं लेकिन ये घर तभी मंदिर बन सकता है जब उसमें सकारात्मक शक्तियों का वास हो और ईट-पत्थर से बने एक मकान को हमें ही अपने प्रयासो से घर बनाना पड़ता है।

इसके लिए घर में सदस्यों के प्रति सम्मान और प्रेम भाव होना चाहिए, बड़ो का आशीर्वाद होना चाहिए और पूजा-पाठ का होना भी अति आवश्यक है क्योंकि पूजा के दौरान उच्चारित किए गए मंत्र सकारात्मक शक्तियों को खींचती है और नकारात्मक शक्तियों को दूर करती है।

पूजा में प्रयोग किए गए धूपबत्ती का भी अपना अलग महत्व है क्योंकि ये न केवल घर को सुंगधित करते हैं बल्कि इनके और भी लाभ है। विद्वानों का ऐसा कहना है कि अगरबत्ती को जलाने में इंसान के मन में शान्ति आती है।

आपको बता दें कि अगरबत्तियों का भी अपना अलग ही महत्व है और इनके बारे में ही हम आज आपको बताने जा रहे हैं। मान लीजिए यदि आपके घर में नकारात्मक शक्तियों का वास हो। किसी काम में मन न लग रहा हो।

घर में कलेश हो तो उस स्थिति में पीली सरसों, गुगल,लोबान और गाय के घी को मिलाकर इसकी धूप बना लें और सूर्यास्त के बाद इस धूप को जलाकर इसके धुएं को पूरे घर में फैला दें। ऐसा 21 दिन तक करने से आपको खुद इसका फर्क महसूस होगा।

इसके साथ ही मानसिक तनाव को कम करने के लिए गुड़ और घी के धूप को जलाएं। इस तरह के धूप को अग्रिहोत्र भी कहकर बुलाते हैं।

हर गुरूवार और रविवार के दिन गुड़ और घी को मिलाकर उसे कंडे पर जलाएं। यदि आपका मन हो तो आप इसमें पके हुए चावल भी मिला सकते हैं। इससे पूरा घर सुगंधित हो जाता है और इसके साथ ही मन शान्त और एकाग्र होता है।

इसके अलावा लोबान के धूप को भी जला सकते हैं। इसके लिए मिट्टी के बने एक जगह में लोबान और नारियल के छिलकों को एकत्रित कर उसे जला लें और उसे हल्के हाथों से हवा देते रहे।

इससे धुआं जब ज्य़ादा मात्रा में निकलने लगे तो उसे पूरे घर में फैला दें। इसके दो लाभ है एक तो इससे घर में सकारात्मकता फैलती है और कीड़े-मकौड़े, मक्खियां भी घर में नहीं भटकती है।

Tuesday, 27 February 2018

February 27, 2018

आज का राशिफल, 27 फरवरी 2018: इन राशियों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा


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मेष(Aries): आज आपमें भावुकता की मात्रा काफी रहेगी जिसके कारण किसी की बातों से या व्यवहार से आपकी भावनाओं को ठेस लग सकती है। मां के स्वास्थ्य के कारण आप काफी परेशान रहेगें।

वृषभ(Taurus): परिश्रम के अनुपात में अल्प परिणाम मिलने पर भी आप निष्ठापूर्वक कार्य को आगे बढ़ाएंगे। आपके क्षेत्र की विशालता और वाणी की मधुरता अन्य लोगों को प्रभावित करेगी और उसके द्वारा लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

मिथुन(Gemini): अत्यधिक भावनाशीलता आपके मन को संवेदनशील बनाएगी। जलाशय और स्त्रीवर्ग से सचेत रहना पड़ेगा। मन की परिस्थिति डवांडोल रहने के कारण निर्णयशक्ति का अभाव रहेगा।

कर्क(Cancer): आपके दोस्तों, परिजनों तथा परिवार के साथ आपका दिन काफी बेहतर बीतेगा। उनकी ओर से मिले उपहार से आप आनंदित रहेंगे। बाहर घूमने का कार्यक्रम बनेगा तथा स्वादिष्ट भोजन करने का अवसर मिलेगा।

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सिंह(Leo): गणेशजी आज आपको कोर्ट-कचहरी के मामलों से दूर रहने की सलाह देते हैं। मन में बेचैनी रहेगी तथा विभिन्न चिंताएं सताएंगी। स्वास्थ्य नरम रह सकता है।

कन्या(Virgo): गणेशजी का आशीर्वाद आपको विविध क्षेत्रों में यश, कीर्ति और लाभ दिलाएगा। लक्ष्मीजी की कृपा आप पर रहेगी। बुजुर्गों तथा मित्रों के साथ आपका दिन आनंद में बीतेगा। प्रवास पर जा सकते हैं। जीवनसाथी और बच्चों के साथ अच्छा समय बीतेगा।

तुला(Libra): आज का दिन आपके लिए प्रतिकूल रहने से सावधानी बरतने की गणेशजी सलाह देते हैं। आज आपका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। मानसिकरूप से भी आप अस्वस्थ अनुभव करेंगे। आपकी वाणी और वर्तनी से किसी को भ्रांति न हो इसकी ध्यान रखिएगा।

वृश्चिक(Scorpio):गणेशजी कहते हैं कि आज आप शारीरिक और मानसिक रूप से काफी थकान और आलस्य का अनुभव करेगें जिससे उत्साह मे कमी रहेगी। इसका प्रभाव व्यावसायिक क्षेत्र में देखने को मिलेगा तथा उससे परेशानी हो सकती है। 

धनु(Sagittarius): गणेशजी कहते हैं कि आज का दिन आपके लिए शुभ है। आज आप आर्थिक मामलों में उचित योजना बना सकेंगे। अन्य लोगों की सहायता करने का प्रयत्न करेंगे। हर एक कार्य सफलतापूर्वक संपन्न होगा। व्यापार-विषयक योजना बनेगी।

मकर(Capricorn): स्वादिष्ट भोजन प्राप्त होगा तथा दोस्तों के साथ घूमने जाएंगे। विपरीत लिंगीय मित्रों के साथ अच्छा समय बीतेगा, ऐसा गणेशजी कहते हैं। प्रबल धन लाभ का योग है। आपके व्यापार में वृद्धि होगी। साझेदारी से लाभ होगा।

कुंभ(Aquarius): कार्य में सफलता पाने के लिए आज का दिन उत्तम है ऐसा गणेशजी कहते हैं। आपके द्वारा किए गए कार्य से आपको यश और कीर्ति मिलेगा। परिवार में सौहार्दपूर्ण वातावरण रहेगा। तन-मन से आप ताजगी और स्फूर्ति का अनुभव करेंगे।

मीन(Pisces): आज का दिन साहित्य सृजन के लिए उत्तम है, ऐसा गणेशजी कहते हैं। विद्यार्थी विद्याध्यन में अच्छा प्रदर्शन कर सकेंगे। आपके स्वभाव में भावुकता और कामुकता अधिक रहेगी। पेट दर्द की आशंका है। मन में भय रह सकता है। मानसिक संतुलन बनाए रखें।

Friday, 23 February 2018

February 23, 2018

सामुद्रिक शास्त्र: शरीर पर ऐसे विशेष चिन्ह वाले लोग होते हैं बेहद धनवान, क्या आप भी हैं इसमें

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सामुद्रिक शास्त्र शरीर पर स्थित चिन्हों के अध्ययन का विज्ञान है। सामुद्रिक शास्त्र में व्यक्ति की शारीरिक बनावट, हाव-भाव और शरीर की कुछ विशेष चिन्हों का आकलन किया गया है। इन विशेष चिन्हों के आकलन के आधार पर व्यक्ति के वर्तमान और भविष्य के बारे में पता चलता है।

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साथ ही इन विशेष चिन्हों के द्वारा व्यक्ति के स्वभाव और उसके चरित्र का भी सटीक आकलन किया जाता है। सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार शरीर पर कुछ ऐसे चिन्ह हैं जो व्यक्ति के भाग्यशाली होने का संकेत देते हैं। साथ ही शरीर पर ऐसे चिन्ह वाले लोग बेहद धनवान भी होते हैं।

सामुद्रिक शास्त्र की रचना करने वाले महर्षि समुद्र के अनुसार अंकुश, कुंडल और चक्र राजयोग के निशान है।

जिस व्यक्ति के पैर के तलवे में अंकुश, कुंडल या चक्र का निशान दिखाई देता है वह एक अच्छा शासक बनकर राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है।

सामुद्रिक शास्त्र-ग्रंथ जातक भरण के अनसुार ऐसा व्यक्ति जिसके हाथों या पैरों में हस्ती, छत्र, मछली, तालाब, अंकुश या वीणा जैसे दिखने वाले निशान हो तो वह व्यक्ति उत्तम पुरुष माना गया है। इतना ही नहीं इन चिन्हों से विभूषित व्यक्ति को राजयोग जैसा सुख प्राप्त है।

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इस ग्रंथ के अनुसर कुछ विशेष चिन्ह जैसे शक्ति, तोमर, बाण, रथ चक्र और ध्वज को भी राजयोग के लक्षण के रूप में देखा गया है। जिस व्यक्ति की हथेली के बीचो-बीच शक्ति, तोमर, बाण, रथ, चक्र या ध्वजा का निशान दिखता है उसे शासन करने का एक बड़ा अवसर मिलता है जिसका वह लाभ भी उठाता है।

ऐसा व्यक्ति जिसके पैर में पहिए या चक्र के अलावा कमल, आसन का निशान होता है उसे भूमि-भवन जैसी सुख सुविधाएं आजीवन प्राप्त होती हैं। उसके घर में लक्ष्मी का सदा वास रहता है।

Source: haribhoomi

Thursday, 22 February 2018

February 22, 2018

होली के दिन हनुमान जी को चढ़ाएंगे बस ये एक चीज , हो जायेंगे मालामाल

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होली का त्योहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस त्योहार को लोग बड़े ही उल्लास से एक-दूसरे को रंग लगाकर बनाते हैं. आपने अपने आसपास देखा होगा कि लोग अपने गिले सिकवे बुलाकर लोगों को गले लगा लेते हैं. यह त्योहार हिन्दुओं का एक ऐसा त्योहार है जो कि लोगों जिदंगी में रंग भर देता है. ज्योतिष्य शास्त्रों के अनुसार हर साल ग्रहों में कुछ न कुछ बदलाव जरुर होते हैं इसी तरह से इस बार होली पर भी कुछ लोगों की किस्मत बदली वाली है, इतना तो सभी जानते हैं इस दिन लोग बजरंगबली की पूजा करते हैं, आज हम आपको बतायेंगे इस दिन हनुमान जी को चढ़ाई गई एक चीज आपको मालामाल बना सकती हैं, आइये जानते हैं क्या चीज है यह..

होली खेलने से पहले करे यह काम

होली बुराइयों पर अच्छाई की विजय का त्योहार है। इस साल 2 मार्च को होली खेली जाएगी। कहा जाता है इस दिन असुरों का नास हुआ था इस वजह से विधि अनुसार बजरंगबली को चोला चढ़ाने से हर व्यक्ति के बिगढ़े हुए काम बन जाते हैं. इसी के साथ-साथ आप बजरंगबली को को केवड़े से बना इत्र और गुलाब की माला भी अर्पित कर सकते हैं. जब भी आप अपने घर पर होली खेले तो सबसे पहले घर के दरवाजे पर अबीर या गुलाल जरूर डाले. साथ में शाम क वक्त घर के मुख्य दरवाजे पर घी का दीपक जलाएं इस नियम को करने से सभी धन से संबंधित परेशानियां चली जाएगी.

होलिका जलने के बाद उसकी राख को लेकर करें यह उपाय

ध्यान रखें यदि कोई कोई आपका दुश्मन होली के दिन आपको लौंग या इलायची खाने के लिए दे तो उसे आप को नही लेना चाहिए इसके पीछे उसकी आपको नुकसान पहुंचाने की मंशा भी हो सकती है।क्योंकि इस दिन लोग तात्रिकं पूजा करवा कर आपके लिए कुछ गलत भी करवा सकते हैं. होली की सबसे अहम बात यह होती है कि होलिका जलने के बाद उसकी राख को लेकर अपने घर के चारो ओर दरवाजों पर डालना चाहिए ऐसा करने से घर की निगेटिव एनर्जी चली जाती है , साथ के साथ बिमारियों का भी नाश होता हैै.

अगर व्यापार ठीक- ठाठ नहीं चल रह है तो करें…

यदि आपका व्यापार ठीक ठाठ नहीं चल रह है तो होलिका दहन के समय वहां से अग्नि लाकर उससे अपनी दुकान या गोदाम में सरसों के तेल का दीप जला दें। इससे आपके बिजनेस व दुकान में तरक्की आएगी.

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सबसे मुख्य जानाकारी जब भी आप बाहर होली खेलने के लिए जाएं तो अपने सर पर टोपी जरुर पहने यह आपको किसी भी बुरे असर से बचा कर रखेगी.

Sunday, 18 February 2018

February 18, 2018

खाटू धाम जाने की तैयारी में जुटे श्याम भक्त - हारे का सहारा कहते हैं भक्त इन्हें

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दुनियाभर में ये अपनी अलग पहचान बना चुका खाटूश्याम मेला शुरू हो गया है। मेले की शुरुआत के साथ ही श्रीश्याम के दर्शनों के लिए दूर-दराज से भक्तों के यहां आने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। इस मेले की खास बात ये है कि भक्तों ने इसे कई नाम दिए हैं। कोई लक्ख दातार का मेला कहता है तो कोई फाल्गुन मेला।
राजस्थान के सीकर में स्थित खाटूधाम की फाल्गुन माह में महिमा ही अलग नजर आती है। यहां देश के कई हिस्सों से भक्त पैदल ही हाथ में श्रीश्याम के नाम का निशान लिए आते हैं। हर भक्त की जुबां पर केवल एक ही स्वर सुनाई देता है। हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा।

मेले की खास बात ये भी है कि इसकी तैयारियां कई महीनों पहले ही शुरू हो जाती है। यहां आने वाले भक्तों को सुलभ और सुरक्षित प्रभु की मूरत के दर्शन हो सकें, इसके लिए श्रीश्याम मंदिर कमेटी, सीकर जिला प्रशासन और खाटू ग्राम पंचायत का अहम योगदान रहता है। इसके साथ ही यहां आने वाले भक्तों को सुलभ यातायात मुहैया कराने के लिए रोडवेज की ओर से भी विशेष बसों की व्यवस्था की जाती है। वहीं, सुरक्षा की दृष्टि से पूरे मेले पर सीसीटीवी से नजर रखी जाती है।

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यहां आने वाले अधिकांश भक्त अपनी पदयात्रा रींगस से शुरू करते हैं। ऐसे में रींगस से लेकर खाटूधाम तक भक्तों के पैदल चलने के लिए मैटिंग की व्यवस्था रहती है ताकि उनके पैरों में किसी तरह की कोई खरोंच भी नहीं आए। इसके अलावा विभिन्न संगठनों की ओर से खाटूधाम जाने वाले मार्गों पर भक्तों के खाने-पीने, आराम करने सहित चिकित्सा सुविधाएं भी मुहैया करवाई जाती हैं।

मंदिर कमेटी से जुड़े लोगों के अनुसार, फाल्गुन में एकादशी का विशेष महत्व है। ऐसे में यहां आगामी एकादशी को भक्तों की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। बताया जा रहा है कि इस बार ये संख्या 30 लाख पहुंचने वाली है। ऐसे में यहां भक्तों की लम्बी-लम्बी कतारें देखी जा सकती हैं।कहा जाता है कि यहां आने वाले भक्तों की मुरादें श्रीश्याम पूरी करते हैं।

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श्याम बाबा के प्रति लोगों की अगाध आस्था है। यही वजह है कि खाटू श्याम प्रेमी इस समय बाबा के रंग में रंगे हुए नजर आ रहे हैं। इस समय श्रद्धालु खाटू धाम, राजस्थान जाने की तैयारी में व्यस्त नजर आ रहे हैं। इस बारे में खाटू श्याम मंदिर ढाई माइल के प्रमुख पंकज गिदड़ा ने बताया कि शहर से डेढ़ से दो हजार हजार श्रद्धालु राजस्थान स्थित खाटू धाम में बाबा का दर्शन करेंगे। कोई ट्रेन से, कोई हवाई जहाज से पहुंच रहा है। आने वाले एकादशी के दिन भक्तों द्वारा रिंगस, राजस्थान से निशान उठाया जाएगा। ¨रगस से खाटू धाम 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वहां से पैदल यात्रा तय की जाएगी। जो पैदल नहीं चल सकते हैं, वे बग्गी आदि पर यात्रा करेंगे।


Source: Aajtak

Saturday, 17 February 2018

February 17, 2018

रंग पंचमी 2018 – रंग पंचमी होली पर रंगों में रमे होते हैं देवता

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रंग पंचमी होली का ही एक रूप है जो देश के कई क्षेत्रों में चैत्र मास की कृष्ण पंचमी को मनाया जाता है। दरअसल होली का जश्न कई दिनों तक चलता है और इसकी तैयारियां होली के दिन यानि फाल्गुन पूर्णिमा से लगभग एक महीने पहले शुरू हो जाती है। फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन के पश्चात अगले दिन सभी लोग उत्साह में भरकर रंगों से खेलते हैं। रंगों का यह उत्सव चैत्र मास की कृष्ण प्रतिपदा से लेकर पंचमी तक चलता है। इसलिये इसे रंग पंचमी कहा जाता है। रंग पंचमी कोकण क्षेत्र का खास त्यौहार है महाराष्ट्र में तो होली को ही रंग पंचमी कहा जाता है। इसके पिछे की मान्यता यह है कि इस दिन जो भी रंग इस्तेमाल किये जाते हैं जिन्हें एक दूसरे पर लगाया जाता है हवा में उड़ाया जाता है उससे विभिन्न रंगों की ओर देवता आकर्षित होते हैं। साथ ही मान्यता है कि इससे ब्रह्मांड में सकारात्मक तंरगों का संयोग बनता है व रंग कणों में संबंधित देवताओं के स्पर्श की अनुभूति होती है।

महाराष्ट्र में रंग पंचमी

रंगवाली होली यानि धुलंडी से लेकर पंचमी तिथि तक यहां जमकर होली खेली जाती है। रंग पंचमी इस पर्व का अंतिम दिन होता है। माना जाता है कि यह मछुआरों के लिये भी बहुत खास होता है इस दिन सब नाचने गाने में मस्त होते हैं। रंग पंचमी पर एक विशेष प्रकार का मीठा पकवान भी घरों में बनाया जाता है जिसे पूरनपोली कहा जाता है। जगह-जगह पर दही-हांडी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं जिसमें महिलाएं मटकी फोड़ने वालों पर रंग फेंकती हैं ताकि वे अपने उद्देश्यों में सफल न हो सकें। जो भी मटकी फोड़ने में कामयाब होता है उसे पुरस्कार से नवाज़ा जाता है और वह होली किंग ऑफ द ईयर कहलाता है।

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असल में रंग पंचमी के जरिये एक प्रकार से तेजोमय सगुण स्वरूप का रंगों के माध्यम से आह्वान भी किया जाता है। रंगपंचमी अनिष्टकारी शक्तियों पर विजय प्राप्ति का उत्सव भी है मान्यता है कि रज-तम के विघटन से दुष्टकारी या कहें पापकारी शक्तियों का उच्चाटन भी इस दिन होता है।

इंदौर में रंगपंचमी

महाराष्ट्र ही नहीं मध्य प्रदेश के इंदौर में रंगपंचमी को पारंपरिक रूप से मनाया जाता है। इस दिन पूरे शहर में रंगारंग जुलूस निकाले जाते हैं। यहां होली के पश्चात रंग पंचमी के दिन पुन: एक दूसरे पर रंग उड़ेले जाते हैं। गाजे-बाजे के साथ जुलूस की शक्ल में लोग निकलते हैं इस जुलूस को गेर कहा जाता है। इसमें सभी धर्म व जातियों के लोग शामिल होते हैं। पूरा इंदौर इस दिन विभिन्न रंगों में रंगा नजर आता है और सांस्कृतिक उत्सवों की धूम मची रहती है।

इसके अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी इस दिन धार्मिक सांस्कृतिक उत्सव आयोजित किये जाते हैं।

2018 में कब है रंग पंचमी

रंगपंचमी 2018 में अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार 6 मार्च को है। यह होली के पर्व का अंतिम दिन भी मानी जाता है।
February 17, 2018

Holi 2018: क्या है होली का महत्व और इतिहास, कैसे बनाएं त्योहार को खास

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‘रंगों के त्यौहार’ के तौर पर मशहूर होली फाल्गुन महीने में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। तेज संगीत और ढोल के बीच एक दूसरे पर रंग और पानी फेंका जाता है। भारत के अन्य त्यौहारों की तरह होली भी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। प्राचीन पौराणिक कथा के अनुसार होली से हिरण्यकश्यप की कहानी जुड़ी है।

होली का इतिहास

हिरण्यकश्यप प्राचीन भारत का एक राजा था जो कि राक्षस की तरह था। वह अपने छोटे भाई की मौत का बदला लेना चाहता था जिसे भगवान विष्णु ने मारा था। इसलिए ताकत पाने के लिए उसने सालों तक प्रार्थना की। आखिरकार उसे वरदान मिला। लेकिन इससे हिरण्यकश्यप खुद को भगवान समझने लगा और लोगों से खुद की भगवान की तरह पूजा करने को कहने लगा। इस दुष्ट राजा का एक बेटा था जिसका नाम प्रहलाद था और वह भगवान विष्णु का परम भक्त था।

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प्रहलाद ने अपने पिता का कहना कभी नहीं माना और वह भगवान विष्णु की पूजा करता रहा। बेटे द्वारा अपनी पूजा ना करने से नाराज उस राजा ने अपने बेटे को मारने का निर्णय किया। उसने अपनी बहन होलिका से कहा कि वो प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठ जाए क्योंकि होलिका आग में जल नहीं सकती थी। उनकी योजना प्रहलाद को जलाने की थी, लेकिन उनकी योजना सफल नहीं हो सकी क्योंकि प्रहलाद सारा समय भगवान विष्णु का नाम लेता रहा और बच गया पर होलिका जलकर राख हो गई। होलिका की ये हार बुराई के नष्ट होने का प्रतीक है। इसके बाद भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यप का वध कर दिया, लेकिन होली से होलिका की मौत की कहानी जुड़ी है। इसके चलते भारत के कुछ राज्यों में होली से एक दिन पहले बुराई के अंत के प्रतीक के तौर पर होली जलाई जाती है।

लेकिन रंग होली का भाग कैसे बने?

यह कहानी भगवान विष्णु के अवतार भगवान कृष्ण के समय तक जाती है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण रंगों से होली मनाते थे, इसलिए होली का यह तरीका लोकप्रिय हुआ। वे वृंदावन और गोकुल में अपने साथियों के साथ होली मनाते थे। वे पूरे गांव में मज़ाक भरी शैतानियां करते थे। आज भी वृंदावन जैसी मस्ती भरी होली कहीं नहीं मनाई जाती।

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होली वसंत का त्यौहार है और इसके आने पर सर्दियां खत्म होती हैं। कुछ हिस्सों में इस त्यौहार का संबंध वसंत की फसल पकने से भी है। किसान अच्छी फसल पैदा होने की खुशी में होली मनाते हैं। होली को ‘वसंत महोत्सव’ या ‘काम महोत्सव’ भी कहते हैं।

होली एक प्राचीन त्यौहार है

होली प्राचीन हिंदू त्यौहारों में से एक है और यह ईसा मसीह के जन्म के कई सदियों पहले से मनाया जा रहा है। होली का वर्णन जैमिनि के पूर्वमिमांसा सूत्र और कथक ग्रहय सूत्र में भी है।

प्राचीन भारत के मंदिरों की दीवारों पर भी होली की मूर्तियां बनी हैं। ऐसा ही 16वीं सदी का एक मंदिर विजयनगर की राजधानी हंपी में है। इस मंदिर में होली के कई दृश्य हैं जिसमें राजकुमार, राजकुमारी अपने दासों सहित एक दूसरे पर रंग लगा रहे हैं।

कई मध्ययुगीन चित्र, जैसे 16वीं सदी के अहमदनगर चित्र, मेवाड़ पेंटिंग, बूंदी के लघु चित्र, सब में अलग अलग तरह होली मनाते देखा जा सकता है।

होली के रंग

पहले होली के रंग टेसू या पलाश के फूलों से बनते थे और उन्हें गुलाल कहा जाता था। वो रंग त्वचा के लिए बहुत अच्छे होते थे क्योंकि उनमें कोई रसायन नहीं होता था। लेकिन समय के साथ रंगों की परिभाषा बदलती गई। आज के समय में लोग रंग के नाम पर कठोर रसायन का उपयोग करते हैं। इन खराब रंगों के चलते ही कई लोगों ने होली खेलना छोड़ दिया है। हमें इस पुराने त्यौहार को इसके सच्चे स्वरुप में ही मनाना चाहिए।

Source: mapsofindia

Friday, 16 February 2018

February 16, 2018

Chaitra Navratri Calendar 2018: चैत्र नवरात्र कलैन्डर 2018

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एक वर्ष में चार नवरात्र चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ महीने की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक नौ दिन के होते हैं। इनमें चैत्र और आश्विन नवरा‍त्रि ही मुख्य माने जाते हैं। इनमें भी देवी भक्त आश्विन नवरा‍त्रि का बहुत महत्व है। इनको यथाक्रम वासंती और शारदीय नवरात्र कहते हैं। चैत्र नवरात्र को वासन्ती नवरात्र भी कहा जाता है। चैत्र नवरात्र का प्रारम्भ चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रतिप्रदा से होता है। चैत्र में आने वाले नवरात्र में अपने कुल देवी-देवताओं की पूजा का विशेष प्रावधान माना गया है। चैत्र नवरात्रि प्रभु राम के जन्मोत्सव से जुड़ी है। चैत्र नवरात्र मां की शक्तियों को जगाने का आह्वान है ताकि हम संकटों, रोगों, दुश्मनों, आपदाओं का सामना कर सकें और उनसे हमारा बचाव हो सके।

Chaitra Navratri Calendar 2018


Navratri Day 1 (Amavasaya/Partipada) – March 18, 2018
  • Ghatsthapana
  • Shailaputri Puja
  • Chandra Darshan

Navratri Day 2 (Dwitiya) – March19, 2018
  • Brahamcharini Puja
  • Sindoor Dooj 

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Navratri Day 3 (Tritiya) – March 20, 2018
  • Chandraghanta Puja
  • Gauri teej
  • Saubhagya Teej

Navratri Day 4 (Chaturthi) – March 21, 2018
  • Kushmanda Puja
  • Varad Vinayaka Chauth

Navratri Day 5 (Panchami) – March 22, 2018
  • Skanda Mata Puja
  • Naag Puja
  • Upang Lalita Vrat
  • Skanda Shashthi

Navratri Day 6 (Shashthi) – March 23, 2018
  • Katyayani Puja
  • Yamuna Chatt

Navratri Day 7 (Saptami) – March 24, 2018
  • Kala Ratri Puja
  • Maha Saptami
  • Durga Ashtami
  • Maha Gauri Puja
  • Annapoorna Ashtami

Navratri Day 8 (Ashtami) – March 25, 2018
  • Ram Navami
  • Sandhi Puja

Navratri Day 9 (Navami)– March 26 2018
  • Navratri Parana
 
February 16, 2018

Chaitra Navratri 2018 : इस कारण इस बार भी 8 दिन की ही रहेगी चैत्र नवरात्रि

Chaitra Navratri 2018

अगले माह 18 मार्च से शुरू होने वाली चैत्र नवरात्रि लगातार चौथे साल भी 8 दिन की ही रहेगी। अष्टमी और नवमी तिथि 25 मार्च को एक ही दिन होने से यह स्थिति बनी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बीते 3 सालों की तरह इस साल भी 18 मार्च से चैत्र नवरात्रि का पर्व 8 दिनों का प्रारंभ होगा। पंडितों ने इसका कारण तिथियों में गड़बड़ होना माना है। दूसरी ओर नवरात्रि के पहले ही दिन गुड़ी पड़वा और विक्रम नवसंवत्सर 2075 का शुभारंभ होगा। इस नूतन वर्ष का नाम विरोधकृत रहेगा। रविवार को नव वर्ष का शुभारंभ होने पर इस दिन के स्वामी सूर्य वर्ष के राजा और शनि मंत्री होंगे। ज्योतिषाचार्य डॉ. दीपेश पाठक का कहना है कि दोनों ग्रह परस्पर विरोधी है। बावजूद इसके सूर्य के प्रभाव से दुनिया में भारत का वर्चस्व बढ़ेगा और शनि के मंत्री रहते न्याय व्यवस्था सुदृढ़ होगी और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन बढ़ेंगे। प्रतिपदा तिथि 1 दिन पूर्व 17 मार्च को शाम 7.41 बजे प्रारंभ हो जाएगी, लेकिन इसे अगले दिन रविवार को सूर्योदय काल से ही माना जाएगा। इसलिए पंडितों ने चैत्र नवरात्रि इसी दिन से प्रारंभ होना माना है।

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सर्वार्थ सिद्धि योग में नवरात्रि का होगा शुभारंभ

यह संयोग है कि नवरात्रि का शुभारंभ और समापन दोनों ही रविवार के दिन होंगे। पहले दिन नवरात्रि का शुभारंभ सर्वार्थसिद्धि योग में होगा। यह योग इस दिन सूर्योदय से रात 8.18 बजे तक रहेगा। समापन दिवस पर रामनवमी का शुभ मुहूर्त रहेगा।

नए वर्ष में मेघेष शुक्र और धनेश होंगे चंद्र

पंडित पाठक के अनुसार इसी दिन विक्रम नव संवत्सर 2075 का शुभारंभ होगा। इस बार नव वर्ष का नाम विरोधकृत रहेगा ।जिस दिन नूतन वर्ष का शुभारंभ होता है, उस दिन के स्वामी ग्रह को उस वर्ष का राजा माना जाता है। इसलिए इस वर्ष का स्वामी रविवार होने से सूर्य राजा, मंत्री शनि रहेंगे। इसे आकाशीय मंत्रिमंडल की संज्ञा दी जाती है। मेघेष शुक्र व धनेश चंद्र होंगे। इस कारण फसल अच्छी रहेगी, पर प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान भी बहुत होगा।

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कब-कब रही 8 दिन कि चैत्र नवरात्रि

लगातार यह चौथा साल है, जब चैत्र नवरात्रि 8 दिन के हो रहे है। इसके पूर्व वर्ष 2015 में 21 से 28 मार्च तक, 2016 में 8 से 15 मार्च तक, 2017 में 29 मार्च से 5 अप्रैल तक चेत्र नवरात्रि थी। इसके पूर्व वर्ष 2014 में नवरात्रि 31 मार्च से 8 अप्रैल तक पूरे 9 दिन की थी। पंडित पाठक के अनुसार जब दो तिथियां एक ही दिन हो जाती है तब ऐसी स्थिति बनती है इस वर्ष नवरात्रि का शुभारंभ 18 मार्च को होगा, वही समापन 25 मार्च को होगा। इसमें आखिरी दिन अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन रहेगी।

Source:Jagran

Tuesday, 13 February 2018

February 13, 2018

MahaShivratri 2018: व्रत 13 को रखें या 14 फरवरी को, ज्ञानी पंडितों ने बताया कब रहेगा शुभ

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अगर आप अभी भी 13 या 14 फरवरी को शिवरात्रि मनाने को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं, तो ये खबर पढ़िए आपकी समस्या हल हो जाएगी।

इसबार महाशिवरात्रि 13 फरवरी को है। मंगलवार की रात 10 बजकर 35 मिनट पर चतुर्दशी तिथि का शुभारंभ होगा। 14 फरवरी की रात 12 बजकर 46 मिनट तक चतुर्दशी रहेगा। यह कहना है चंडीगढ़ के सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का।

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13 को मनाने के पीछे का कारण बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि शिवरात्रि में चतुर्दशी रात्रि को यदि अष्टम मुहूर्त में आ जाता है तो शिवरात्रि का व्रत उसी तिथि में होता है। 13 फरवरी की रात 11 बजकर 46 मिनट से अष्टम मुहूर्त प्रारंभ रहेगा जो पूरी रात रहेगा। 14 फरवरी को रात 12 बजकर 46 मिनट के बाद अष्टम मुहूर्त मिलता है इसलिए महाशिवरात्रि का पर्व 13 फरवरी को ही होगा।

व्रत किस दिन किया जाए ?
ज्योतिषों के अनुसार, 13 फरवरी को प्रदोष के साथ मध्य रात्रि में चतुर्दशी है, 13 फरवरी को व्रत रखना फलदायक होगा।

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देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे और सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के पुजारी पंडित श्याम सुंदर शास्त्री ने बताया कि महाशिवरात्रि पर शिवालयों में चार प्रहर की पूजा होगी।

13 फरवरी को शाम छह बजकर पांच मिनट पर प्रथम पूजा होगी। रात नौ बजकर 30 मिनट के बाद दूसरी पूजा, रात करीब एक बजे से तीसरी और सुबह चार बजे से चौथी चार प्रहर की पूजा होगी।

जय श्रीराम ज्योतिष केंद्र सेक्टर-15 के प्रमुख स्वामी राम बहादु़र मिश्र का कहना है कि महाशिवरात्रि को भगवान शिव पर पर बेलपत्र के अलावा गंगाजल, गन्ने के रस, पंचामृत और कुशा के जल से भगवान का अभिषेक किया जाता है। इससे विभिन्न मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

Thursday, 8 February 2018

February 08, 2018

Mahashivratri 2018: कालसर्प दोष से मुक्ति के उपाय, पूजा करते समय भूलकर भी न करें ये 8 काम

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इस बार महाशिवरात्रि कई जगह 13 फरवरी और कई जगह 14 फरवरी दो दिन मनाई जा रही है। भगवान शिव के मंदिरों में भक्त सुबह से लाइन लगाकर खड़े हो जाते हैं। कहा जाता है कि इस दिन भोले शंकर और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन शिवलिंग पर  भगवान शिव को प्रिय चीजें चढ़ाते हैं। इसके अलावा कुंवारी कन्याएं अच्चा पति पाने के लिए इस दिन विशेष पूजा अर्चना करती हैं। यही नहीं इस दिन कालसर्पयोग से मुक्ति के लिए भी विशेष उपाय किए जाते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं

कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए इस दिन विशेष पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए सुबह शिव मंदिर में जाएं और भगवान शिव को धतूरा चढ़ाएं। इसके बाद ओम नमः शिवाय का जाप करें। यह भी कहा जाता है कि इस दिन नाग-नागिन के जोड़े को शिवलिंग पर अर्पित करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।

अगर किसी तरह की शारीरिक परेशानी है तो किसी योग्य पड़ित से महामृत्युंजय मंत्र का जाप करवाना चाहिए। इससे शारीरिक परेशानी समाप्त हो जाती है। इसके अलावा अगर घर में अशांति रहती है तो पंचमुखी रुद्राक्ष की माला लेकर ओम नमः शिवाय का जाप करें।

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महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग में शिव चारों पहर रहते हैं। जैसे आप हर पहर में अलग-अलग खाना पसंद करते हैं, वैसे ही चारों पहर में शिव पूजा के भी अलग अलग नियम हैं। चंडीगढ़ में सेक्टर 30 स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र बताते हैं कि अलग-अलग प्रहर में भोलेनाथ की पूजा के लिए अलग-अलग चीजों का प्रयोग करना चाहिए। अगर आप सूर्योदय से तीन घंटे के अंदर भगवान शिव की पूजा करने जा रहे हैं तो तिल, जौ, कमल एवं बेल पत्र से भगवान शिव की पूजा करें।
सूर्योदय के तीन घंटे के बाद अगर आप पूजा करने जा रहे हैं तो बिजौरे का फल, नींबू एवं खीर के साथ भगवान भोलेनाथ की पूजा करें। भगवान भोले नाथ को भांग और धतूरा भी चढ़ा सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें सूर्योदय के छह घंटे के अंदर इन चीजों से शिव जी की पूजा करें। सूर्योदय के छह घंटे के बाद से नौ घंटे के अंदर आप पूजा करने जा रहे हैं तो तिल, मालपुआ, अनार एवं कपूर से शिव जी की पूजा करें।

सूर्योदय के नौ घंटे के बाद अगर आप पूजा करने जा रहे हैं तो उड़द, जौ, मूंग, बेलपत्र, शंखपुष्पी से भोलनाथ की पूजा करें। अगर आपके लिए प्रहर के अनुसार सामग्री जुटाना कठिन हो तो कोई बात नहीं। भगवान शिव को गंगाजल से स्नान करवाकर में बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित करें और 108 बार शिव पंचाक्षरी मंत्र नमः शिवाय का जप करें। इससे ही भोलेनाथ प्रसन्न हो जाएंगे। बस आपकी भक्ति सच्ची होनी चाहिए।

काले रंग के कपड़े ना पहनें
महाशिवरात्रि का त्योहार शिवभक्तों के लिए बहुत महत्व रखता है। लेकिन भूलवश शिव जी को प्रसन्न के लिए ऐसी कुछ गलतियां कर देते हैं जिससे उनकी पूजा पूरी नहीं हो पाती है। पहली बात, शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को यदि प्रसन्न करना चाहते हैं तो इस दिन काले रंग के कपड़े ना पहनें। कहा जाता है की भगवान शिव को काला रंग पसन्द नहीं है, जिसके कारण इस दिन काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए।

ये सभी चीजें भूलकर भी न चढ़ाएं
भगवान शिव को सफेद फूल बहुत पसंद होता है, लेकिन केतकी का फूल सफेद होने के बावजूद भोलेनाथ की पूजा में नहीं चढ़ाना चाहिए। भगवान शिव की पूजा करते समय शंख से जल अर्पित नहीं करना चाहिए। भगवान शिव की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित माना गया है। शिव की पूजा में तिल नहीं चढ़ाया जाता है। तिल भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ माना जाता है, इसलिए भगवान विष्णु को तिल अर्पित किया जाता है लेकिन शिव जी को नहीं चढ़ता है।

भगवान भोलेनाथ को ये भी पसंद नहीं
भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी टूटे हुए चावल नहीं चढ़ाया जाना चाहिए। शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए। शिव प्रतिमा पर नारियल चढ़ा सकते हैं, लेकिन नारियल का पानी नहीं। हल्दी और कुमकुम उत्पत्ति के प्रतीक हैं, इसलिए पूजन में इनका प्रयोग नहीं करना चाहिए। बिल्व पत्र के तीनों पत्ते पूरे होने चाहिएं, खंडित पत्र कभी न चढ़ाएं। चावल सफेद रंग के साबुत होने चाहिएं, टूटे हुए चावलों का पूजा में निषेध है। फूल बासी एवं मुरझाए हुए न हों।

शिवरात्रि के दिन इन लोगों का अपमान न करें
ध्यान रखें कि किसी बुजुर्ग व्यक्ति, गुरु, भाई-बहन, जीवन साथी, माता-पिता, मित्र और ज्ञानी लोगों का अपमान गलती से भी न करें। वैसे तो किसी का भी अपमान कभी भी नहीं करना चाहिए, लेकिन शिवरात्रि पर इस बात का पालन अवश्य होना चाहिए। अन्यथा शिवजी ऐसे लोगों से प्रसन्न नहीं होते हैं जो यहां बताए गए लोगों का अपमान करते हैं। इसके अलावा हो सकते तो बुरे विचार मन न आने दें। मांसाहार यानी नॉनवेज से बचें।


सुबह देर तक नहीं सोना चाहिए
शिवरात्रि के दिन पूजा के लिए सुबह-सुबह का समय सबसे अच्छा रहता है। अगर शिव कृपा चाहिए तो सुबह बिस्तर जल्दी छोड़ देना चाहिए। जल्दी उठें और स्नान आदि कार्य करने के बाद शिवजी की पूजा करें। अगर देर तक सोते रहेंगे तो इससे आलस्य बढ़ेगा। सुबह जल्दी उठने से वातावरण से स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं। सुबह के समय मन शांत रहता है और इस वजह से पूजा पूरी एकाग्रता से हो पाती है। एकाग्रता से की गई पूजा बहुत जल्दी शुभ फल प्रदान करती है।
February 08, 2018

आपके लिए कैसा लव पार्टनर रहेगा भाग्यशाली? बर्थ डेट से तुरंत हो जाएगा मालूम

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कुछ ही दिनों बाद 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे है। ये दिन प्रेमियों को समर्पित है। अगर आप भी अपने लिए लव पार्टनर ढूंढ रहे हैं तो आपकी बर्थ डेट से ये मालूम हो सकता है कि आपके लिए कैसा पार्टनर भाग्यशाली हो सकता है।

अंक ज्योतिष में व्यक्ति की बर्थ डेट के आधार पर भविष्य, प्रेम प्रसंग और जीवन से जुड़ी अन्य बातों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

बर्थ डेट से ऐसे जानिए आपका अंक
अंक शास्त्र में 1 से 9 तक अंक बताए गए हैं। इन्हीं अंकों से खास बातें मालूम की जाती हैं। यदि किसी व्यक्ति की जन्म तारीख 1 से 9 के बीच है तो वही तारीख व्यक्ति का अंक होती है। यदि 2 अंकों में जन्म तारीख है यानी 10 से 31 के बीच है तो तारीख के दोनों अंकों को जोड़ लेना चाहिए। जैसे यदि किसी व्यक्ति की जन्म तारीख 26 है तो उसका अंक होगा 8 (2+6 = 8). इसी प्रकार यदि किसी जन्म तारीख 29 है तो उसका अंक होगा 2 (2+9 = 11, 1+1 = 2)

अंक 1
इस अंक वालों के लिए 2,10,7,16,25,11,20,28 या 29 तारीख को जन्म लेने वाले भाग्यशाली होते हैं।

अंक 2
इस अंक वालों के लिए 2,11,7,16,1,10,4 या13 तारीख को जन्म लेने वाले अच्छे प्रेमी माने गए हैं।

अंक 3
किसी भी महीने की दिनांक 3,12,15,18,9,27,24,6 या 9 को जन्म लेने वाले लोग अंक 3 वालों के लिए अच्छे प्रेमी हो सकते हैं।

अंक 4
1, 2, 7, 8,11,16,17,26 या 25, इनमें से किसी भी तारीख को जन्म लेने वाले लोग अंक 4 वालों के लिए श्रेष्ठ प्रेमी सिद्ध होते हैं।

अंक 5
5,14, 15,16,11, 23, 6 या 2 तारीख को जन्म लेने वाले लोग नंबर 5 वालों के लिए शुभ और अच्छे जीवनसाथी होते हैं।

अंक 6
इस नंबर वालों के लिए 6,15,12,3,18 9 या 27 में से किसी भी दिन जन्म लेने वाले लोग परफेक्ट पार्टनर होते हैं।

अंक 7
अंक 7 वालों के लिए 1, 2, 4, 7,10,11,16 या 13 तारीख को जन्म लेने वाले लोग अच्छे जीवनसाथी हो सकते हैं।

अंक 8
इनके लिए 2, 4, 8,11,13,16,26 या 17. इन दिनों में जन्म लेने वाले अच्छे जीवनसाथी होते हैं।

अंक 9
इस नंबर वालों के लिए 3, 6, 9,15,12,27 या 18 तारीख को में जन्म लेने वाले लोग अच्छे प्रेमी हो सकते हैं।

Tuesday, 6 February 2018

February 06, 2018

सौभाग्य और ऐश्वर्य के लिए आजमाएं हनुमान जी के यह उपाय

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हनुमानजी के मंत्रों का प्रयोग किसी भी शुभ मुहूर्त में मंगलवार या शनिवार को किया जा सकता है। जो व्यक्ति नौकरी, व्यवसाय, करियर, प्यार, सेहत और प्रगति की मनोकामना रखता है, उसके लिए यह प्रयोग वरदान साबित हो सकता है। अत: जिस किसी को भी अपने जीवन में हर तरफ से सफलता पाना है, उसे यह उपाय अवश्‍य करना चाहिए। आइए जानें..

रोजगार-ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए हनुमत् गायत्री मंत्र की यथाशक्ति 11-21-51 माला करें। देशकाल के अनुसार हवन करें। मंत्र सिद्ध हो जाएगा। पश्चात नित्य 1 माला जपें।

1. ॐ नम: शिवाय ॐ हं हनुमते श्री रामचन्द्राय नम:।
2. ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा।

3. ॐ नमो भगवते हनुमते महारुद्राय हुं फट स्वाहा

4. ॐ हं पवन नंदनाय स्वाहा
5. ॐ नमो हरिमर्कट मर्कटाय स्वाहा।
6. ॐ ह्रीं आंजेनाय विद्महे, पवनपुत्राय
धीमहि तन्नो: हनुमान प्रचोद्यात्।।

पैसों की तंगी से बचने का उपाय

यदि कोई व्यक्ति पैसों की तंगी का सामना कर रहा है तो उसे प्रति मंगलवार और शनिवार को पीपल के 11 पत्तों का यह उपाय अपनाना चाहिए।

इसके तहत सप्ताह के प्रति मंगलवार और शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त में उठें। इसके बाद नित्य कर्मों से निवृत्त होकर किसी पीपल के पेड़ से 11 पत्ते तोड़ लें। ध्यान रखें पत्ते पूरे होने चाहिए, कहीं से टूटे या खंडित नहीं होने चाहिए। इन 11 पत्तों पर स्वच्छ जल में कुमकुम या अष्टगंध या चंदन मिलाकर इससे श्रीराम का नाम लिखें। 

नाम लिखते समय हनुमान चालीसा का पाठ करें

जब सभी पत्तों पर श्रीराम नाम लिख लें, उसके बाद राम नाम लिखे हुए इन पत्तों की एक माला बनाएं। इस माला को किसी भी हनुमानजी के मंदिर जाकर वहां बजरंगबली को अर्पित करें। इस प्रकार यह उपाय करते रहें। कुछ समय में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे। ध्यान रखें उपाय करने वाला भक्त किसी भी प्रकार के अधार्मिक कार्य न करें। अन्यथा इस उपाय का प्रभाव निष्फल हो जाएगा। उचित लाभ प्राप्त नहीं हो सकेगा। साथ ही अपने कार्य और कर्तव्य के प्रति ईमानदार रहें।
February 06, 2018

आज का राशिफल, 06 फरवरी 2018: इन राशियों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा

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मेष(Aries):शुक्र आपके ग्यारहवें स्थान पर गोचर करेंगे। शुक्र के इस गोचर से 2 मार्च तक आपके स्वभाव में बार-बार बदलाव आ सकते हैं। आपको बचपन की कोई बात याद आ सकती है। साथ ही इस दौरान आप दूसरों से छिपाकर काम करने की कोशिश करेंगे। हालांकि इस बीच आपको धन लाभ भी होगा और आपके चेहरे पर निखार आयेगा। 

वृषभ(Taurus): आज दिनभर आनंद छाया रहेगा। अपने कार्य में व्यवस्थितरूप से आप आगे बढ़ पाएंगे और योजना के अनुसार कार्य भी कर पाएंगे। अपूर्ण कार्यो को सफलतापूर्वक पूर्ण कर पाएंगे। कार्यालय में सहकर्मियों से सहयोग मिलेगा। ससुराल या मायके की ओर से शुभ समाचार मिलने की संभावना अधिक है। मानसिकरूप से भी आप आनंदित रह पाएंगे। स्वास्थ्य आज अच्छा रहेगा।

मिथुन(Gemini): दिन मध्यम रहेगा। नए कार्य का प्रारंभ न करने की गणेशजी की सलाह है। जीवनसाथी और संतान के विषय में चिंता रहेगी जिसके कारण मन में उद्वेग बना रहेगा। पेट में अजीर्णता रहने के कारण स्वास्थ्य भी कुछ नरम-गरम रह सकता है। खर्च की मात्रा आज कुछ अधिक रहेगी। विद्यार्थियों के लिए समय अनुकूल है। संभव हो तो वाद-विवाद टालिएगा, किसी के साथ मनमुटाव के प्रसंग उपस्थित न हो ध्यान रखिएगा।

कर्क(Cancer): आज आप संभलकर चलिएगा। छाती में पीड़ा अथवा अन्य विकार से कष्ट की अनुभूति हो सकती है। घर में सदस्यों के साथ उग्र चर्चा या वाद-विवाद हो जाने से मानसिक परेशानी हो सकती है। धन का व्यय अधिक हो सकता है। सामाजिकरूप से मानहानि का प्रसंग उपस्थित न हो इसका ध्यान रखिएगा। अनिद्रा सताएगी।

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सिंह(Leo): कार्य में सफलता और प्रतिस्पर्धियों पर विजय मिलने से आपके मन में प्रसन्नता छाई रहेगी ऐसा गणेशजी कहते हैं। भाई-बहनों के साथ संबंधो में मीठास भी बनी रहेगी। मित्रों और स्नेहीजनो के साथ किसी रमणीय पर्यटनस्थल पर घूमने-फिरने का आनंद उठा सकेंगे। आज के दिन आप का आरोग्य भी अच्छा रहेगा। आर्थिकरुप से आपको लाभ होगा। नया कार्य प्रारंभ करने के लिए आज का दिन शुभ है।

कन्या(Virgo): आपके लिए दिन शुभ रहेगा। वाणी की मधुरता से दूसरे लोगों के मन पर अपनी सकारात्मक छाप छोड़ सकेंगे। पारिवारिक वातावरण अच्छा रहेगा। वाणी पर संयम बरतने से वाद-विवाद की संभावना कम हो जाएगी। आर्थिक कार्य भी आज सुखपूर्वक संपन्न होंगे। नकारात्मक विचारों से आप दूर रहिएगा। मित्रों और स्नेहीजनों से मुलाकात होगी। छोटा प्रवास हो सकता है।

तुला(Libra): शुक्र आपके पांचवें स्थान पर गोचर करेंगे। शुक्र के इस गोचर से धर्म के प्रति आपकी आस्था बढ़ेगी और परिवार के प्रति प्यार बढ़ेगा। साथ ही चारों तरफ से आपकी तरक्की ही तरक्की होगी, संतान पक्ष से लाभ और जीवनसाथी से प्यार मिलेगा। इसके अलावा आपके धन में वृद्धि होगी।

वृश्चिक(Scorpio): आज के दिन मौज-शौक और मनोरंजन के पीछे खर्च होगा। स्वास्थ्य नरम रह सकता है। मन के अंदर चिंता की भावना रहेगी। दुर्घटना के प्रति सजग रहें। कुटुंबीजनों और सगे-सम्बंधियों के साथ गलतफहमी या अनबन संभव है। कोर्ट-कचहरी संबंधी कार्यों में सावधानी रखें।

धनु(Sagittarius): आर्थिक लाभ और सामाजिक प्रतिष्ठा मिलने के साथ आप पारिवारिक जीवन में भी सुख-संतोष की भावना अनुभव करेंगे। आय में वृद्धि और व्यापार में लाभ मिलेगा। मनपसंद पात्र के साथ सुखद क्षण गुजारेंगे। मित्रों के साथ रमणीय स्थानों में पर्यटन का आयोजन होगा। अविवाहितों के लिए वैवाहिक योग बनेंगे। जीवनसाथी तथा संतान द्वारा लाभ प्राप्ति की संभावना है।

मकर(Capricorn): परिवार और संतानों के विषय में आपको आनंद के साथ-साथ संतोष का भी अनुभव होगा। मित्रों और स्नेहीजनों के साथ हुई भेंट से आपका मन प्रसन्न हो उठेगा। व्यापार में धन की उगाही के लिए बाहर जाना पड़ सकता है। व्यावसायिक क्षेत्र में धन तथा मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। उच्च अधिकारियों की प्रसन्नता आप पर बनी रहेगी। व्यवसाय में भी आपको लाभ की पूरी संभावना है।

कुंभ(Aquarius): प्रतिस्पर्धियों के साथ वाद-विवाद न करने की सलाह गणेशजी देते हैं। शारीरिक रूप से अस्वस्थता बनी रह सकती है। शिथिलता और आलस्य बना रह सकता है। मानसिकरूप से प्रसन्नता बनी रहेगी। व्यवसाय में उच्चाधिकारियों के साथ कार्य करते समय संभलकर रहें। आमोद-प्रमोद के पीछे आज धन खर्च हो सकता है।

मीन(Pisces): शुक्र आपके बारहवें स्थान पर गोचर करेंगे। शुक्र के इस गोचर से कविता लेखन में आपकी रुचि बढ़ेगी। आपको संतान का सुख मिलेगा। साथ ही रातों को आराम मिलेगा और धन की प्राप्ति होगी। लेकिन इस दौरान किसी और से मदद की अपेक्षा न रखें और अपनी सेहत का ख्याल रखें।

Monday, 5 February 2018

February 05, 2018

आज का राशिफल, 05 फरवरी 2018: कर्क राशि वाले रखें सेहत का ख्याल, इस राशि के जातक जा सकते हैं विदेश


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मेष – दिन परोपकार में बीतेगा। मानसिकरूप से कार्यभार अधिक रहेगा। सत्कार्य करने के फलस्वरूप शारीरिक और मानसिक रूप से स्फूर्ति का अनुभव करेंगे। आर्थिक लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर आज का दिन शांति, सद्भाव और सुख से बीतेगा।

वृषभ – आज यात्रा प्रवास पर नहीं जाएं। संतानों के सम्बंध में समस्याएँ खड़ी होंगी। घर में सुख-शांति का माहौल रहेगा। वाद-विवाद में भाग लेने से बचें। स्वाभिमान भंग न हो इसका ध्यान रखें। शेयर- सट्टा का प्रलोभन हानि पहुंचा सकता है।

मिथुन – भावना और संवेदनशीलता में बहकर स्त्रीवर्ग से संबंध न बांधने की गणेशजी सलाह दे रहे हैं। स्वास्थ्य संबंधी कोई चिंता परेशान करेगी, अनिर्णय की स्थिति बनी रह सकती है।

कर्क – आज का दिन अच्छा रहेगा। बच्चों के साथ समय बीतेगा। नकारात्मक विचार को दूर रहें। स्वास्थ्य खराब हो सकता है। बाहर घूमने या मूवी देखने जा सकते हैं। वाणी पर संयम रखें। धार्मिक कार्यों के पीछे खर्च होगा।

सिंह – अनैतिक कार्य से बदनामी होने का योग है। तबीयत के पीछे धन खर्च होने की संभावना है। आपकी विदेश यात्रा के भी संकेत हैं। इष्टदेव का नाम स्मरण और आध्यात्मिक विचार आपका सच्चा मार्गदर्शन करेंगे। पारिवारिक सदस्यों के साथ मनमुटाव होगा। गलत कार्य करने से बचें। स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा।

कन्या – गणेशजी कहते हैं कि आप बातों की चतुराई से लोगों को आकर्षित कर सकते हैं। सामाजिक संपर्क से आज आपको लाभ मिलेगा। वैचारिकरूप से समृद्धि बढेगी। शरीर, स्वास्थ और मन प्रसन्न रहेगा।


तुला – पैसे की लेन-देन या आर्थिक व्यवहार ना करें। विदेश से शुभ समाचार मिल सकता है। आज आपका मन विचलित रहेगा। आज के दिन नकारात्मकता पर ध्यान ना दें। धार्मिक कार्यों के पीछे धन खर्च होगा।

वृश्चिक– दूसरों से असहमती हो सकती है। धन खर्च हो सकता है। जिंदगी सही रास्ते पर है। आज का दिन खुशी से बीतेगा। मन शांत रहेगा। पुरानी समस्याएं हल हो सकती है। कार्य में सफलता और यश मिलने से उत्साह बढ़ेगा।

धनु – आज का दिन आपके लिए शुभ है। आज आप आर्थिक मामलों में उचित योजना बना सकेंगे। अन्य लोगों की सहायता करने का प्रयत्न करेंगे। हर एक कार्य सफलतापूर्वक संपन्न होगा। व्यापार-विषयक योजना बनेगी।

मकर – मन की उलझन हल होगी। भाई- बहनों के साथ मेल-जोल रहेगा। नए कार्यों के आरंभ के लिए तैयार रहें। सफलता मिलेगी। पुरानी चीजें मिलने से खुशी होगी। व्यापार- धंधे में लाभ होगा। आप सभी कार्य तन-मन से स्वस्थ रहकर करेंगे। शेयर- सट्टे में लगाए हुए पैसे लाभ दिलवाएंगे।

कुंभ – विदेश जाने के इच्छुक लोगों के प्रयास सफल होंगे। पारिवारिक सदस्यों और पदाधिकारियों के साथ सुखमय दिन गुजरेगा।धार्मिक कार्यों या यात्रा के पीछे धन खर्च होगा। आपकी भाग्य वृद्धि के साथ आकस्मिक धन लाभ होगा। नौकरी वालों को लाभ मिलेगा।

मीन – आज किसी यात्रा पर जा सकते हैं। नए कार्यों में सफलता मिलेगी। आनंद- उत्साह और तन-मन की प्रसन्नता आपके दिन में चेतना और स्फूर्ति का संचार करेंगे। दांपत्यजीवन आनंदमय रहेगा।
February 05, 2018

Khatu Shyam Baba Temple History in Hindi खाटूश्यामजी की कहानी और खाटूश्याम बाबा मन्दिर का इतिहास [VIDEO]

Khatu Shyam Baba Temple History in Hindi

Khatu Shyam Baba Temple खाटूश्यामजी राजस्थान के सीकर जिले में स्तिथ एक पवित्र मन्दिर है जो महाभारत काल में बना मन्दिर माना जाता है | Khatu Shyam Baba खाटूश्यामजी को भगवान श्री कृष्ण का अवतार माना जाता है जिसकी देश के करोड़ो लोग पूजा करते है | खाटूश्यामजी मन्दिर में हर वक़्त भक्तो का ताँता लगा रहता है और विशेष रूप से होली से कुछ दिन पहले सीकर जिले में खाटूश्यामजी का विशाल मेला आयोजित होता है जिसमे राजस्थान सहित अन्य प्रदेशो के श्रुधालू भी बाबा के दर्शन करने आते है | Khatu Shyam Baba Temple खाटूश्यामजी मन्दिर के इतिहास को जानने से पहले आइये आपको Khatu Shyam Baba खाटूश्यामजी की कहानी के बारे में बताते है |

Khatu Shyam Baba Story in Hindi 

खाटूश्यामजी की कहानी महाभारत काल से शुरू होती है जिस वक़्त उनका नाम बर्बरीक था | बर्बरीक , भीम का पौत्र और घटोत्कच का पुत्र था | बर्बरीक बचपन से ही बहुत वीर योद्धा था जिसमे अपनी माँ से युद्ध कला सीखी थी | भगवान शिव ने बर्बरीक से प्रस्सन होकर उसे तीन अचूक बाण दिए जिसकी वजह से बर्बरीक को “तीन बाण धारी ” कहा जाने लगा | उसके बाद अग्नि देव ने उन्हें एक तीर दिया जिससे वो तीनो लोको पर विजय प्राप्त कर सकता था | जब बर्बरीक को पता चला कि पांड्वो और कौरवो के बीच युद्ध अटल है तो वो महाभारत युद्ध का साक्षी बनना चाहता था |उसने अपनी माँ को वचन दिया कि वो युद्ध में भाग लेने की इच्छा रखता है और वो हारने वाली सेना की तरफ से लड़ना चाहटा है | इसके बाद बर्बरीक वो नील घोड़े पर सवार होकर तीन बाण लेकर रवाना हो गया |

रास्ते में श्री कृष्ण ने ब्राह्मण का वेश धारण कर बर्बरीक को रोका ताकि वो उसकी शक्ति की परीक्षा ले सके |  उन्होंने बर्बरीक को उकसाया कि वो वो केवल तीन तीरों से युद्ध कैसे लड़ेगा | इस बात का जवाब देते हुए बर्बरीक ने कहा कि उसका एक बाण ही दुश्मन की सेना के लिए काफी है और वो वापस अपने तरकश में लौट आएगा | बर्बरीक ने तब श्रीकृष्ण को बताया कि उसके पहले तीर से वो निशान बनाएगा जिसको उसे समाप्त करना है और उसके बाद तीसरा तीर छोड़ने पर उसके निशान वाली सभी चीजे तबाह हो जायेगी | उसके बाद वो तीर वापस तरकश में लौट आएगा | अगर वो दुसरे तीर का प्रयोग करेगा तो पहले तीर से जो भी निशान लगाये थे वो सभी चीजे सुरक्षित हो जायेगी | कुल मिलाकर वो एक तीर से तबाही और एक तीर से रक्षा कर सकता था |
जब श्री कृष्ण को बर्बरीक की शक्ति का पता चला तो उन्होंने बर्बरीक को चुनौती दी कि अगर वो जिस पीपल के पेड़ के नीचे खड़ा है उसके सभी पत्तो को आपस में बाँध देगा तो उनको  बर्बरीक की शक्ति पर विश्वास हो जाएगा | बर्बरीक ने चुनौती स्वीकार कर ली उअर तीर छोड़ने से पहले ध्यान लगाने के लिए आँखे बंद कर दी | तब श्री कृष्ण से बर्बरीक को पता लगे बिना , पीपल की एक पपत्ती को तोडकर अपने पैरो के नीचे छुपा लिया | जब बर्बरीक ने पहला तीर छोड़ा तो सभी पत्तियों और निशान हो गये और अंत में सभी पत्ते श्री कृष्ण के पैरो के आस पास घुमने लगे |

अब श्री कृष्ण ने बर्बरीक से पूछा कि “तीर भी मेरे पैरो के चारो ओर क्यों घूम रहा है ? ” इस पर बर्बरीक ने जवाब दिया कि “शायद आपके पैरो के नीचे एक पत्ती रह गयी है और ये तीर उस छुपी हुयी पत्ती को निशाना बनाने के लिए पैरो के चारो ओर घूम रहा है ” | बर्बरीक ने श्री कृष्ण से कहा “ब्राह्मण राज आप अपना पैर यहा से हटा लीजिये वरना ये तीर आपके पैर को भेद देगा “| श्री कुष्ण के पैर हटते ही उस छुपी हुयी पत्ती ;पर भी निशान हो गया | उसके बाद बर्बरीक के तीसरे तीर से सारी पत्तिय इकठी हो गयी और आपस में बंध गयी | तब श्री कृष्ण ने समझ लिया कि बर्बरीक के तीर अचूक है लेकिन अपने निशाने के बारे में खुद बर्बरीक को भी पता नही रहता है |
इस घटना से श्री कृष्ण ने ये निष्कर्ष निकाला कि असली रण भूमि में अगर श्रीकृष्ण अगर पांडव भाइयो को अलग अलग कर देंगे और उन्हें कही छिपा देंगे ताकि वो बर्बरीक का शिकार होने से बच जाए तब भी बर्बरीक के तीरों से कोई नही बच पायेगा | इस प्रकार श्री कुष्ण को बर्बरीक की शक्ति का पता चल गया कि उनके अचूक तीरों से कोई नही बच सकता है | तब श्री कृष्ण ने युद्ध में उनकी तरफ से लड़ने का प्रस्ताव दिया | बर्बरीक ने अपनी गुप्त बात उनको बताई कि उसने अपनी माता को वचन दिया है कि वो केवल हार रही सेना की तरफ से लड़ेंगे |

कौरवो को भी बर्बरीक के इस वचन के बारे में पता था इसलिए उन्होंने युद्ध के पहले दिन अपनी ग्यारह अक्षौनी सेना को नही उतारा था ताकि जब कौरवो की सेना पहले दिन पांड्वो से हार जाए तो बर्बरीक कौरवो का सहयोग कर पांड्वो का विनाश कर देगा | इस प्रकार जब वो कौरवो की तरफ से लड़ेगा तो पांड्वो की लड़ रही सेना कमजोर हो जायेगी उसके बाद वो पांड्वो की सेना में चला जाएगा | इस तरह वो दोनों सेनाओ में घूमता रहेगा | श्री कृष्ण को अब लगने लगा था कि अगर बर्बरीक इस युद्ध में शामिल हुआ तो कोई भी सेना नही जीत पायेगी और अंत में कौरव-पांडव दोनों का विनाश हो जायेगा और केवल बर्बरीक शेष रह जाएगा | तब श्री कृष्ण ने विचार किया कि बर्बरीक को रोकने के लिए उनको बर्बरीक से उसकी जान मांगनी होगी |

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तब श्री कृष्ण ने बर्बरीक से दान की मांग की तब बर्बरीक ने कहा “प्रभु आपकी जो इच्छा हो मै आपको देने को तैयार हु ” | श्री कृष्ण ने दान में बर्बरीक का सिर माँगा | बर्बरीक भगवान श्री कृष्ण की अनोखी मांग को सुनकर चकित रहा गया और इस अनोखी मांग पर उस ब्राह्मण को अपनी असली पहचान बताने को कहा | श्री कृष्ण ने बर्बरीक को अपना विराट रूप दिखाया और बर्बरीक उसे देखकर धन्य हो गया | श्री कृष्ण ने तब बर्बरीक को समझाया कि “रण भूमि में युद्ध से पहले सबसे वीर क्षत्रिय की बलि देनी पडती है इसलिए मै तुमसे तुम्हारा सिर दान में मांग रहा हु और मै तुमको इस धरती का सबसे वीर क्षत्रिय होने का गौरव देता हु ” |

अपने वादे को निभाते हुए श्रीकृष्ण के आदेश पर बर्बरीक ने अपना सिर दान में दे दिया | ये घटना फागुन महीने के शुक्ल पक्ष के 12 वे दिन हुयी थी | अपनी जान देने से पहले बर्बरीक ने श्री कृष्ण ने अपनी एक इच्छा जाहिर की वो महाभारत युद्ध को अपनी आँखों से देखना चाहता है | श्री कृष्ण ने उसकी ये इच्छा पुरी की और सिर अलग करने के बाद उनके सिर को एक उची पहाडी पर रख दिया जहा से रण भूमि साफ नजर आती थी | वही से बर्बरीक के सिर ने पूरा महाभारत युद्ध देखा था |

 
युद्ध खत्म होने पर जब जीते हुए पांडव भाइयो ने एक दुसरे से बहस करना शूर कर दिया कि युद्ध की जीत का जिम्मेदार कौन है तो श्री कृष्ण ने बर्बरीक के सिर को इस निर्णय लेने को कहा कि किसकी वजह से पांडव युद्ध जीते | तब बर्बरीक के सिर ने सुझाव दिया कि श्री कृष्ण अकेल ऐसे है जिनकी वजह से महाभारत युद्ध में पांड्वो की जीत हुयी क्योंकि उनकी रणनीति की इस युद्ध में अहम भूमिका थी और इस धर्मं युद्ध में धर्म की जीत हुयी |

ये Khatu Shyam Baba मन्दिर रूप सिंह चौहान ने 1027 ईस्वी में बनवाया था जब उनकी पत्नी को भी जमीन में दफन उस सिर का सपना आया था | वो जगह जहा से उस प्रतिमा को निकाला गया उसे श्याम कुंड कहते है | 1720 ईस्वी में दीवान आभासिंह ने इस मन्दिर का पुर्ननिर्माण करवाया तब से ये Khatu Shyam Baba मन्दिर उसी स्थिथि में है और अज भी उस प्रतिमा की चमक बरकरार है | खाटूश्यामजी आज कई घरो के पारिवारिक देवता है | उनका एक नया मन्दिर अहमदाबाद में भी बनवया गया है जिसे बलिया देव कहा जाता है जहा पर पर नवजात शिशुओ को आशीर्वाद दिलाने के लिए माता पिता लेकर आते है |

Source: gajabkhabar