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Monday, 21 May 2018

May 21, 2018

धन लाभ के लिए सोमवार को करें 8 में से कोई 1 उपाय

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21 मई को ज्येष्ठ के अधिक मास का पहला सोमवार है। ये दिन इसलिए भी खास है क्योंकि अधिक मास 3 साल में एक बार आता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, अधिक मास भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है और सोमवार भगवान शिव का दिन माना जाता है। श्रीकृष्ण के महीने में शिवजी की पूजा करने से किसी का भी बुरा समय दूर हो सकता है और हर इच्छा पूरी हो सकती है। सोमवार को ये उपाय करें…

1. अधिक मास के पहले सोमवार को यानी 21 मई को 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ऊं नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे आपका दुर्भाग्य दूर हो सकता है।

2. पानी में काले तिल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें व ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। इससे पितृ दोष में कमी आती है।

3. शिवलिंग पर सफेद आंकड़े यानी मदार का फूल चढ़ाएं। ये फूल भगवान शिव को बहुत प्रिय हैं।

4. भगवान शिव की पूजा में धतूरा का उपयोग करने से आपकी हर इच्छा पूरी हो सकती है।

5. शिवपुराण के अनुसार, भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन लाभ हो सकता है।

6. शमी वृक्ष के पत्तों से भगवान शिव की पूजा की जाए तो शनि दोष में कमी आती है।

7. शिवपुराण के अनुसार, हरसिंगार के फूलों से भगवान शिव की पूजा करने से धन-संपत्ति मिलती है।

8. अलसी के फूलों से शिव की पूजा करने पर मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है। ऐसा शिवपुराण में लिखा है।

Wednesday, 16 May 2018

May 16, 2018

Astrology News: यमराज पर भारी पड़ गई एक नारी, बनीं सौ पुत्रों की माता

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वट सावित्री व्रत ज्‍येष्‍ठ मास के कृष्‍ण पक्ष की अमावस्‍या को मनाया जाता है। यह व्रत पति की दीर्घायु और संतान प्राप्ति की कामना के लिए महत्‍वपूर्ण है। व्रत से जुड़ी सावित्री की कथा में बताया गया है कि यदि एक स्‍त्री धैर्य और बुद्धिमानी के साथ कठिन परिस्थिति का सामना करे तो यमराज को भी उसके आगे हार माननी पड़ जाती है। देखिए सावित्री की चतुरता ने न केवल उसके पति के प्राण वापस लौटाए बल्कि उन्‍हें 100 पुत्रों की मां भी बनाया…

पिता ने कहा पुत्री से ‘अपने अनुसार चुन लें वर’

यौवनावस्‍था को प्राप्‍त कर लेने के पश्‍चात सावित्री के पिता मद्र देश के राजा अश्‍वपति अपनी पुत्री से कहा कि तुम अत्‍यंत विदुषी हो और अपने पति की खोज तुम अपने अनुसार स्‍वयं ही कर लो

सावित्री ने चुना सत्‍यवान को

पिता की आज्ञा के साथ ही सावित्री एक बुद्धिमान मंत्री को साथ लेकर पति की खोज पर निकल पड़ीं। काफी खोजबीन के बाद उन्‍हें सत्‍यवान के रूप में एक योग्‍य वर मिला। सावित्री ने लौटकर अपने पिता को सत्‍यवान के बारे में बताया तो वहां मौजूद देवर्षि नारद कहने लगे कि सावित्री ने अपने पति का सही चुनाव नहीं किया। उन्‍होंने जिस सत्‍यवान को पति के रूप में चुना है, उसकी आयु अब मात्र एक वर्ष ही शेष है। 

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नारद जी के वचन सावित्री को न डिगा सके

नारद जी के वचन सुनकर भी सावित्री बोलीं- ‘भारतीय नारी जीवन में केवल एक बार ही अपना पति चुनती है। इसलिए मैं सत्‍यवान से ही विवाह करूंगी।’ विवाह के पश्‍चात सावित्री अपने राजसी ठाठ-बाठ छोड़कर अपने पति और सास-ससुर के साथ वन में जीवन व्‍यतीत करने लगीं। सत्‍यवान के पिता शाल्व देश के राजा द्युमत्सेन का राजपाट उनके पड़ोसी राजा ने छीन लिया था। तब से वह अपने पुत्र के साथ वन में रह रहे थे।

सावित्री के मन में बढ़ता जा रहा था भय

सावित्री जैसे-जैसे अपने वैवाहिक जीवन में रम रही थीं, वैसे-वैसे उनका भय भी बढ़ता जा रहा था कि वह दिन करीब आने वाला है जब सत्‍यवान की मृत्‍यु हो जाएगी। उस दिन के आते ही सावित्री साया बनकर अपने पति के साथ रहने लगी। वन में लकड़ी काटने के लिए सत्‍यवान जैसे ही पेड़ पर चढ़े वह अस्‍वथ होकर जमीन पर गिर पड़े। सावित्री ने उन्‍हें संभाला और उनका सिर अपनी गोद में रखकर लिटा लिया। कुछ समय बाद सत्‍यवान अचेत हो गए। सावित्री सब कुछ समझ चुकी थीं। 

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यमराज और सावित्री का वार्तालाप

सावित्री अपने पति की मृत्‍यु का विलाप कर ही रही थीं कि थोड़ी देर में यमराज प्रकट हो गए। यमराज सत्‍यवान को अपने साथ लेकर दक्षिण दिशा की ओर जाने लगे तो सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चल दीं। सावित्री को अपने पीछे आते देख यमराज ने उनसे कहा, ‘तू मेरे पीछे मत आ क्योंकि तेरे पति की आयु पूर्ण हो चुकी है और वह अब तुझे वापस नहीं मिल सकता। अब तू लौट कर अपने पति के मृत शरीर की अन्त्येष्टि कर।’ सावित्री ने उत्‍तर दिया, ‘मैं आपके तो क्‍या अपने पतिव्रता धर्म को निभाने के लिए किसी भी लोक तक जा सकती हूं।’

सावित्री से प्रसन्‍न होकर यमराज ने दिया यह वर

सावित्री के पतिव्रता धर्म से प्रसन्‍न होकर यमराज ने उनसे एक वर मांगने को कहा। सावित्री ने वर में अपने नेत्रविहीन ससुर के लिए नेत्र ज्‍योति मांगी। यमराज ने कहा, तथास्‍तु। फिर से सावित्री ने कहा, ‘मुझे आप जैसे महान देवता के दर्शन हुए, मैं धन्‍य हो गई।’ सावित्री की इन बातों से यमराज ने फिर से प्रसन्‍न होकर एक वर मांगने को कहा। इस बार सावित्री ने अपने ससुर को उनका राज्‍य वापस मिलने का वर मांग लिया। यह सिलसिला चलता रहा और सावित्री की बातों से यमराज प्रसन्‍न होते रहे और सावित्री एक के बाद एक वर मांगती गईं।

जब सावित्री ने मांगा संतान प्राप्ति का वर

जब यमराज ने सावित्री से अंतिम वर मांगने को कहा तो सावित्री बोलीं, मुझे अपने ससुर द्युमत्सेन के कुल की वृद्धि के लिए 100 पुत्र प्राप्‍त करने का वरदान दें। यमराज फिर से तथास्‍तु बोलकर चल दिए। सावित्री भी पीछे-पीछे चल दी। सावित्री को फिर से पीछे आता देख यमराज ने कहा, मेरा कहना मान और अब तू वापस चली जा। इस पर सावित्री बोलीं, आपने जो मुझे 100 पुत्र प्राप्‍त करने का वरदान दिया है। यदि मेरे पति का अंतिम संस्‍कार हो गया तो मैं 100 पुत्रों को कैसे जन्‍म दूंगी। सावित्री की इस चतुरता के आगे यमराज को हार माननी पड़ी। यमराज ने सत्‍यवान को जीवनदान दिया और इस प्रकार सावित्री ने आगे चलकर 100 पुत्रों को जन्‍म दिया।

स्रोत : navbharattimes

Monday, 16 April 2018

April 16, 2018

अक्षय तृतीया 2018: नहीं करने चाहिए ये 7 काम, अशुभ होता है

अक्षय तृतीया 2018 नहीं करने चाहिए ये 7 काम, अशुभ होता है

अक्षय तृतीया यानी सौभाग्य का दिन। लेकिन इस दिन अगर ये काम किए तो अशुभ प्रभाव
पड़ता है। ज्योतिषाचार्य पंडित संतराम ने अनुसार, इस दिन अक्षय तृतीय(18 अप्रैल) के दिन सारे रुके हुए काम पूरे हो जाते हैं। यह बहुत ही शुभ दिन होता है। इस दिन मां लक्ष्मी सबपर अपनी कृपा बरसाती है। लेकिन उनकी पूजा में कुछ गलतियां बिल्कुल भी न करें।

इस दिन खरीदारी का विशेष महत्व होता है। तो इस दिन कुछ न कुछ जरूर खरीदें। वैसे तो सोना चांदी खरीदने से काफी लाभ होता है। लेकिन यह न खरीद सकें तो बर्तन आदि भी खरीद सकते हैं। ऐसा न करना अशुभ माना जाता है।

इस दिन कहा जाता है कि भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का प्रयोग जरूर करना चाहिए। लेकिन ध्यान रहे कि नहाने और साफ कपड़े पहनने के बाद ही तुलसी को तोड़ें। वरना लक्ष्मी माता नाराज हो जाती हैं।

इस दिन वैसे तो व्यक्ति का मन शांत रहता है। लेकिन माना जाता है कि इस दिन गुस्सा नहीं करना चाहिए। शांत स्वाभाव से ही सबसे मिलना जुलना चाहिए। शांत मन से मां लक्ष्मी की पूजा करने से आपको अधिक फल मिलता है।

इस दिन साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ऐसा करने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है। घर के हर कोने को साफ करना चाहिए। गंदे स्थान पर पूजा नही करनी चाहिए। माता के लिए नया स्थान भी लगा सकते हैं।

वैसे तो बड़ों का आदर हमेशा ही करना चाहिए। लेकिन अगर कोई इस दिन बड़ों का आदर नहीं करता है या फिर उनसे अपशब्द करता है तो यह करना आपकी जिंदगी पर सबसे ज्यादा अशुभ प्रभाव डालेगा।

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मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद भी अगर कोई व्यक्ति मन में द्वेष की भावना रखता है या दूसरों का बुरा करने की सोचता है तो मां लक्ष्मी उसके पास कभी नही रुकती।

इस दिन दान करने का विशेष महत्व होता है। जो भी हो सकते पंडित या गरीबों का दान जरूर दें। इस दिन दान देने से या गरीबों को भोजन कराना शुभ होता है। वरना आपकी जिंदगी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

Sunday, 1 April 2018

April 01, 2018

Relience Jio दे रहा है एक साल तक के लिए फ्री प्राइम मेंबरशिप, यहां जानें आपको कैसे मिलेगा?

Relience JIO प्राइम मेंबरशिप

आज से Relience Jio की प्राइम मेंबरशिप खत्म हो जाएगी. ऐसे में कंपनी ने शुक्रवार को ही अपने सभी मौजूदा प्राइम सब्सक्राइबर्स के लिए अगले एक साल के लिए फ्री सब्सक्रिप्शन का ऐलान कर दिया है. लेकिन यहां खास बात ये है कि आपकी प्राइम मेंबरशिप ऑटोमैटिक अपग्रेड नहीं होगी यूजर को प्राइम की एक साल की फ्री सर्विस पाने के लिए क्लेम करना होगा. जियो की ओर से कई प्राइम यूजर्स को ये एक्सटेंशन मैसेज मिल रहा है लेकिन अलग आपको ऐसा कोई मैसेज नहीं मिला है जो यहां जानिए क्या करना होगा?

कैसे पाएं फ्री प्राइम मेंबरशिप?

  • अपने स्मार्टफोन में इंस्टॉल MyJio एप खोलें जहां प्राइम यूजर्स को एक मेंबरशिप एक्सटेंशन का बैनर मिलेगा.
  • इस बैनर पर गेट नाऊ के ऑप्शन पर क्लिक करें, ऐसा करते ही आपके प्लान प्राइम मेंबरशिप रिन्यू करने का मैसेज आ जाएगा
  • जिस नंबर से आप एप पर रजिस्टर होंगे. उस नंबर पर ये सर्विस एक साल के लिए रिन्यू हो जाएगा.
  • अगर आपने MyJio एप खोली और आपको ये बैनर नजर नहीं आ रहा है तो एप को बंद करें. इस एप पर दोबारा लॉग-इन करें.
  • दोबारा लॉग-इन करने पर एप खुलते ही मेंबरशिप एक्टेंशन का बैनर नजर आएगा. इस पर क्लिक करके बताए गए स्टेप फॉलो करें आप अगले एक साल तक का एक्सटेंशन पा सकेंगे.
इस ऑफर के साथ जियो के मौजूदा प्राइम यूजर मार्च 2019 तक प्राइम मेंबर बने रहेंगे औऱ खास बात ये है कि उन्हें ये सुविधा फ्री में मिलेगी. वहीं जियो के नए यूजर्स 99 रुपये भुगतान करके प्राइम मेंबरशिप ले सकते हैं.

आपको बता दें कि 31 मार्च 2018 प्राइम मेंबरशिप खत्म होने की तारीख थी ऐसे में जियो यूजर्स को कंपनी के ऩए ऑफर का इंतजार था. हर यूजर के मन में जियो की मेंबरशिप खत्म होने बाद आगे क्या होगा यही सवाल था. कंपनी ने ऑफर खत्म होने के एक दिन पहले ही बोनांजा ऑफर का ऐलान कर दिया.

प्राइम मेंबर्स के मिलने वाले फायदे

  • जियो अपने प्राइम मेंबर्स को बेहद सस्ते और स्पेशल टैरिफ प्लान देता है.
  • इसमें VoLTE सर्विस के तहत वॉयस कॉल फ्री मिलती है
  • जियो के एप सूट्स की फ्री एक्सेस दी जाती है.
  • ये सभी फायदे प्राइम यूजर्स को अगले 12 महीने यानी मार्च 2019 तक मिलते रहेंगे.

Friday, 30 March 2018

March 30, 2018

हनुमान जयंती 2018: हनुमान जयंती पर यह पूजा का शुभ मुहूर्त

हनुमान जयंती पर यह पूजा का शुभ मुहूर्त

भगवान शिव के 11वें अवतार माने जाते हैं बजरंग बली। कहा जाता है कि इनके मात्र नाम लेने से कई प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। हर साल चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है। इस साल यह 31 मार्च को आयोजित की जाएगी। ज्योतिषियों की मानें तो हनुमान जयंती 30 मार्च को शाम 07:35 से 31 मार्च को शाम 6 बजे तक है।

उदया तिथि होने के कारण 31 मार्च को ही यह पर्व मनाया जाएगा। इसलिए साम 6 बजे तक पूजा किया जाना शुभ रहेगा। सुबह 9 बजे से 11 बजे तक राहुकाल रहेगा। ऐसा भी कहा जाता है कि 31 मार्च की रात्रि को हनुमान जी की पूजा करने से विशेष फल मिलता है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि पूर्णिमा की रात्रि में ही हनुमान जी का जन्म हुआ था।

हनुमान जयंती के दिन हनुमान चालीसा या सुन्दरकांड का पाठ करना अच्छा माना जाता है।

हनुमान जयंती 2018: हनुमान जयंती 31 मार्च को पूरे देश में मनाई जाएगी। चैत्र मास की पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है। कहा जाता है भगवान बजरंग बली की पूजा में कई नियमों का पालन करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि चैत्र माह की पूर्णिमा को ही हनुमान जी का जन्म हुआ था। इस दिन हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार के उपाय किए जाते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं कुछ पूजा और नियमों के बारे में जिनका बजरंग बली की पूजा में खास ध्यान रखना चाहिए।

हनुमान जयंती के दिन अगर व्रत रखते हैं तो इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। जो भी वस्‍तु दान दें विशेष रूप से मिठाई तो उस दिन स्‍वयं मीठे का सेवन ना करें।

अगर हनुमान जयंती पर व्रत रख रहे हैं तो आपको बता दें कि हनुमान जी के व्रत मीठे रखे जाते हैं। इसलिए इस दिन भी भूलकर भी नमक नहीं खाना चाहिए।

हनुमान जी की पूजा में काले रंग के कपड़े बिल्कुल नहीं पहनने चाहिए। हनुमान जी की पूजा लाल रंग या पीले रंग के कपड़े पहनकर करनी चाहिए।

शुद्धता का ध्यान: हनुमान जी की पूजा में साफ और शुद्धता का खास ध्यान रखना चाहिए। इस दिन अगर भगवान का प्रसाद बनाएं तो महाधोकर पवित्र मन से काम करना चाहिए। इसके अलावा ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।


Saturday, 17 March 2018

March 17, 2018

Chaitra Navratri 2018 : सृष्टि के निर्माण का उत्सव है चैत्र नवरात्र, जानें कलश स्थापन का शुभ मुहूर्त और चैत्र नवरात्रि तिथि के बारे में

Chaitra Navratri 2018

नवरात्र शब्द से 'नव अहोरात्रों (विशेष रात्रियां) का बोध' होता है. इस समय शक्ति के नौ रूपों की उपासना की जाती है, क्योंकि 'रात्रि' शब्द सिद्धि का प्रतीक माना जाता है. मनीषियों ने वर्ष में दो बार Navratri का विधान बनाया है- विक्रम संवत के पहले अर्थात् Chaitra मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहली तिथि) से नवमी तक. इसी प्रकार इसके ठीक छह मास पश्चात आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से महानवमी अर्थात् विजयादशमी के एक दिन पूर्व तक नवरात्र मनाया जाता है.

ज्योतिषीय दृष्टि से Chaitra Navratri 2018 का विशेष महत्व है, क्योंकि इस नवरात्र की अवधि में सूर्य का राशि परिवर्तन होता है. सूर्य 12 राशियों में भ्रमण पूरा करते हैं और फिर से अगला चक्र पूरा करने के लिए पहली राशि मेष में प्रवेश करते हैं. सूर्य और मंगल की राशि मेष दोनों ही अग्नि तत्ववाले हैं, इसलिए इनके संयोग से गर्मी की शुरुआत होती है.

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धार्मिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है, क्योंकि ब्रह्मपुराण के अनुसार नवरात्र के पहले दिन आदिशक्ति प्रकट हुई थीं और देवी के कहने पर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सूर्योदय के समय ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि निर्माण का काम शुरू किया था, इसलिए इसे सृष्टि के निर्माण का उत्सव भी कहा जाता है. इसी तिथि से हिंदू नववर्ष शुरू होता है. इसके अतिरिक्त सतयुग का आरंभ भी इसी दिन हुआ था.

चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप में पहला अवतार लेकर पृथ्वी की स्थापना की थी. इसके बाद भगवान विष्णु का सातवां अवतार जो भगवान राम का है, वह भी चैत्र नवरात्र में हुआ था, इसलिए धार्मिक दृष्टि से चैत्र नवरात्र का बाकी नवरात्रों की तुलना में ज्यादा महत्व है. नवरात्र के दौरान जहां मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है, वहीं चैत्र नवरात्रों के दौरान मां की पूजा के साथ-साथ अपने कुल देवी-देवताओं के पूजा का विधान भी है, जिससे यह नवरात्र विशेष हो जाता है.

इस बार बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग : इस बार चैत्र नवरात्र इसलिए भी खास है, क्योंकि विरोधीकृत्य नव संवत्सर 2075, रविवार 18 मार्च, 2018 से प्रारंभ हो रहा है. इस साल उतरा-भाद्रपद नक्षत्र और मीन राशि में नया साल विक्रम संवत 2075 व नवरात्र शुरू हो रहे हैं. इससे सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है.

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इस साल के राजा सूर्य और मंत्री शनि होंगे. यह लगातार चौथा साल है जब नवरात्र 8 दिनों का होगा. 25 मार्च को रविवार को नवमी तिथि का क्षय हो गया है, इसलिए नवरात्र 8 दिनों का ही है. ग्रंथों में लिखा है कि जिस दिन सृष्टि का चक्र प्रथम बार विधाता ने प्रवर्तित किया, उस दिन चैत्र शुदी 1 रविवार था. इसलिए आनेवाला नव संवत्सर 2075 बहुत ही भाग्यशाली होगा, क्योंकि इस वर्ष भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रविवार है, शुदी एवं शुक्ल पक्ष एक ही है.

माता का आगमन हाथी पर : इस वर्ष माता रानी का आगमन हाथी पर हो रहा है. यह आगमन सुख-सुविधाओं के साथ जलवृष्टि वाला रहेगा. माता का आगमन रविवार के दिन हो रहा है और माता का प्रस्थान सोमवार के दिन हो रहा है. सोमवार के दिन गमन से कष्ट एवं अन्य अनावश्यक परेशानियां भी देखने को मिलेंगी.

संपूर्ण सृष्टि प्रकृतिमय : आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो यह प्रकृति और पुरुष के संयोग का भी समय होता है. प्रकृति मातृशक्ति होती है, इसलिए इस दौरान देवी की पूजा होती है. गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि संपूर्ण सृष्टि प्रकृतिमय है और हम जिसे पुरुष रूप में देखते हैं, वह भी आध्यात्मिक दृष्टि से प्रकृति यानी स्त्री रूप है. स्त्री से यहां तात्पर्य यह है कि जो पाने की इच्छा रखनेवाला है, वह स्त्री है और जो इच्छा की पूर्ति करता है, वह पुरुष है.

कलश स्थापन शुभ मुहूर्त
धर्म शास्त्र के अनुसार कलश स्थापन प्रतिपदा तिथि में प्रातः काल सर्वोत्तम होता है. अगर कोई अड़चन होती है तो मध्यान अभिजीत मुहूर्त 11:30 बजे से दिन के 12:24 तक का बेहतर विकल्प आपके पास है. वैसे प्रतिपदा तिथिपर्यंत कलश स्थापना करने में कोई दोष नहीं. नवमी पूजा के नाम से प्रचलित महानिशा पूजा 24 मार्च शनिवार की रात्रि में की जायेगी. महा अष्टमी का व्रत 24 मार्च रवि उदय उदया तिथि में किया जायेगा. 25 मार्च रविवार को नवमी तिथि है.

अतः इसी दिन अनुदेशन नवमी तिथि में नवमी का व्रत ही किया जायेगा. साथ ही श्रीराम नवमी का सनातन पर्व के अवतार के विभिन्न आयोजनों के साथ संपन्न होगा. नवरात्र संबंधित हवन पूजन 25 मार्च, रविवार को प्रातः 7:30 के बाद दिन-रात किसी भी समय किया जा सकता है. नवरात्र व्रत का पारण 26 मार्च, सोमवार को प्रातःकाल में किया जायेगा.

चैत्र नवरात्रि तिथि
18 मार्च : कलश स्थापना, मां शैलपुत्री की पूजा
19 मार्च: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
20 मार्च: देवी दुर्गा के चंद्रघंटा रूप की आराधना
21 मार्च : कुष्मांडा स्वरूप की उपासना
22 मार्च : माता स्कंदमाता की पूजा
23 मार्च : मां कात्यायनी की पूजा
24 मार्च : मां कालरात्रि की पूजा. इस वर्ष अष्टमी के दिन की जानेवाली मां महागौरी की पूजा भी इसी दिन की जायेगी. कन्या पूजन.
25 मार्च : मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ नवदुर्गा पूजन पूर्ण. प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव.
26 मार्च : व्रत का पारण दशमी तिथि को. कलश वेदी पर लगाये गये सतनज की कटाई.

Sunday, 11 March 2018

March 11, 2018

OTA Passing Out Parade - प्रशिक्षण ने बदल दी जीवन की दिशा

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राजस्थान शूरवीरों की धरती रही है। राजस्थान उन प्रदेशों में शामिल हैं जहां के युवाओं में सेना में भर्ती होने का जज्बा देखने को मिलता है। चेन्नई के अफसर प्रशिक्षण अकादमी लेफ्टिनेंट का प्रशिक्षण पूरा कर चुके राजस्थान मूल के अक्षय राजपुरोहित का मानना है कि प्रशिक्षण कठिन जरूर था लेकिन इससे बहुत कुछ सीखने को मिला है। प्रशिक्षण ने जीवन की दिशा ही बदल दी है। शारीरिक एवं मानसिक रूप से काफी मजबूती मिली है। चेन्नई के गर्म मौसम में जरूर कठिनाई हुई लेकिन प्रशिक्षण के बाद जीवन में बहुत बदलाव भी दृष्टिगोचर हो रहा है।
राजस्थान के पाली जिले के एक छोटे से गांव तालकिया के रहने वाले राजुपरोहित अपने परिवार के ऐसे पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने भारतीय वायु सेना में सीधे कमीशन पाया है। हालांकि इससे पहले उनके बड़े पिताजी नारायणसिंह एयरफोर्स में सेवाएं दे चुके हैं, लेकिन सेना में सीधे अफसर बनने वाले वे परिवार के पहले सदस्य है।

बेंगलूरु में पले-बढ़े अक्षय ने जैन विश्वविद्यालय बेंगलूरु से वर्ष 2016 में बीकाम की शिक्षा पूरी की। अक्षय बीकाम की शिक्षा के बाद भारतीय थल सेना में सीधे लेफ्टिनेंट के पद पर चयनित हुए। एनसीसी में सी सर्टिफिकेट हासिल किया है। उन्होंने एनसीसी से सीधे साक्षात्कार दिया। अक्षय के पिता मनोहरसिंह का बेंगलूरु में बिजनेस है जबकि माता भंवरीदेवी गृहिणी है। अक्षय की दोनों बड़ी बहनें आरती एवं सोनू विवाहित है। अक्षय का कहना है कि उसकी बचपन से ही यह ख्वाहिश थी कि वह सेना में भर्ती होकर देश सेवा करे और अब सपना पूरा होने के बाद बहुत खुशी महसूस हो रहा है। उनका कहना है कि यदि इंसान मन में सोच लें और इरादे बुलन्द हो तो कुछ भी संभव है। चेन्नई में मौसम काफी चुनौतीपूर्ण था, प्रशिक्षण भी कठिन जरूर था लेकिन उसे भी एक चैलेंज के रूप में पूरा किया। प्रशिक्षण जीवन में बहुत बदलाव ला देता है। अनुशासन, समय की पाबंदी, सकारात्मक सोच, आत्म विश्वास सरीखी चीजें प्रशिक्षण के दौरान सीखने को मिली। अक्षय के चाचा श्यामसिंह ने बताया कि अक्षय बचपन से ही पढऩे में अव्लल रहा है और सब के साथ घुल-मिलकर रहता है।

नम्रता बनी बालिकाओं के लिए मिसाल
राजस्थान के जोधपुर मूल की मूमल राठौड़ पढ़ाई में शुरू से ही अव्वल रही और अब भारतीय सेना में लेफ्ंिटनेेंट के लिए अफसर प्रशिक्षण अकादमी में प्रशिक्षण ले रही है। मूमल ने आर्मी इन्स्टीट्यूट आफ ला मोहाली से विधि स्नातक किया है। पहली से बारहवीं तक की पढ़ाई उन्होंने जोधपुर के केन्द्रीय विद्यालय नं. एक आर्मी से पूरी की। खेलों में भी उनकी खासी दिलचस्पी रही है। एथलेटिक्स व क्रास कंट्री में गोल्ड मेडल जीता है। मूमल की बचपन से ही डिफेन्स में जाने की इच्छा थी। उनके पिता कैलाशसिंह राठौड़ आनररी कैप्टन है। माता दशरथकंवर भाटी गृहिणी है। बड़े भाई गजेन्द्रसिंह राठौड़ राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में वकालत कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि मूमल लगातार नवीं बार के प्रयास में लेफ्टिनेंट के लिए चयनित हुई। वे चार बार मैरिट में थोड़े से अंतर से रह गई थी। मूमल का कहना है कि यहां प्रशिक्षण व्यक्ति को पूर्ण रूप से मानसिक एवं शारीरिक रूप से तैयार कर देता है।



प्रशिक्षण बनाता है मजबूत
राजस्थान के सीकर जिले के धौद के पास बाडलवास गांव के नरेन्द्र शेखावत ने फर्गुशन कालेज पूणे से बीएससी (स्टेटिसटिक्स) किया। उन्होंने एनसीसी का सी सर्टिफिकेट हासिल किया है। वे छठे प्रयास में सफल हुए। पिता भंवरसिंह शेखावत पुणे में ओटोमोबाइल के क्षेत्र में कार्यरत है। माता कंचन कंवर गृहिणी है। बास्केटबाल एवं हैंडबाल में उनकी रुचि रही है। कालेज के दौरान कुछ पत्र-पत्रिकाओं में आर्टिकल भी छपे। उनका कहना है कि डिफेंस के क्षेत्र में आने से हर कार्य व्यवस्थित हो जाता है। प्रशिक्षण होने बहुत मजबूत बना देता है।

प्रशिक्षण ने जगाया आत्मविश्वास
राजस्थान के जालोर जिले के रथपुरा रामसीन निवासी गजेन्द्रसिंह परमार अपने साथियों को हमेशा मोटिवेट करते हैं। पिता राजेन्द्रसिंह परमार रेलवे में सीटीई के पद पर कार्यरत है। माता कृष्णा कंवर गृहिणी है। गजेन्द्रसिंह ने बालाछड़ी जामनगर के सैनिक स्कूल से प्लस टू की शिक्षा के बाद वर्ष 2014 में पंडित दीनदयाल पेट्रोलियम विश्वविद्यालय गांधीनगर से बीटेक (मैकेनिकल) किया। गजेन्द्रसिंह का कहना है कि प्रशिक्षण से उनका हर पक्ष मजबूती से उभरा है। आत्मविश्वास जगा है। सोच में बदलाव आया है।

पिता से मिली प्रेरणा
इलाहाबाद मूल की शिल्पा तिवारी ने 2016 में यूनाइटेड कालेज आफ इंजीनियरिंग एंड रिसर्च से बीटेक (आईटी) किया। पिता एस.एल. तिवारी भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर व माता शीला तिवारी गृहिणी है। लेफ्टिनेंट में चयनित होने से पहले वे आठ माह तक बेंगलूरु में बाइजूस नामक कंपनी में बतौर बिजनेस डवलपमेन्ट एसोसिएट के पद पर कार्यरत थी। बचपन में जब पिता को अफसर की यूनिफार्म में देखा तो उनके मन में भी सेना में अफसर बनने की भावना जगी। वे केन्द्रीय विद्यालय में राष्ट्रीय स्तर पर बास्केटबाल में हिस्सा ले चुकी है। प्रशिक्षण के बारे में शिल्पा का कहना था कि यहां हर दिन नया सीखने को मिलता है। डिफेंस की सेवा में जो रेसपेक्ट हैं वह अन्य सेवाओं में नहीं मिलता। आखों में अलग ही चमक नजर आती है इस कार्य में।

सातवीं बार में मिली कामयाबी
लखनऊ के पवन गुप्ता ने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीकाम के बाद आर्मी इन्स्टीट्यूट आफ मैनेजमेन्ट कोलकात्ता से एमबीए किया। उनका मजबूत पक्ष यह है कि छह बार विफल होने के बावजूद हार नहीं मानी और आखिरकार सातवीं बार के प्रयास में उनका सलेक्शन हुआ। उनके पिता मोहन गुप्ता बरेली में भारतीय सेना में कर्नल के पद पर कार्यरत है। माता दीप्ति गुप्ता गृहिणी है।

मिली अनुशासन की सीख
बिहार के पटना मूल की इशिता सिंह लेफ्टिनेंट का प्रशिक्षण ले रही है। इशिता का कहना है कि प्रशिक्षण के दौरान अनुशासन की सीख मिली है। लक्ष्य को किस तरह हासिल करें, यह प्रशिक्षण सीखा देता है। पुणे से भारती विद्यापीठ विश्वविद्यालय से विधि स्नातक इशिता के पिता श्रवण कुमार पटना में संयुक्त रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत है। माता इला इसट जेल अधीक्षक है।